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Saturday, June 13, 2009

धोनी गलतियों का पिटारा मत बनो, एक ही हारे हो, राजनीति ना करो तो जीत सकते हो कप।

1983 में कपिल के रणबांकुरों ने इसी लॉर्ड्स के मैदान पर वेस्टइंडीज की धुरंधर टीम को मात देकर वर्ल्ड कप जीता था। उस दिन कपिल देव ने विवियन रिचर्डस का कैच लपका था आज उसी मैदान पर सिमोन्स ने उसी तरह गंभीर का कैच पकड़ा। सुपर 8 के अपने पहले ही मुकाबले में चैंपियन भारत हार गया। कप्तान धोनी की कप्तानी नहीं चली और ना ही काम आई युवराज की शानदार पारी। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। फैसला तब गलत साबित होने लगा जब भारत के तीन बल्लेबाज महज 29 रन पर पवैलियन लौट गए। गौतम गंभीर 14 रन, रोहित शर्मा और सुरेश रैना 5 रन।

कप्तान-उपकप्तान से आस, पर कप्तान ने किया निराश

फिर क्रीज पर थे कप्तान और उप कप्तान। दोनों से टीम को बहुत उम्मीदें थीं। पर कप्तान धोनी बल्ले से कुछ भी कमाल नहीं दिखा सके और महज 11 रन बनाकर पवैलियन लौट गए। इन 11 रन को बनाने के लिए धोनी ने गेंद खेली 23 और इस 11 रन में धोनी किसी भी गेंद को बाउंड्री के पार नहीं पहुंचा सके। वहीं दूसरी तरफ मैच से पहले उपकप्तान बने युवराज सिंह ने लाज बचा ली। युवी ने 43 गेंद का सामना करते हुए 67 रन की पारी खेली। इस पारी में 6 चौके और 2 छक्के शामिल थे। एडवर्डस ने अपनी ही गेंद पर कैच लपककर युवी की पारी को समाप्त किया।

नहीं दिखा यूसुफ पठान का जलवा

यूसुफ पठान का जलवा वैसा नहीं दिखा जैसा आईपीएल में दिखा था। जैसी उम्मीद यूसुफ से थी उसके पासंग भी नहीं फटके यूसुफ मियां। कई बार सिर्फ बल्ला घुमाते नजर आए। जब पठान से उम्मीद थी कि वो 2-4 छक्के मार कर टीम के स्कोर को मजबूती की तरफ ले जाएंगे वहीं पर वो विफल रहे। 23 गेंद पर 31 रन जिसमें 3 चौके और 1 छक्का। इरफान भी कोई कमाल बल्ले से नहीं कर पाए। पर अंत में भज्जी ने हाथ जमाते हुए महज़ 4 गेंदों पर 3 चौकों की मदद से नाबाद 13 रन बनाए।
टीम इंडिया ने युवराज के आउट होने के बाद अंतिम 20 गेंदों पर सिर्फ 23 रन जोड़े जो कि हार का एक मुख्य कारण बने। वेस्टइंडीज की तरफ से ब्रावो ने 4 और एडवर्डस ने 3 विकेट झटके और किसी अन्य गेंदबाज को कोई भी सफलता नहीं मिली। भारत की पूरी टीम पर ये दो गेंदबाज ही भारी पड़े।

इंडीज की बैटिंग, शुरूआती झटके के बाद कमाल

154 रन का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज को शुरुआत में ही इरफान ने फ्लेचर को आउट कर दिया। पर दूसरी तरफ गेल जमे रहे और भारत की मुश्किलें बढ़ाते रहे। यूसुफ पठान ने जब जहीर के हाथों केच लपकवाकर गेल को 22 के स्कोर पर आउट किया तो लगा कि टीम जीत सकती है पर ये दिन टीम इंडिया के लिए नहीं था। सिमोन्स और ब्रावो ने सारे गेंदबाजों को पीटा। ब्रावो ने सब गेंदबाजों को धुना। सिमोन्स को ओझा ने इरफान के हाथों कैच आउट किया। 5 चौकों की मदद से 37 गेंद पर सिमोन्स ने 44 रन बनाए। वहीं ब्रावो ने सिर्फ 36 गेंद पर शानदार नाबाद 66 रन बनाए, इसमें 4 चौके और 3 छक्के शामिल थे। ब्रावो बने मैन ऑफ द मैच। भारत की तरफ से भज्जी ने क्रिस गेल के सामने ओवर मेडिन डाला।

ना चला बल्ला, ना चली कप्तानी, कीपिंग में भी कांपे हाथ

बल्लेबाजी के ऑर्डर में फेरबदल, क्या होगया धोनी को? इस महत्वपूर्ण मुकाबले से ठीक पहले धोनी ने बल्लेबाजी क्रम में फेरबदल किया। अभ्यास मैच और लीग मुकाबलों में धोनी ने 3 नंबर पर बल्लेबाजी की, तो क्या वजह थी कि इस महत्वपूर्ण मुकाबले में धोनी ने फेरबदल किया और रैना को 3 नंबर पर भेजा। धोनी ने कीपिंग में भी गलती की। सिमोन्स को रन आउट करने का मौका धोनी ने गंवा दिया और साथ ही ब्रावो का कैच छोड़ना ये काफी भारी पड़ा। धोनी के दिमाग में क्या चल रहा है ये बता पाना तो मुश्किल है लेकिन उसकी बानगी देखने को मिली जब कि धोनी ने वीरू के जाने के बाद पूछा गया कि कौन हो टीम इंडिया का उपकप्तान। तो धोनी ने युवराज की जगह गंभीर का नाम लिया। ऐसा क्यों? क्या धोनी अपने ऊपर कोई भी सीनियर टीम में नहीं चाहते। पर अभी पूरा वर्ल्ड कप बाकी है धोनी यदि सब को साथ लेकर चलें तो ये कप हमसे कोई नहीं छीन सकता।

इस मैच की हार से ये भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्टेडियम में भारतीय प्रशंसकों का दिमाग इतना खराब हुआ कि उन्होंने भारत के खिलाफ वेस्टइंडीज के लिए नारे लगाने लगे। वैसे आज इस मैच को देखने के लिए वो शख्स भी लॉर्ड्स के स्टे़डियम में मौजूद था जिसे पूरा भरोसा है कि टीम इंडिया ये कप किसी और को नहीं लेने देगी। सचिन तेंदुलकर भी स्टेडियम में मौजूद थे शायद निराश होंगे कि भारत इतनी बुरी तरह से हार गया।


आपका अपना
नीतीश राज

Tuesday, November 18, 2008

युवराज ने फिर धोया अंग्रेजों को

पहला ४, दूसरा १५, तीसरा २९ पर भारत के विकेट गिर चुके थे। इस बार धोनी ने जीता था टॉस और पिछली बार की तरह पहले बल्लेबाजी फैसला गलत साबित होने वाला लग रहा था। पर जैसे कि गांगुली ने कहा था कि कप्तान के लिए जिस एक्सट्र लक की जरूरत होती है वो धोनी के पास है और हुआ भी कुछ ऐसा ही। पिछले मैच में युवराज ने महज ७८ गेंद पर नाबाद १३८ रन की पारी खेली थी। ठीक इस बार भी १२२ गेंद पर ११८ रन की शानदार पारी खेली जिसमें १५ चौके और २ लंबे छक्के थे।

ये यंग युवराज का जलवा है

इसे कहते हैं शानदार पारी। युवराज ने वापसी के बाद तो अपना जलवा दोनों मैचों में दिखाया है वो लाजवाब है। दूसरे वन डे में जब रनों के युवराज मैदान में आए तो सिर्फ आठवें ओवर में २९ रन पर ३ विकेट गिर चुके थे। फिटनेस से जूझ रहे २६ साल के युवराज के लिए ये परीक्षा की घड़ी के सामान थी। राजकोट में पीठ के दर्द के कारण एक दिन पहले तक लग रहा था कि युवी फिटनेस टेस्ट पास कर भी पाएंगे या नहीं। युवराज का साथ दिया दूसरी तरफ वन डे के राहुल द्रविड़ की जगह ले चुके मिस्टर भरोसेमंद गौतम गंभीर ने। गंभीर ने ५६ गेंदों पर अपनी हाफ सेंचुरी पुरी की और इसके साथ धोनी और गंभीर ने इस साल २००८ में १००० रन पूरे कर लिए। इस साल सिर्फ दो खिलाड़ी ही हैं जिन्हें ये खिताब मिला है। युवराज और गंभीर ने १३४ रन की साझेदारी की और भारत को सम्मानजनक स्कोर की तरफ बढ़ा दिया।

यूसुफ का साथ

अब बारी थी कप्तान की लेकिन कप्तान धोनी कमाल नहीं दिखा सके और महज १५ रन पर कोलिंगवुड ने उनके स्टंप बिखेर दिए। फिर आया वो शख्स जो टीम इंडिया को बड़े स्कोर की तरफ ले गया। यूसुफ पठान ने युवराज का साथ देते हुए टीम को एक ऐसी जगह पर ले गए जहां पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। युवराज ने कहा था कि वो तो सोच रहे थे कि २२५ रन का लक्ष्य काफी होगा इस पिच पर। और भारत ने बनाए २९२ रन जिसमें यूसुफ पठान के महज २९ गेंदों पर ५० रन शामिल हैं जिसमें ४ छक्के और २ चौके हैं। सहवाग, रैना, रोहित और युवराज स्टूअर्ट ब्रोर्ड के शिकार बने।

जोर का झटका धीरे से

इंग्लैंड पहले ही आधा मैच हार चुकी थी, ऐसी सोच रखने वालों को जोर का झटका जरा धीरे से लगा। पहले ओवर की आखिरी गेंद पर रैना ने जबरदस्त फुर्ती दिखाते हुए रोहित की तरफ खेली गई बैल की ड्राइव को बीच में लपककर स्टंप पर सटीक थ्रो से बैल को रन आउट कर दिया। प्रायर और शाह के बीच ९६ रन की साझेदारी हुई। इस बीच प्रायर को दो जीवनदान भी मिले और इंग्लैंड का स्कोर १०० का आंकड़ा पार कर गया। जहीर खान, आरपी सिंह, मुनाफ पटेल तीनों तेज गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए।

पहले बल्ले से रक्षक, फिर गेंद से भक्षक

युवराज ने अपना सबसे पहला शिकार शाह को बनाया, शाह की शानदार पारी १ छक्का और ८ चौकों की मदद से ५८ के निजी स्कोर पर समाप्त हुई। फिर प्रायर को अगले ओवर में कोई और जीवनदान युवराज ने नहीं दिया और क्लीन बोल्ड कर दिया। ये युवराज का दूसरा ओवर था लेकिन फिर फ्लिंटॉफ और कप्तान पीटरसन की जोड़ी ने मिलकर तेजी से रन चुराने शुरू किए। दोनों ने मिलकर १२ ओवर में ७४ रन की साझेदारी की। इस बीच ९ रन प्रति ओवर की औसत से रन चाहिए थे इंग्लैंड की टीम को, इसको कम करने के लिए ३२वें ओवर में पीटरसन ने तीसरा पावर प्ले लिया। इसका पूरा फायदा उठाते हुए फ्लिंटॉफ ने भज्जी के एक ही ओवर में ३ छक्के जड़ दिए। अंतिम पावरप्ले में इंग्लैंड ने ५९ रन बटोरे। अब १३ ओवर में चाहिए थे ११० रन। पर अपने आठवें ओवर में युवराज ने खतरा बनते पहले फ्लिंटॉफ को आउट किया और फिर पीटरसन को भी चलता कर दिया। प्रायर, शाह, फ्लिंटॉफ, पीटरसन सभी युवराज की तेज गति की गेंदों को समझ नहीं पाए। प्रायर और पीटरसन को क्लीनबोल्ड फिर शाह और फ्लिंटॉफ एलबीडब्ल्यू आउट किया।

बल्ले से ना सही गेंद से ही सही

बाकी बची कसर वीरेंद्र सहवाग ने पूरी कर दी। अभी सोचा जा रहा था कि कोलिंगवुड, बोपारा और पटेल कुछ कमाल कर सकते हैं पर तीनों खिलाड़ी कुछ कमाल नहीं कर पाए। वहीं सहवाग ने खतरनाक बनते पटेल को पहले आउट किया फिर ब्रोड और हारमीशन को भी चलता किया। सहवाग ने ५ ओवर में २८ रन देकर ३ विकेट झटके।
सीरीज में भारत २-० से आगे हैं और लगातार दो मैच जीतकर मेजबानों के हौसले जहां बुलंद हैं तो वहीं मेहमान ये सोचने पर मजबूर हैं कि क्या वो युवराज की आंधी को कभी रोक पाएंगे। फ्लिंटॉफ भी पंगा नहीं लेना चाहते क्योंकि पिछली बार पंगा लिया था तो ६ छक्कों की सौगात युवी ने भेंट के रूप में दी थी, अभी भूले तो नहीं होंगे फ्लिंटॉफ।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”