राजनीति मैं कोई अपना नहीं होता, सिर्फ होता है तो दल, उनकी अपनी पार्टी। अब तो पार्टी भी अपनी नहीं। उस पार्टी के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं। कितने ही झूठे आरोप दूसरों पर लगा सकते हैं। जब से विश्वास मत मनमोहन सरकार ने हासिल किया है तभी से आरोपों का दौर चल निकला है। धमाकों के बाद तो ये और तेज होगया। सूरत अब भी बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। इसकी शायद किसी को परवाह नहीं। वो तो राजनीति करने में लगे हैं। हर दिन वहां से जिंदा बम मिल रहे हैं। सूरत में विस्फोटकों से भरी कार मिलने के बाद एक चैनल पर केंद्र सरकार के नुमाइंदे और राज्य सरकार के प्रवक्ता कुत्ते-बिल्ली की तरह एक घंटे तक लड़ते रहे। एक दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगाते रहे। वैसे तो ये आए दिन चल ही रहा है लेकिन अब इसको आगे बढ़ाया बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुष्मा स्वराज ने। सुष्मा तो दो कदम आगे ही निकल गईं और केंद्र सरकार को इस घिनौनी वारदात का सरगना ही बता दिया।सुष्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'जहां तक इन दो घटनाओं का सवाल है बैंगलोर और अहमदाबाद का मुझे इसमें एक साजिश की गंध आती है और ये बात मैंने कल भी कही थी एक पब्लिक मीटिंग में, और आज भी दोहराना चाहती हूं, कि मुझे इसमें एक मेजर कॉन्सपिरेसी की बू आती है कि ये कैश फोर वोट स्कैंडल से ध्यान बटाने के लिए और अमेरिका परस्ती के कारण जो मुस्लिम वोट इन से छिटक गया है उस को भाजापा का कृतिम भय दिखाकर अपने खेमें में लाने के लिए की गई साजिश है और मुझे लगता है कि इस साजिश का जल्दी ही पर्दाफाश होगा।' फिर आगे कहती हैं, 'दो राज्यों को टारगेट बनाया जाए और दोनों में एक तरह से ब्लास्ट हों और विश्वास मत के चार दिन बाद हों, विश्वास मत जीतने के 4 दिन के अंदर-अंदर दो राज्य सरकारें और दोनों राज्य बीजेपी शासित हों और दोनों जगह पर सीरियल ब्लास्ट हों, कहीं 18 तो कहीं 24 इसके कोई मायनें हैं कि नहीं और इसलिए जो मैंने बात कही है circumstancial avidence से प्रूव होती है।' तो ये है वक्तव्य बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के।
सुष्मा जी ने अपने ब्यान में केंद्र को उन 50 लोगों का क़ातिल करार दे दिया जिनकी इन ब्लास्ट में मौत हुई। क्या ये सच हो सकता है? किस आधार पर वो ये सब कह गईं इस राष्ट्र की जन्ता से? क्या उनके पास कोई भी ऐसे सबूत हैं जिससे ये केंद्र सरकार नंगी हो सके। इस देश की जनता ये जानना चाहती है। आप के माध्यम से बीजेपी ने पूरे दम के साथ इस खून खराबे की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर थोपी है। यदि आप के पास सबूत हैं और आप नहीं बता रहीं हैं तो फिर आप भी इन्हीं लोगों की श्रेणी में आजाती हैं। और यदि सबूत नहीं है तो चुप हो जाइए सुष्मा जी।।।।। यहां पर अभी सियासत का ये सियासी खेल मत खेलिए। सवाल तो ये भी उठता है कि क्या ऐसे काम आप और आपकी पार्टी
ने किए हैं जब वो सत्ता में थी? या जब भी बीजेपी पर कोई भी मुसीबत आती है तो बीजेपी इस तरह से ही निपटती थी इन मुसीबतों से? शायद बीजेपी ही करती थी ऐसा। याद है देश को वो रथयात्रा जो कि एक विध्वंस पर जाकर खत्म हुई थी।बिना किसी बात के दूसरों पर झूठे आरोप लगाना ही सियासत है। पर शवों पर राजनीति के इस खेल को खेल कर ये राजनीतिक पार्टियां देश की राजनीति को गरक में ले जा रही है। देखना तो अभी ये है कि ऐसे और कितने घिनौने खेल ये लोग हमारे साथ खेलते हैं और राजनीति में लिप्त 'ये' कितने नीचे जाते हैं।
आपका अपना
नीतीश राज