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Sunday, July 27, 2008

बैंगलोर के बाद अहमदाबाद, आज कहां होंगे धमाके?

शुक्रवार को बैंगलोर में हुए 7 धमाके, अगले दिन शनिवार को अहमदाबाद में ब्लास्ट। अहमदाबाद में 13 जगहों पर 16 धमाके। सिर्फ और सिर्फ 36 मिनट के अंतराल में 16 धमाके। इन धमाकों की गूंज से दहल उठा है पूरा देश। देश भर में हाई अलर्ट है। लेकिन आज रविवार है सवाल उठता है कि आज कहां.....? आज कौन सा राज्य होगा निशाने पर?वैसे तो ये सवाल कोई भी नहीं पूछना चाहता लेकिन खुफिया विभाग से ये सवाल अब देश पूछ रहा है। ठीक शाम ६-41 पर खुफिया विभाग को ई-मेल मिलता है कि "रोक सको तो रोक लो हम अहमदाबाद को दहलाने जा रहे हैं"। ये चुनौती भरा ई-मेल था लेकिन जब तक कि इस पर कोई भी कार्रवाई होती तब तक तो धमाके होने शुरू हो गए थे।
शाम 6.49 के करीब पहला धमाका। मैं ऑफिस में अपनी सीट पर था जैसे ही सूचना मिली तो रिएक्शन ये ही था कि कहीं कल की कड़ी तो आज अहमदाबाद में नहीं जुड़ रही? फिर तो ये सिलसिला रुका नहीं। ऑफिस में अफरातफरी मच गई। एक के बाद एक खबर कि धमाकों की संख्या बढ़कर इतनी हो गई है। ये सीरियल ब्लास्ट है। मरने वालों और घायलों की संख्या घटती-बढ़ती रही। दिमाग इस बात को मानने से इंकार कर रहा था कि इतनी जगह पर धमाके होने के बाद भी मरने वालों और घायलों की संख्या इतनी कम कैसे है। जबकि ये ब्लास्ट जहां भी हुए थे सभी भीड़भाड़ वाले इलाके ही थे। साथ ही शनिवार होने की वजह से बाजारों में भीड़ भी ज्यादा होती है क्योंकि यहां पर शनिवार को साप्ताहिक बाजार भी लगते हैं। आतंकवादियों ने फिर से साइकिल का इस्तेमाल विस्फोटों में किया है। वो ही टिफिन में बम रख कर दहलाया है देश को। हिसाब लगाया तो जाना कि जब इंडियन मुजाहिद्दीन ने मेल भेजा था उस मेल के मिलने के 8 मिनट बाद से धमाकों का सिलसिला शुरू हो गया और कुल मिलाकर शाम 7.25 तक 17 धमाके हो चुके थे।
पहले भी आतंकवादियों के निशाने पर गुजरात रह चुका है। अक्षरधाम पर हुए आतंकवादी हमले को कौन भूल सकता है। लेकिन इतने कम समय में 17 धमाके वो भी 13 जगहों पर, ये अब तक का सबसे बड़ा सीरियल ब्लास्ट है। 13 जगहों पर धमाके, इस से साबित होता है कि आतंकवादियों ने कितने दिन पहले से ही होमवर्क करके अपने आप को पुख्ता कर रखा होगा, क्योंकि किसी भी जगह पर कोई भी चूक नहीं हुई। अपने में ही ये आतंकवादियों के लिए एक बड़ी सफलता कही जा सकती है और साथ ही केंद्र सरकार, राज्य सरकार और खुफिया विभाग की नाकामयाबी। इन धमाकों में 29 की मौत हो गई और 90 के करीब घायल हुए।
दो दिन से लगातार हो रहे धमाकों के बाद से इंटेलिजेंस विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। एक के बाद एक राज्य में ऐसे धमाके होते रहेंगे तो इसे इस विभाग की विफलता और लापरवाही ही कहा जा सकता है। लेकिन केंद्र ने बताया कि तीन दिन पहले ही राज्य सरकार को इस के लिए चेताया जा चुका था। लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया। वैसे केंद्र हर हफ्ते राज्य सरकारों को खुफिया रिपोर्ट भेजता है।
अहमदाबाद का मंजर कुछ बैंगलोर के मंजर जैसा ही था। लेकिन ये मंजर काफी भयानक था। जयपुर में भी ये मंजर कुछ इसी तरह का था। जयपुर में सात धमाकों में 63 लोगों की जान चली गई थी। अहमदाबाद के लिए सबसे सुकून की बात ये थी कि ये सारे धमाके उतने तीव्र नहीं थे वरना हालात और भी भयानक हो सकते थे। लेकिन इन धमाकों को जिस तरह से अंजाम दिया गया उससे साफ पता चलता है कि बैंगलोर और अहमदाबाद में विस्फोट करने वाला संगठन एक ही है।
अपने पिछले आर्टिकल में मैंने लिखा था कि 'ब्लास्ट पर राजनीति, थू है इन पर...'। आज इन धमाकों ने अधिकतर राजनेताओं के मुंह पर ताला लगा दिया और आज वो ही अधिकारी मीडिया के सामने आए जिनके अधिकार क्षेत्र में ये आता है। एक-दो नेता राजनीति करने आए भी सामने तो मीडिया या यूं कहें कि लोगों ने भी उनको बोलने नहीं दिया। आज दोषारोपण तो हुआ, छींटाकंशी भी हुई पर छीछालेदार राजनीति नहीं हुई। कोई भी मरने वालों के शव पर राजनीति की गंदी चालें नहीं चल रहा था। अब देखना तो ये है कि रविवार का दिन इन धमाकों की भेंट ना चढ़े....।

आपका अपना
नीतीश राज

Saturday, July 26, 2008

ब्लास्ट पर राजनीति, 'थू' हैं इन पर....


देश के किसी हिस्से पर यदि ब्लास्ट हो तो देश के लोग चाहेंगे कि पूरा देश एकजुट होकर उसका सामना करे लेकिन ब्लास्ट पर सिर्फ राजनीति और सिर्फ राजनीति हो रही थी। ये कोई और नहीं हमारे द्वारा चुने राजनेता ही कर रहे थे। लेकिन शर्म आनी चाहिए इन राजनेताओं को जो कि धमाकों में मरे लोगों की लाश पर बैठकर राजनीति की रोटियां सेकने लग गए। देश के एक राजनीतिक दल को इससे परवाह ही नहीं थी कि विस्फोट के पीछे किसका हाथ है। उसे तो आरोप लगाते हए इस बात की खुशी मिल रही थी कि वो कैसे दूसरी पार्टी को कठघरे में खड़ा कर पा रही है।
हमारे देश के एक हिस्से बैंगलोर में एक के बाद एक ब्लास्ट हुए जिन्होंने सीरियल ब्लास्ट का रूप ले लिया। एक के बाद एक ब्लास्ट, कुल मिलाकर 7 धमाके। ऐसा नहीं कि यह विपदा देश पर पहली बार आई हो इससे पहले भी हमारा देश एसी आतंकवादी साजिश से दो-चार हो चुका है। मुंबई, दिल्ली, मालेगांव, वाराणसी-लखनऊ-फैजाबाद, जयपुर, हैदराबाद में धमाके हुए और इन धमाकों की गूंज भारत के साथ-साथ पड़ोसी मुल्कों में भी सुनाई दी। इन धमाकों की निंदा एशिया से लेकर यूरोप तक में हुई। पाकिस्तान के हिमायती अमेरिका को भी सामने आकर इन धमाकों की निंदा करनी पड़ी। भारत के दुश्मन देशों ने भी अफसोस जताया और भारत के ऊपर कसते आतंकवाद के शिकंजे को जड़ से खत्म करने की वकालत की।
इस बार इन जहश्तगर्दों के निशाने पर था बैंगलोर। वैसे, आईटी सिटी बहुत पहले से इन आतंकवादियों के निशाने पर थी। ये तो शुक्र मनाना चाहिए कि ये विस्फोट ज्यादा तीव्रता के नहीं थे वरना अभी मरने वाले की तादाद सिर्फ एक है तब कुछ और भी हो सकती थी। उस मरने वाले के परिवार से कोई तो पूछे कि क्या कुछ चंद रुपये जो हम आपको शोक के रूप में देंगे क्या वो काफी हैं उस 'जिंदा' शख्स के बदले। इसे केंद्र सरकार की नाकामयाबी ही कहेंगे कि इससे जुड़ी कोई भी जानकारी वो राज्य सरकार को मुहय्या कराने में नाकामयाब रही। आपको याद होगा कि कैसे जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद, राज्य सरकार और केंद्र की सरकार एक दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगाने में जुट गए थे। ये धमाका कोई पहली घटना नहीं है लेकिन इस बार इन राजनीतिक पार्टियों का रूख कुछ अलग ही रहा। पहले केंद्र में मौजूद सरकार और जिस राज्य में विस्फोट हुआ है दोनों एक दूसरे के ऊपर थोड़ा बहुत इल्जाम लगाते ही थे। लेकिन आज तो इन पार्टियों ने हद ही कर दी। बीजेपी जैसी पार्टी ने आव देखा ना ताव केंद्र सरकार पर हल्ला बोल दिया। बीजेपी का आरोप था कि 'केंद्र सरकार आतंकवादियों के ऊपर नरमी बरत रही है'। क्या ये कोई वक्त था कि ये दल देश की जनता को संभालने की जगह पर ये टिप्पणियां करें। बेहतर होगा कि ये पार्टियां संसद का बदला संसद में ही उतारें। धमाकों के वक्त अधिकतर देखा गया है कि राज्य सरकार को छोड़कर कोई भी नेशनल पार्टी केंद्र पर आरोपों की झड़ी नहीं लगाती। लेकिन इस बार ऐसा हुआ। अभी वक्त है देश को एकजुट होकर चलने का क्या ये बात भी देश की इन राजनीतिक पार्टियों को बताना होगा, समझाना होगा। पुलिस और आम जनता ऐसे समय के लिए पहले ही इन राजनीतिक पार्टियों से अपील कर चुके है कि ऐसी जगह पर तुरंत ना आया करें।
इन पार्टियों से तो अच्छा एक वो आम आदमी है जो कि विस्फोट में घायल किसी भी एक आदमी को अपना सहारा देकर किसी सुरक्षित जगह पर ले गया होगा या उसकी दवा-दारू पर ध्यान दिया होगा।
राजनीति करने वालों कुछ तो सीखो....देर हुई तो कहीं ऐसा ना हो कि....
जनता एक दिन तुम्हारे साथ ही राजनीति करने पर विवश हो जाए।।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”