Showing posts with label England. Show all posts
Showing posts with label England. Show all posts

Thursday, June 18, 2009

धोनी के हाथ में कमान नहीं

आधी रात तक टीवी के आगे आंख गड़ाए रखना, मैच के जुनून के कारण घर में सभी से झगड़ा करके टीवी के सामने डटे रहना, एक भी गेंद नागा जाने नहीं देना। हर गेंद पर विश्लेषण करते रहना और लग रहा था कि टीम इंडिया यदि कैसे भी 125-130 तक दक्षिण अफ्रीका को रोक दे तो फिर जीत हाथ में होगी। हुआ भी वो ही भारत ने उनको रोक तो दिया और यदि डीविलियर्स के साथ भारतीय गेंदबाजों ने चूक ना की होती तो ये स्कोर और भी शायद कम होता। पर 131 का टारगेट ठीक था और लग रहा था कि टीम जीत जाएगी। टीम इंडिया की बैटिंग आई तो लगा कि दोनों ओपनर पिछली हार से सबक ले चुके है। 6 ओवर तक बिना विकेट खोए टीम इंडिया का स्कोर 47 रन हो चुका था। अब लगा कि 84 गेंद पर 83 रन जीत के लिए टीम इंडिया को चाहिए थे तो जीत के भरोसे के साथ अधिकतर लोग सो गए पर सुबह ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।

सुबह सबको पता चला कि भारत 12 रन से हार गया। मुझे याद है कि जब मैंने मैच देखना बंद किया था ठीक उसके एक रन के बाद ही गंभीर आउट हो गए। और भारत ने मात्र 22 रन के अंतर पर अपने 5 विकेट खो दिए। जिसमें गंभीर,रैना, रोहित, कप्तान धोनी, सुपर हीरो यूसुफ पठान सब पवेलियन लौट चुके थे। हाइलाइट्स देखने के बाद लगा कि ये कैसा गेम खेली है टीम इंडिया। रैना ने पिछले तीनों मैच में ऐसी ही गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर अपना विकेट खो दिया। कप्तान धोनी ने फर्राटा दौड़ लगाने के बाद अपना विकेट गंवा दिया। यदि युवराज पूरी तरह से फिट होते तो शायद वो रन हो जाता वर्ना वो रन किसी भी कीमत पर नहीं था। साथ ही साथ धोनी ने ये भी देखना उचित नहीं समझा कि उनके सहयोगी अपनी क्रीज से एक कदम भी नहीं आगे बढ़े हैं और धोनी सुपरफास्ट तरीके से आधी क्रीज पार कर गए और आउट होकर चलते बने। आईपीएल के हीरो यूसुफ पठान तो कैच प्रैक्टिस कराके चलते बने। और इस तरह भारत ने महज 22 रन के अंदर आधी टीम लौट गई। दिल पे लेने वाले अधिकतर आहत हुए। तो क्या कारण था कि टीम इंडिया टी-20 में इस बार क्यों हारी?

धोनी मान रहे हैं कि जब टीम का सलेक्शन हुआ तब ही काफी खिलाड़ी 100 फीसदी फिट नहीं थे
सुपर 8 में सुपर फ्लॉप, आईसीसी वर्ल्ड टी 20 में इस बार भारत ने 5 मुकाबले खेले और सिर्फ 2 में ही जीत हासिल की वो भी उन टीमों के साथ जो शायद इस टूर्नामेंट की सबसे कमजोर टीमें थी। 2007 में टीम इंडिया ने सुपर 8 में तीन मैच खेले थे और दो में जीत दर्ज की थी पर इस बार 2009 में टीम इंडिया ने फिर 3 मैच खेले और तीनों में हार का मुंह देखना पड़ा।

अब बात सामने आती है क्यों ऐसा हुआ? क्यों टीम इंडिया सुपर 8 में अपने सारे मैच हार गई? क्यों टीम इंडिया को इस वर्ल्ड कप की सबसे फेवरेट टीम माना जा रहा था पर फिर भी वो हर क्षेत्र में फेल रही? क्यों टीम इंडिया के खिलाड़ी इस वर्ल्ड कप में पर्फोर्म नहीं कर पाई? क्या हुआ जो कि एकजुट टीम बिखरी हुई नजह आई? पहली बार ऐसा क्या हुआ कि कप्तान और कोच आमने-सामने आकर खड़े हो गए? क्यों इस बार चयनकर्ता और बोर्ड एक ही सुर में बोलते हुए कोच के पीछे पड़ गए उस कोच के पीछे जिसे वो अब तक का सबसे बेहतरीन कोच मान रहे थे?

तो क्या है इन सब के पीछे की बात। पहली बात तो ये कि टीम इंडिया को फेवरेट क्यों माना जा रहा था क्योंकि भारत पूर्व चैंपियन था। वर्ना भारत ने पिछले वर्ल्ड कप 2007 से 2009 वर्ल्ड कप तक सिर्फ 5 मैच 20-20 टीम की तरह खेले और उसमें 3 में हार मिली। पिछले वर्ल्ड कप का जादू टीम इंडिया नहीं दिखा सकी। पिछली बार ये सभी देशों के लिए एक नया फॉरमेट रहा पर भारत के पास मजबूत, चुस्त, फुर्तीले, जवान, जोशीले, खिलाड़ी थे जिन्होंने अपने जोश के कारण टीम को जीत दिला दी। और साथ ही पिछला वर्ल्ड कप धोनी ने एक चैलेंज की तरह लिया था पर इस बार ऐसा नहीं था। 'हमारे सारे खिलाड़ी टूर्नामेंट से पहले बुरी तरह थके हुए थे' कोच ने कहा। कप्तान ने इससे अलग कहा, नहीं हम थके नहीं थे पर बाद में पलट गए कि हम थके जरूर थे पर उतने नहीं जितना श्रीलंका सीरीज से पहले। अब धोनी मान रहे हैं कि जब टीम का सलेक्शन हुआ तब ही काफी खिलाड़ी 100 फीसदी फिट नहीं थे। अरे, धोनी साहब हार गए तो अब सब बोलने लगे।

वर्ल्ड कप 2007 से 2009 वर्ल्ड कप तक सिर्फ 5 मैच 20-20 टीम की तरह खेले और उसमें 3 में हार मिली।

यदि देखा जाए तो भारत के खिलाड़ी हर जगह दूसरी टीम के साथ चैक मेट किए गए। जिस खिलाड़ी को शॉट पिट गेंदें खेलने में दिक्कत होती थी तो दूसरी टीम ने इस पर खूब होमवर्क किया और उस खिलाड़ी को कोई दूसरी गेंद नहीं फेंकी गई। रोहित और रैना आईपीएल में मजबूत दिखे पर यहां पर बुत बन कर ही रह गए खासकर कि रैना जिनसे शॉट पिच गेंदें खेली ही नहीं गई। सुपर 8 में तीन में से दो बार रैना इस गेंद का ही शिकार बनें। वहीं धोनी ने बाद में खुद कबूला कि हां वो 100 फीसदी नहीं दे पाए। जहां तक गेंदबाजी की बात है तो दूसरी टीम के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित होने वाले ईशांत शर्मा को कुछ यूं मार्क किया गया कि ईशांत को बांग्लादेश के खिलाफ सिर्फ दो विकेट मिले और अब तक खेले 8 मैचों में सिर्फ 4 विकेट का उनका कैरियर रहा। वहीं ईशांत के कारण ही आरपी सिंह बाहर बैठे जो कि पिछली बार टीम विनर साबित हुए थे। सेलेक्टर को इस बात पर ध्यान रखते हुए ईशांत को और ट्रेनिंग देनी चाहिए। हर कीमत पर फील्डिंग भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती नजर आई। खुद धोनी ने इस बार रन आउट और स्टंपिंग छोड़ी। साथ ही युवराज के घुटने की चोट इतनी ज्यादा थी कि वो झुक नहीं पा रहे थे। इंग्लैंड से भारत सिर्फ ३ रन से हारा था उसका कारण यदि सीनियर खिलाड़ियों को माना जाए तो वो कम नहीं है। सरासर वो धोनी की गलती थी कि आरपी सिंह के 1 ओवर होते हुए भज्जी को ओवर दिया गया और भज्जी ने 10 रन उस ओवर में दे दिए। साथ ही अंतिम गेंद पर यदि युवराज थोड़ा झुक जाते और अपने पैर के नीचे से गेंद को नहीं निकलने देते तो शायद वो चौका नहीं होता पर अनफिट युवी वो चौका नहीं रोक सके और भारत 3 रन से हार गया।

कोच ने इल्जाम लगाया कि थकी हुई टीम उनको मिली वर्ल्ड कप से पहले मिली थी। वहीं सेलेक्टर कहते हैं कि आईपीएल से नुकसान नहीं हुआ और दूसरे देशों को तो फायदा हुआ फिर गैरी कैसे कह रहे हैं। सेलेक्टर ऐसा कैसे कह सकते हैं। दूसरे देश के खिलाड़ी अनुभव लेकर अपनी टीम के साथ जाकर मिल गए पर वहीं टीम इंडिया के खिलाड़ी साथ होकर भी साथ नहीं थे। हम आईपीएल में आपस में ही लड़ रहे थे, कोई ये तो बताए कि हम टीम की तरह न्यूजीलैंड के दौरे के बाद कब खेले? पिछले 12 महीने में भारत ने 11 महीने क्रिकेट खेली है। क्यों झूठ कहने पर तुले हुए हैं बोर्ड और चयनकर्ता।


जून 2008 में किटप्लाई कप
जून-जुलाई 2008 में एशिया कप
जुलाई-अगस्त 2008 में भारत का श्रीलंका दौरा
अक्टूबर-नवंबर 2008 में भारत के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया
नवंबर-दिसंबर 2008 में इंग्लैंड का भारत दौरा
जनवरी-फरवरी 2008 में भारत का श्रीलंका दौरा
फरवरी-अप्रैल 2009 में भारत का न्यूजीलैंड दौरा
18 अप्रैल से द.अफ्रीका में आईपीएल
5 जून से आईसीसी वर्ल्ड टी-20
अब 26 जून 2009 से वेस्टइंडीज दौरा

तीसरा सबसे बड़ा कारण है इस कप के शुरूआत में ही धोनी की सहवाग संग लड़ाई। इसने टीम को खेमों में बांट दिया। कप्तान को आकर मीडिया के सामने, दुनिया के सामने बयान देना पड़ा। वहीं, दूसरी तरफ धोनी ने अपना कूल टेंप्रामेंट खो दिया और मीडिया के साथ वाकयुद्ध में उलझ गए जो कि सरासर गलत था खासकर कि किसी भी टूर्नामेंट से पहले। इससे साफ पता चलता था कि धोनी टीम पर अपना वर्चस्व कायम रखना चाहते थे और वहीं टीम में गुट बनने लगे थे। युवराज, गंभीर, रैना सब अलग-थलग रहे पूरे टूर्नामेंट के दौरान। वहीं उपकप्तान के नाम पर गंभीर के नाम का सुझाव देना भी किसी संशय को जन्म देता है। युवराज का उपकप्तान बनते ही युवी का मीडिया से पीसी में कहना कि हम अभ्यास आपसे(मीडिया से) पूछ कर नहीं करेंगे और हम जानते हैं कि हमें कब प्रैक्टिस करनी है, कल के नतीजे बता देंगे कि हमें प्रैक्टिस करनी चाहिए थी या नहीं। अगले दिन इंग्लैंड से हार गई टीम। और टीम के कुछ खिलाड़ी हार के बाद हंसते हुए दिखाई दिए कैमरे पर। जब युवी पीसी में ये बात कर रहे थे तब दूसरी तरफ वहीं धोनी प्रैक्टिस कर रहे थे इससे साफ लगता है कि धोनी के हाथ में कमान नहीं रह गई है।

आपका अपना
नीतीश राज

Monday, June 15, 2009

धोनी तूने ये क्या किया, भारत को आईसीसी वर्ल्ड टी-२० से बाहर किया।

....और भारत हार गया। पूर्व चैंपियन भारत सेमीफाइनल की रेस से बाहर होगया। इंग्लैंड ने 3 रन से दी मात। काश! भारतीय कप्तान अब होने वाले दर्द को पहले समझे होते तो बेहतर होता, पर जबतक समझते तब तक बहुत देर हो गई।
धोनी ने कहा कि वो दबाव में युवराज को नहीं भेजना चाहते थे।

गलतियों का पिटारा बने कप्तान

हार का ठीकरा कई गलतियां कर बैठे धोनी, सारी रणनीति बेकार होगई, इस बार ऐसा लगा कि धोनी में वो जीत की भूख कहीं खत्म हो गई है, वो आग जिसके कारण पिछला टी 20 वर्ल्ड कप जीता था। कहां गई धोनी की टीम को साथ लेकर चलने की काब्लियत। कहां काफुर हो गया वो कूल एटिट्यूड जिसके कारण माही जाने जाते थे। कई गलतियां की इस बार के टी 20 में कप्तान साहब ने।

ये धोनी तुझे हुआ क्या?

हंसता हुआ, लंबे बाल वाला वो लड़का जब भी कीपिंग करता तो दुश्मन देश के जनरल के मन को भी लुभा जाता। जब से कप्तानी संभाली धोनी के ऊपर सीनियर्स को दरकिनार करने का इल्जाम लगता रहा। इसी कारण से जब सहवाग की बात सामने आई तो कोई भी धोनी पर यकीन नहीं कर पा रहा था। जब ध्यान मैच और प्रैक्टिस पर होना चाहिए था तब वो टीम की एकता परेड कराने में जुटा हुए थे। क्योंकि धोनी को अपने नाम को बचाने की चिंता जयादा सताने लगी थी। धोनी ने शायद कहीं ना कहीं क्रिकेटरों का विश्वास खोया है जिसका एहसास धोनी को भी हो गया है।
रवींद्र जडेजा को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका क्यों दिया गया?

ड्रेसिंग रूम में राजनीति! और अपनों ने डुबोई लुटिया

टीम में बने रहने के लिए गुटबाजी करना तो धोनी की आदत बन गई और आरपी सिंह के मामले में तो वो सेलेक्टर से दो-चार भी हो लिए। वहीं जब सहवाग की छुट्टी हुई तो उपकप्तान कौन हो इस पर चर्चा शुरु हुई। सीनियर भज्जी, युवराज को छोड़कर धोनी ने गौतम गंभीर का नाम सामने रखा। वेस्टइंडीज से मैच खेलने से ठीक पहले इस तरह की राजनीति, क्यों?
टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला क्या इसलिए भी लिया गया क्योंकि धोनी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बयान दिया था कि भारतीय टीम दबाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है। पर पहले गेंदबाजी भारत ने की और हमेशा की तरह ईशांत शर्मा कोई कमाल नहीं कर सके। अभी तक ईशांत ने टी-20 में 8 मैच खेले हैं और 4विकेट लिए हैं। हमारे पेसर में सबसे घटिया प्रदर्शन गर किसी का है तो वो ईशांत ही हैं। तेज गेंद डालने की फिराक में स्विंग भी हाथ से निकल रही है और विकेट भी हाथ में नहीं आरहे।

सबसे सफल गेंदबाज आरपी से अंतिम ओवर नहीं कराया गया क्यों? क्यों??

वहीं रवींद्र जडेजा को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका क्यों दिया गया? जहां पर जाकर जडेजा ने ३५ गेंद की मदद से सिर्फ २५ रन बनाए जिसमें १ ही चौका शामिल था। २०-२० के मुकाबले में १० गेंद खाली जाने का मतलब समझ सकता है कोई। चौथे नंबर पर सचिन, वेंगसरकर, अजहरुद्दीन, युवराज जैसे खिलाड़ी खेलते रहे हैं। ये वो क्रम है जिस पर टीम का पूरा दारोमदार होता है। युवराज हमेशा से ही इस नंबर पर खेलते रहे हैं और इस करो या मरो के मुकाबले में हमारे सबसे महत्वपूर्ण क्रम के साथ ही ये फेरबदल क्या सोच कर किया गया?

वैसे भी धोनी कहते रहे हैं कि टीम इंडिया दबाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है, यदि ये बात सही थी तो फिर धोनी खुद क्यों दबाव में ठीक प्रदर्शन तक नहीं कर पाए। बाद में धोनी ने कहा कि वो दबाव में युवराज को नहीं भेजना चाहते थे। क्या नहीं लगता कि धोनी अपनी ही बातों से मुकरने लगे हैं। यदि धोनी चाहते तो जडेजा की जगह पर यूसुफ को भेज सकते थे।

खुद का प्रर्दशन हुआ धुंआ-धुंआ

ईशांत और आरपी बैटिंग में बिग जीरों हैं। ईशांत ने तो अब तक सिर्फ ३ रन बल्ले से बनाए हैं और ८ मैच में महज़ ४ विकेट लिए हैं।
आरपी सिंह को इरफान पठान की जगह खिलाया गया। आरपी ने प्रदर्शन भी सही किया महज ३ ओवर में १३ रन देकर १ सफलता भी ली। सबसे सफल गेंदबाज से अंतिम ओवर नहीं कराया गया क्यों? क्यों?? ईशांत और आरपी बैटिंग में बिग जीरों हैं। ईशांत ने तो अब तक सिर्फ ३ रन बल्ले से बनाए हैं। वहीं इरफान पठान बल्ले से तो ईशांत से काफी ठीक हैं। फिर क्यों ये फेरबदल किया गया।

ये कहानी रही दोस्तों की पर वहीं खुद के प्रदर्शन ने धोनी को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। आईसीसी वर्ल्ड २००९ में धोनी का प्रदर्शन-बांग्लादेश- 26 रन-21गेंद पर, आयरलैंड 14 रन-13 गेंद, वेस्टइंडीज 11 रन-23 गेंद, इंग्लैंड 30 रन-20 गेंद। करो या मरो मुकाबले में कप्तान क्रीज पर हो और टीम हार जाए। इसका क्या मतलब लगाया जाए? चौदहवें ओवर में मैदान पर पहुंच थे कप्तान तब जीत के लिए चाहिए थे ३९ गेंद पर 69 रन पर दो धुरंधर क्रीज पर थे और स्कोर नहीं पा सके, इतनी खराब बल्लेबाजी कि एक छक्का भी धोनी से नहीं लगा। एक कप्तान के लिए इससे शर्मनाक क्या हो सकता है कि उस के क्रीज पर रहते हुए मैच हार जाए। पर फिर भी ना तो बैटिंग ऑर्डर में फेरबदल की गलती मानी और ना ही टीम पर चढ़ी थकान।

चलते-चलते

इंग्लैंड की तरफ से बल्लेबाजी में बोपारा के ३७, पीटरसन के २७ गेंद पर ४६ रन, मैस्क्रेनेस ने नाबाद २५ रन बनाए। पर साथ ही भारत ने १६ रन एक्स्ट्रा दिए जिसमें १४ रन वाइड से गए। भज्जी ने ३, जडेजा ने २, आरपी और जहीर ने १-१ विकेट लिए। जिसमें आरपी से पूरा स्पैल भी नहीं कराया गया।
भारत की तरफ से नहीं चले रोहित और रैना। पता नहीं क्यों शॉट पिच बॉल से इतना क्यों घबराता है रैना, इंडीज के खिलाफ भी इसी तरफ आउट और इतने निर्णायक मैच में भी फिर से वही गलती। गंभीर टिके पर वो लय और आग नहीं दिखी जो दिखनी चाहिए थी। अंदर की राजनीति का शिकार गंभीर सिर्फ २६ रन पर अपना विकेट मैस्क्रेनेस के ओवर में ब्रोड के हाथों में देकर वापिस हो लिए। जडेजा ने अपना पूरा जोर लगा लिया पर गेंद ने उनके बल्ले को चूम कर बाउंडरी पार करने से मना कर दिया और धोनी के साथ मिलकर जडेजा ने टीम इंडिया को सेमीफाइनल की रेस से बाहर कर दिया। युवराज नहीं चाहते थे कि जडेजा के आउट होते ही उस खिलाड़ी के साथ साझेदारी करनी पड़े जिससे खट्टास मैदान और मैदान के बाहर दिखती है। पर हुआ ऐसा ही तो युवराज विकेट कीपर फोस्टर के ग्लब्ज से अपना स्टंप उखड़वाकर चलते बने। और फिर ना तो धोनी और ना ही यूसुफ पठान कुछ कर सके और भारत ने लगातार दूसरा मैच लॉर्ड्स में गंवा दिया।

मैच से एक दिन पहले युवी ने कहा था कि हम जानते हैं कि हमें कब अभ्यास करना है और कब नहीं ये आप मीडिया वालों से पूछकर हम फैसला नहीं करेंगे। हमने देख लिया युवी की आज युवराज नाम के उस सुपर फील्डर के पैर के नीचे से बॉल चली गई और वो फील्डर झुक कर बॉल रोक तक नहीं पाया। खूब मस्ती की गई है और आगे करोगे भी ये हम जानते हैं।

पर इतना याद रखो युवराज-धोनी, जब हॉकी टूटी थी और भारत की टीम ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई थी तब कुछ चुनिंदा लोगों ने हॉकी में लग चुके जंग और गिल के तानाशाह रवैये को खत्म करने का बीड़ा उठाया था कहीं तुम्हार साथ भी ऐसा ना हो। होटल के कमरों में बंद चारदीवारी का सच जब तक अंदर है तब तक ही सुरक्षित है जिस दिन बाहर आगया तो वो तूफान तुमको यूं निगल जाएगा कि दुनिया को पता भी नहीं चलेगा।

आपका अपना
नीतीश राज

Monday, November 24, 2008

लगा भारत के हाथ से मैच गया, पर सीरीज जीत गए हम

भारत ने 19 रन से बैंगलोर वन डे जीतकर सीरीज पर कब्जा कर लिया। लगातार 4 वन डे जीतकर भारत इस सीरीज में 4-0 से आगे हो गया। वैसे तो ये मैच भी डकवर्थ लुइस का शिकार हुआ लेकिन इस मैच में रोमांच अंत तक बरकरार रहा।

इंग्लैंड ने टॉस जीता, पहले गेंदबाजी का फैसला

बैंगलोर में छिटपुट बारिश तो एक-दो दिन से चल ही रही थी। इस बात का ध्यान में रखकर जब पीटरसन ने टॉस जीता तो पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। कहीं ना कहीं ये दिमाग में जरूर रहा होगा कि यदि डकवर्थ लुइस नियम का इस्तेमाल इस मैच में हुआ तो बाद में खेलने वाली टीम को फायदा शायद जरूर हो। इस बार सहवाग के साथ सचिन ओपनिंग के लिए मैदान में उतरे। आठ महीने के बाद सचिन की वापसी के बाद पहले ही मैच में ओपनिंग कराने का फैसला ठीक नहीं लग रहा था। वैसा ही हुआ, सचिन को मात्र 11 रन के निजी स्कोर पर ब्रोड ने क्लीन बोल्ड कर दिया। लेकिन शुरूआत से ही सहवाग अपना बल्ला चला रहे थे और जब सचिन आउट हुए तो भारत का स्कोर था 38 रन और उसमे सहवाग के रन थे 26। गंभीर ने आते के साथ ही हाथ दिखाने शुरू किए। अभी टीम इंडिया के 14 ओवर में एक विकेट के नुकसान पर 82 रन ही बने थे कि बारिश ने मैच में बाधा डाल दी।

बारिश ने डाली मैच में बाधा

बारिश के साए में लग रहा था कि मैच पूरा होगा ही नहीं पर थोड़ी देर में ही बारिश रुक गई और फिर 44 ओवर का मैच कर दिया गया। पर मैदान पर थोड़ी देर बाद ही मैच शुरू होगया लेकिन अभी तक किसी को ये पता नहीं चल पा रहा था कि इस अंतरराष्ट्रीय मैच में पावरप्ले कितने ओवर का हो गया है। कई बार ये सामने आया कि 9,4 और 4 ओवर के रूप में पावरप्ले खेला जाएगा। पर जब तक ये साफ हो पाता तब तक तो 17 ओवर में भारत ने 1 विकेट के नुकसान पर 106 रन बना लिए थे। भारत के समय अनुसार रात 8.30 बजे अंपायरों ने पिच और मैदान का मुआयना किया और फिर ये फैसला लिया कि मैच 22 ओवर का होगा और भारत को अब मात्र 5 ओवर और शेष खेलने होंगे। लेकिन टारगेट में बदलाव आएगा जब कि डकवर्थ लुइस नियम लागू होगा। यदि भारत 22 ओवर में 5 विकेट तक 144 रन बनाता है तो इंग्लैंड को 181 रन बनाने होंगे 22 ओवर में।

भारत ने दिया 166 का लक्ष्य, डकवर्थ ने किया उसे 198

बारिश के बाद के खेल की शुरूआत ही सहवाग के छक्के के साथ हुई। गंभीर और सहवाग बढ़-बढ़ कर मारने लगे। सहवाग 9 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 69 रन पर स्वान का शिकार बने। गंभीर का बखूबी साथ निभाने आए युवराज। दोनों ने मिलकर जल्दी स्कोर को बढ़ाना शुरू किया। गंभीर भी 40 के निजी स्कोर पर स्वान का शिकार बने। लेकिन अगली ही गेंद पर युवराज ने छक्का जड़कर गंभीर की कमी को पूरा किया। फिर धोनी ने पहली ही गेंद खेलते हुए छक्का जड़कर मैच मे मजा ला दिया। धोनी को पटेल ने 9 रन पर एक शानदार गेंद पर क्लीन बोल्ड कर दिया। मैच की आखरी गेंद बाकी थी और यूसुफ पठान इस एक गेंद के लिए आए थे। पठान ने छक्का जड़कर भारत का स्कोर 4 विकेट पर 166 पहुंचा दिया। पर डकवर्थ लुइस नियम लगकर इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 198 की चुनौती थी।

इंग्लैंड के लिए करो या मरो

भारत जहां सोच रहा था कि यदि 160-170 का लक्ष्य इंग्लैंड को दिया गया तो उस लक्ष्य पर लड़ा जा सकता है। पर इंग्लैंड की रणनीति अलग ही थी। जहीर खान के पहले ओवर में सिर्फ 1 रन निकला। मुनाफ पटेल के पहले ओवर की दूसरी गेंद पर खतरनाक बोपारा का लाजवाब कैच ईशांत ने पकड़ा। फिर इंग्लैंड के बल्लेबाज जमकर और संभलकर खेलने लगे। एक समय तो लगने लगा कि बेल और शाह की जोड़ी जम गई है। दोनों खिलाड़ी अच्छा खेल रहे थे।

गंभीर से छूटा कैच

भारतीय खिलाड़ी पूरी कोशिश करने में लगे थे कि कैसे भी इन को आउट कर दें पर दोनों कोई भी मौका नहीं दे रहे थे। पर भज्जी की गेंद पर 8वें ओवर की तीसरी गेंद पर शाह का कैच उछला और गंभीर कैच को लपकने के लिए आगे बढ़े पर बॉल हाथ से निकलकर जमीन पर जा गिरी। भज्जी ने तुरंत कप्तान की तरफ मुड़ कर देखा जैसे कि शिकायत कर रहे हों कि देख लो मेरी तरफ से तो पूरी कोशिश थी पर गंभीर ने कैच छोड़ दिया। उस समय शाह 29 रन पर खेल रहे थे और इग्लैंड के रन थे 38। पर अगली ही गेंद पर बेल को भज्जी ने क्लीन बोल्ड कर दिया। फिर ईशांत ने अगले ओवर में पीटरसन को बोल्ड कर दिया अब लगा कि भारत की वापसी होने लगी है। पर अब फ्लिंटॉफ और शाह की जोड़ी को तोड़ने में भारत कामयाब नहीं हुआ। 17 वें ओवर तक दोनों बल्लेबाजों ने जहां पर चाहे वहां पर रन बटोरे। शाह का वो छूटा कैच भारत को महंगा पड़ने लग रहा था।

लगा भारत के हाथ से मैच गया, पर....

शाह और फ्लिंटॉफ ने जमकर सभी गेंदबाजों की धुनाई की। 17वें ओवर में इंग्लैंड ने आखिरी पावरप्ले लेने का फैसला किया। भारत की तरफ से जहीर खान को गेंद सौंपी गई। पावरप्ले के इस ओवर में कुल 4 रन निकले और एक कामयाबी भी मिली। खतरा बन चुके शाह को जहीर ने सचिन के हाथों कैच करवाकर भारत की मैच में वापसी करवा दी। अगले ही ओवर में फ्लिंटॉफ को ईशांत ने आउट कर दिया। भारत पावरप्ले को बहुत ही अच्छे ढंग से खेलने में कामयाब हुआ। जो खतरा बन रहे थे वो दोनों खिलाड़ी इस पावरप्ले में आउट होगए। अब लगा कि भारत मैच जीत जाएगा। इंग्लैंड के 18 ओवर के खत्म होने के बाद 145 पर पांच विकेट गिर चुके थे और उनको 24 गेंदों पर 54 रन बनाने थे। जहीर ने पटेल को 11 पर आउट किया और फिर मुनाफ ने अपने फालोथ्रू पर स्वान को रनआउट किया। अगली ही गेंद पर कोलिंगवुड को तेंदुलकर के हाथों लपकवाकर मुनाफ ने इंग्लैंड को आठवां झटका दिया। अब इंग्लैंड को 1 गेंद पर 20 रन जीत के लिए चाहिए थे। मुनाफ ने अंतिम गेंद पर रन ना देकर भारत को 19 रन से जीत दिला दी। सहवाग की शानदार पारी के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच और बाइक दी गई। इस बार सहवाग ने मैदान में बाइक को घुमाया ना कि धोनी ने। पर इस मैच में युवी ने इंग्लैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोड़ दिया। युवी ने 26 मैच में 23 छक्के जमाए।

आपका अपना
नीतीश राज

Friday, November 21, 2008

डकवर्थ लुईस नियम ने कम किया जीत का मजा

क्रिकेट में क्या कभी बाद में बैटिंग करने वाली टीम विकेट की जगह रनों से जीतती है। जी हां, जब भी कभी डकवर्थ लुइस नियम लागू होता है तब ऐसा ही होता है। डकवर्थ लुइस नियम है क्या? शायद ही कुछ को पता हो। डकवर्थ और लुइस थे जिन्होंने इस नियम को बनाया था। डकवर्थ लुइस वो नियम है जब कभी मैच किसी कारणवश पूरा नहीं हो पाता या कि कोई बाधा आजाती है तो इसका इस्तेमाल किया जाता है। जो भी टीम पहले खेलती है उससे मिले लक्ष्य को एक फार्मूल में डाल दिया जाता है जो कि कंप्यूटर पर पहले से सेव होता है(जैसे कि जन्मपत्री के लिए करते हैं हम, कंप्यूटर पर पहले से ही सोफ्टवेयर डला होता है बस आंकड़े भरने होते हैं)। इस नियम के अंतर्गत 15 ओवर का खेल होना जरूरी है। फिर 16 ओवर से लेकर पूरे ओवर तक के बार(BAR) सामने आ जाते हैं। उनमें हर ओवर के हिसाब से विकेट और रन का लक्ष्य दिया होता है साथ ही यदि इतने ओवर तक बाद में खेलने वाली टीम के ५ विकेट गिरते हैं तो उनके रन निर्धारित रनों से ज्यादा होने चाहिए। और ये कागज स्कोरर, दोनों टीमों के कप्तान और या यूं कहें कि हर खिलाड़ी को इस आंकड़ों के बारे में जानकारी होती है। और सभी खिलाड़ी इसी को ध्यान में रखकर खेलते हैं।
ना ही कोई खिलाड़ी और ना ही देखने वाले इस तरह के फैसले से खुश होते हैं। फिर क्या है कि आईसीसी अपने इन नियमों में फेरबदल क्यों नहीं करती। कोई भी टीम शायद ये नहीं चाहती होगी कि कभी भी इस तरह से फैसला हो।
यदि भारत और इंग्लैंड के बीच हुए तीसरे वन डे की बात करें तो,
पहली बात- मैच 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ। तो उसका खामियाजा खेल पर क्यों?
दूसरी बात- जब मैच 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ तो सिर्फ 2 ओवर कम क्यों किए गए।
तीसरी बात- जब मैच 45 मिनट देरी से शुरू हुआ तो लंच के समय में कमी क्यों नहीं की गई। जब कि नियम ये है कि 60 मिनट का खेल यदि बाधित होता है तो फिर दोनों कप्तानों की सलाह पर ये 10 मिनट का लंच टाइम कम किया जाता है। पर 15 मिनट यदि खेल कम बाधित होता है तो उसके लिए नियम कुछ नहीं कहते।
चौथी बात- धोनी-पीटरसन ने ये कहा कि उन्हें पता था कि अंत में मैच का निर्णय डकवर्थ से ही पूरा होगा। तो क्या आईसीसी और अंपायर पैनल को समय को आधार बनाकर नहीं चलना चाहिए था जिसके कारण मैच पूरा हो सके।
भारत को इस मैच में जीत तो मिल गई लेकिन क्या इस जीत से हम अपने आपको उस तरह से जोड़ पा रहे हैं जिस तरह हम पिछले दो मैचों की जीत से अपने को जोड़ पाए थे। शायद नहीं। मैच पर लाखों लोगों की निगाह टिकी हुई थी लेकिन शायद ही कोई चाहता होगा कि मैच का अंत कुछ इस तरह से हो। सब चाहते थे कि भारत जीते पर पूरे तरीके से, अंत तक खेलते हुए।
अंत तक मैच फंसा हुआ था। भारत को जीत के लिए 9 ओवर में 43 रन चाहिए थे। भारत की रन रेट वैसे इंग्लैंड से ऊपर चल रही थी। लेकिन भारत ने अपने 5 क्रीम प्लेयर खो दिए थे। यदि धोनी और यूसुफ में से कोई भी आउट हो जाता तो 241 का स्कोर ही पहाड़ लगने लगता। या दो विकेट जल्दी निकल जाते और तब मैच बाधित होता तो भी मैच भारत के हाथ से निकल जाता। पर ये सब तब है जब ऐसा होता तो पर अभी सच ये है कि भारत 3-0 से सीरीज में आगे है।

3-0 से आगे भारत

इंग्लैंड ने टॉस जीता और इस बार पहले खुद बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इस बार नीचे जमकर खेल रहे बोपारा से ओपनिंग कराई गई। इंग्लैंड का ये तुरुप का पत्ता इस बार काम भी कर गया और पहले विकेट की साझेदारी 79 रन की हुई जब कि बेल को मुनाफ ने धोनी के हाथों विकेट के पीछे कैच करवाया जब कि बेल 46 रन के निजी स्कोर पर खेल रहे थे। कप्तान ने अपने को इस बार तीसरे नंबर पर उतारा और लगा कि इंग्लैंड की इस मैच को लेकर नई रणनीति शायद कारगार हो जाए पर फिर भज्जी ने पीटरसन को 13 के स्कोर पर पवैलियन की राह दिखा दी। धोनी ने कमाल की स्टंपिंग का परिचय देते हुए कोलिंगवुड को आउट किया। पर शायद बोपारा ये बात भूल गए कि इस दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेट कीपरों में से एक धोनी के सामने क्रीज से पैर बाहर निकालने का मतलब सिर्फ और सिर्फ पवैलियन की राह होती है। 8 चौके की मदद से बोपारा ने 60 रन बनाए। धोनी ने इन दो स्टेंपिंग से दुनिया के उभरते हुए कीपरों को ये बताया कि आखिरकर कीपरिंग की कैसे जाती है। फ्लिंटॉफ और शाह के आने से लगा कि शायद इंग्लैंड बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब हो जाएगा पर भारत के स्पिनरों ने इन बल्लेबाजों की एक नहीं चलने दी। 48.4 गेंद पर भारत के सामने 241 रन का लक्ष्य रखकर इंग्लैंड की पूरी टीम पवैलियन लौट चुकी थी। हरभजन सिंह ने 3 विकेट लिए मुनाफ-ईशांत को 2-2 विकेट मिले।
भारत के दिमाग में डकवर्थ का ख्याल शुरूआत से ही था। पर भारत के दो विकेट 34 रन पर गिर गए। गंभीर(14) और रैना(1) कानपुर में बिना कमाल दिखाए ही सस्ते में लौट गए। पर दूसरी तरफ सहवाग टीम के स्कोर को बढ़ाते रहे। फिर रोहित शर्मा के साथ मिलकर भारत के स्कोर को 100 के ऊपर तक पहुंचाया और फिर रोहित को स्वान ने आउट किया। फिर वीरु का साथ निभाने आए पिछले दो मैचों के हीरो युवराज सिंह और अपने हाथ दिखाए। बाद में खेलने उतरी भारत को पिच से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। तभी सहवाग 68 के निजी स्कोर पर फ्लिंटॉफ का शिकार बन गए। सहवाग ने 76 गेंदों पर 8 चौक और 1 छक्के की मदद से 68 की पारी खेली। धोनी और यूसुफ पठान ने अच्छा खेल दिखाते हुए भारत का स्कोर 40 ओवर में 198 रन बना लिए थे जब मैच खराब रोशनी के कारण रोक देना पड़ा और भारत 16 रन से जीत गया।
पर सच ये है कि भारत ने ये मैच जीत लिया पर इस फैसले के कारण जीत का वो मजा आना था वो नहीं आया जिसके हम हकदार थे।

आपका अपना
नीतीश राज

Wednesday, November 19, 2008

भारत अर्श पर, ऑस्ट्रेलिया फर्श पर, अब इंग्लैंड होगा फर्श पर

भारत की रैंकिंग ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद से बढ़ गई और भारत दूसरे पायदान पर आकर टेस्ट रैंकिंग में खड़ा हो गया। जहां भारत ने 40 मैच खेलते हुए 4659 अंक हासिल किए और रैंकिंग अंक 116 मिले हैं वहीं दूसरी तरफ द.अफ्रीका के भी रैंकिंग अंक 116 ही हैं पर उसके 34 मैचों के साथ 3953 अंक हैं। भारत दूसरे पायदान पर खड़ा हो पाया क्योंकि उसने पहले नंबर पर खड़े घमंडी कंगारुओं को 2-0 से सीरीज में मात दी। वैसे ऑस्ट्रेलिया के 121 अंक हैं और अभी तो खास तौर पर वो पहले पायदान पर आराम से खड़ा हुआ है पर भारत दूसरे पायदान पर कैसे आया ये वाकई एक सफर है खासतौर पर पिछली सीरीज में तो।
ये चमत्कार हुआ है टीम वर्क से, इस बार हम श्रीलंका में हुई सीरीज की तरह दब कर नहीं खेले। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फर्क इतना था कि टीम इंडिया के शेर दहाड़ते हुए दिखे और कंगारू पूरी तरह लाचार।
जहां भारत के गेंदबाज और सलामी बल्लेबाज के साथ-साथ स्पिन का जादू भी चला तो वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम फिसड्डी दिखी। जहां ईशांत शर्मा चार मैचों में 27.06 की औसत और 55.2 की स्ट्राइक रेट के साथ 15 विकेट चटकाकर सबसे कामयाब गेंदबाज रहे, वहीं दूसरी ओर ब्रेट ली 4 मैच में आठ विकेट ही झटक सके। वो भी 61.62 के औसत और 111 के स्ट्राइक रेट से। ली की धार इस बार फीकी रही जबकि जॉनसन ऑस्ट्रेलियाई खेमें से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बने रहे जिन्होंने 4 मैच में 13 विकेट लिए। अमित मिश्रा और हरभजन सिंह के जादू ने भी सीरीज़ का पलड़ा भारत की तरफ झुकाने में अहम किरदार निभाया। हरभजन ने 3 मैच में 15 विकेट लेकर ईशांत के साथ रहकर नंबर वन की कुर्सी पर छाए रहे। तो दूसरी तरफ अमित ने 3 मैच में 14 विकेट झटककर कुंबले की कमी को पूरा किया।
यदि हम अब नजर डालें भारतीय बल्लेबाजी पर तो, गौतम गंभीर तीन मैचों में 77.16 के औसत से 463 रन बनाकर अव्वल रहे और दूसरे नंबर पर रहे सचिन 4 मैच में 396 रन बनाए वहीं हसी ने 4 मैच में 394 रन बनाए और मैथ्यू हेडन की हालत पूरी सीरीज में खराब रही।
भारत के गेम प्लान के सामने कंगारुओं का गेमप्लान ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। पूरी सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में पंटर और ली के बीच की खींचातानी से पन्ने भरे रहे। पंटर की कप्तानी पर दिग्गजों ने सवाल खड़े किए। ये एक ऐसा मौका था जब कि पंटर की सेना पर तीर छोड़े जा रहे थे और वो कुछ कर भी नहीं पा रही थी। ये वर्ल्ड क्रिकेट में भारत की नई उड़ान है ये नंबर वन की कुर्सी की ओर बढ़ा एक मजबूत कदम है ये बदला है, बदला उस टीम से जिसने पिछली बार बेइमानी से भारत को सीरीज़ में हाराया था।
अब इंग्लैंड की बारी है। इंग्लैंड के कप्तान पीटरसन और फ्लिंटॉफ ने सीरीज शुरू होने से पहले कहा था कि पूरी सीरीज में वो भारत के ऊपर हावी रहेंगे। साथ ही सीरीज शुरु होने से पहले अभ्यास मैच में इंग्लैंड ने दो मैच खेले थे और एक जीता था और एक हारा था। दूसरे मैच में इंग्लैंड की पूरी टीम 100 के आंकड़े को भी छू नहीं पाई थी और 98 पर ऑल आउट होगई थी और मैच 124 रन से गवां दिया था। तब पीटरसन ने कहा था कि हम तो यूं ही खेल रहे थे। शायद अब दो मैच के बाद भी लगता तो ये ही है कि वो यूं ही खेल रहे हैं। जहां इंग्लैंड में अखबारों के पन्ने पूरी तरह से भारतीय टीम की तारीफ से अटे पड़े हैं वहीं दूसरी तरफ पीटरसन और उनकी टीम पर बार-बार निशाना साधा जा रहा है।
अब देखना तो ये होगा कि युवराज-गंभीर की आंधी को पीटरसन की सेना कैसे रोक पाएगी। राजकोट, इंदौर और अब कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में ये देखना होगा कि क्या भारत फिर से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा पाएगा जबकि अब तो ईशांत भी पूरी तरह फिट हो चुके हैं।

आपका अपना
नीतीश राज

Tuesday, November 18, 2008

युवराज ने फिर धोया अंग्रेजों को

पहला ४, दूसरा १५, तीसरा २९ पर भारत के विकेट गिर चुके थे। इस बार धोनी ने जीता था टॉस और पिछली बार की तरह पहले बल्लेबाजी फैसला गलत साबित होने वाला लग रहा था। पर जैसे कि गांगुली ने कहा था कि कप्तान के लिए जिस एक्सट्र लक की जरूरत होती है वो धोनी के पास है और हुआ भी कुछ ऐसा ही। पिछले मैच में युवराज ने महज ७८ गेंद पर नाबाद १३८ रन की पारी खेली थी। ठीक इस बार भी १२२ गेंद पर ११८ रन की शानदार पारी खेली जिसमें १५ चौके और २ लंबे छक्के थे।

ये यंग युवराज का जलवा है

इसे कहते हैं शानदार पारी। युवराज ने वापसी के बाद तो अपना जलवा दोनों मैचों में दिखाया है वो लाजवाब है। दूसरे वन डे में जब रनों के युवराज मैदान में आए तो सिर्फ आठवें ओवर में २९ रन पर ३ विकेट गिर चुके थे। फिटनेस से जूझ रहे २६ साल के युवराज के लिए ये परीक्षा की घड़ी के सामान थी। राजकोट में पीठ के दर्द के कारण एक दिन पहले तक लग रहा था कि युवी फिटनेस टेस्ट पास कर भी पाएंगे या नहीं। युवराज का साथ दिया दूसरी तरफ वन डे के राहुल द्रविड़ की जगह ले चुके मिस्टर भरोसेमंद गौतम गंभीर ने। गंभीर ने ५६ गेंदों पर अपनी हाफ सेंचुरी पुरी की और इसके साथ धोनी और गंभीर ने इस साल २००८ में १००० रन पूरे कर लिए। इस साल सिर्फ दो खिलाड़ी ही हैं जिन्हें ये खिताब मिला है। युवराज और गंभीर ने १३४ रन की साझेदारी की और भारत को सम्मानजनक स्कोर की तरफ बढ़ा दिया।

यूसुफ का साथ

अब बारी थी कप्तान की लेकिन कप्तान धोनी कमाल नहीं दिखा सके और महज १५ रन पर कोलिंगवुड ने उनके स्टंप बिखेर दिए। फिर आया वो शख्स जो टीम इंडिया को बड़े स्कोर की तरफ ले गया। यूसुफ पठान ने युवराज का साथ देते हुए टीम को एक ऐसी जगह पर ले गए जहां पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। युवराज ने कहा था कि वो तो सोच रहे थे कि २२५ रन का लक्ष्य काफी होगा इस पिच पर। और भारत ने बनाए २९२ रन जिसमें यूसुफ पठान के महज २९ गेंदों पर ५० रन शामिल हैं जिसमें ४ छक्के और २ चौके हैं। सहवाग, रैना, रोहित और युवराज स्टूअर्ट ब्रोर्ड के शिकार बने।

जोर का झटका धीरे से

इंग्लैंड पहले ही आधा मैच हार चुकी थी, ऐसी सोच रखने वालों को जोर का झटका जरा धीरे से लगा। पहले ओवर की आखिरी गेंद पर रैना ने जबरदस्त फुर्ती दिखाते हुए रोहित की तरफ खेली गई बैल की ड्राइव को बीच में लपककर स्टंप पर सटीक थ्रो से बैल को रन आउट कर दिया। प्रायर और शाह के बीच ९६ रन की साझेदारी हुई। इस बीच प्रायर को दो जीवनदान भी मिले और इंग्लैंड का स्कोर १०० का आंकड़ा पार कर गया। जहीर खान, आरपी सिंह, मुनाफ पटेल तीनों तेज गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए।

पहले बल्ले से रक्षक, फिर गेंद से भक्षक

युवराज ने अपना सबसे पहला शिकार शाह को बनाया, शाह की शानदार पारी १ छक्का और ८ चौकों की मदद से ५८ के निजी स्कोर पर समाप्त हुई। फिर प्रायर को अगले ओवर में कोई और जीवनदान युवराज ने नहीं दिया और क्लीन बोल्ड कर दिया। ये युवराज का दूसरा ओवर था लेकिन फिर फ्लिंटॉफ और कप्तान पीटरसन की जोड़ी ने मिलकर तेजी से रन चुराने शुरू किए। दोनों ने मिलकर १२ ओवर में ७४ रन की साझेदारी की। इस बीच ९ रन प्रति ओवर की औसत से रन चाहिए थे इंग्लैंड की टीम को, इसको कम करने के लिए ३२वें ओवर में पीटरसन ने तीसरा पावर प्ले लिया। इसका पूरा फायदा उठाते हुए फ्लिंटॉफ ने भज्जी के एक ही ओवर में ३ छक्के जड़ दिए। अंतिम पावरप्ले में इंग्लैंड ने ५९ रन बटोरे। अब १३ ओवर में चाहिए थे ११० रन। पर अपने आठवें ओवर में युवराज ने खतरा बनते पहले फ्लिंटॉफ को आउट किया और फिर पीटरसन को भी चलता कर दिया। प्रायर, शाह, फ्लिंटॉफ, पीटरसन सभी युवराज की तेज गति की गेंदों को समझ नहीं पाए। प्रायर और पीटरसन को क्लीनबोल्ड फिर शाह और फ्लिंटॉफ एलबीडब्ल्यू आउट किया।

बल्ले से ना सही गेंद से ही सही

बाकी बची कसर वीरेंद्र सहवाग ने पूरी कर दी। अभी सोचा जा रहा था कि कोलिंगवुड, बोपारा और पटेल कुछ कमाल कर सकते हैं पर तीनों खिलाड़ी कुछ कमाल नहीं कर पाए। वहीं सहवाग ने खतरनाक बनते पटेल को पहले आउट किया फिर ब्रोड और हारमीशन को भी चलता किया। सहवाग ने ५ ओवर में २८ रन देकर ३ विकेट झटके।
सीरीज में भारत २-० से आगे हैं और लगातार दो मैच जीतकर मेजबानों के हौसले जहां बुलंद हैं तो वहीं मेहमान ये सोचने पर मजबूर हैं कि क्या वो युवराज की आंधी को कभी रोक पाएंगे। फ्लिंटॉफ भी पंगा नहीं लेना चाहते क्योंकि पिछली बार पंगा लिया था तो ६ छक्कों की सौगात युवी ने भेंट के रूप में दी थी, अभी भूले तो नहीं होंगे फ्लिंटॉफ।

आपका अपना
नीतीश राज

Saturday, November 15, 2008

ऑस्ट्रेलिया के बाद अंग्रेजो के छूटे छक्के

ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज में धूल चटाने के बाद भारत ने अंग्रेजों के छक्के छुडा़ दिए। राजकोट में धोनी के रनवीरों ने ऐसा खेल खेला जिसे देख अंग्रेजों की हालत पतली हो गई। टॉस जीतने का बाद भारत को पहले बल्लेबाजी कराने का पीटरसन का फैसला उनके लिए हार का कारण बन गया। बाकी का काम भारतीय बल्लेबाजों ने कर दिया।

भारत की शानदार बल्लेबाजी

भारत की सलामी जोड़ी वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ने अपने बल्ले का जादू दिखाना शुरु कर दिया। माना जा रहा था कि जो भी पहले बल्लेबाजी करेगा उसे शुरुआत के एक घंटे तक परेशानी तो होगी ही। पर वीरु की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने ये टीम इंडिया के ड्रेर्सिंग रुम में ये विश्वास तो पैदा कर ही दिया कि भारत एक बड़े स्कोर की तरफ जरुर बढ़ चला है। वीरू ने 10 चौके और 3 छक्कों की मदद से 73 गेंदों पर 85 रन की पारी खेली और उनका बखूबी साथ दिया गंभीर ने। गंभीर ने 63 गेंदों पर 51 रन बनाए जिसमें 8 चौके शामिल थे। 20 ओवर में 127 के स्कोर पर गंभीर को पटेल ने आउट किया। फिर रैना ने आकर ताबड़तोड़ 3 छक्कों की मदद से 44 गेंद पर 43 रन बनाए।

राजकोट का युवराज

भारतीय पारी की सबसे खास बात रही युवराज की विस्फोटक नाबाद पारी। युवराज ने 78 गंदों पर 16 चौकों और 6 शानदार छक्कों की मदद से 138 रन बनाए। युवराज ने इंग्लैंड के खिलाफ सबसे तेज शतक जमाने का कीर्तिमान भी जमाया और किसी भी भारतीय का दूसरा सबसे जल्दी शतक। अपने ही देश में टीम इंडिया ने बनाया अब तक का सबसे बड़ा स्कोर। साथ ही पूरी दुनिया में भारत का दूसरा सबसे विशाल स्कोर। इंग्लैंड की ये तीसरी सबसे बड़ी और शर्मनाक हार है। युवराज ने इंग्लैंड के सभी गेदंबाजों को खूब धुना। युवराज ने फ्लिंटॉफ की 13 गेंदों पर 34 रन ठोंके, हारमिसन की 26 गेंदों पर 48 रन बनाए और साथ ही स्टूअर्ट ब्रोड की 15 गेंदों पर 26 रन बटोरे। कप्तान धोनी ने 32 गेंदों पर 39 रन बनाए जिसमें 1 छक्का और 3 चौके थे। युवराज ने 100 रन सिर्फ चौकों और छक्कों से ही बना दिए पूरी पारी में सिर्फ 38 रन दौड़ कर लिए। पांच महीने के बाद युवराज ने राजकोट के रण में अपना तूफान बरपा कर ये तो बता दिया कि उनको टीम से बाहर रखना सही फैसला नहीं है। अब भारत ने अब तक का अपना दूसरा सबसे बड़ा स्कोर इंग्लैंड के सामने खड़ा कर दिया। इंग्लैंड को 388 रन की चुनौती देकर भारत 75 फीसदी मैच जीत चुका था।

गेंदबाजों ने किया कमाल

अब देखना ये था कि गेंदबाज कितनी जल्दी इस मैच को खत्म करते हैं। इंग्लैंड के स्कोर बोर्ड पर जब 12 रन ही बने थे तब मुनाफ ने प्रायर को सहवाग के हाथों लपकवाकर चलता कर दिया। फिर 150 वां वन डे खेल रहे जहीर ने कमाल दिखाते हुए एक के बाद एक तीन विकेट झटक लिए। 11 वें ओवर में बैल और फिर डेंजर मैन फ्लिंटॉफ को आउट कर भारत की जीत पर मुहर लगा दी। अब सारा का सारा दारोमदार कप्तान पीटरसन पर आगया। पीटरसन ने कुछ शानदार शॉट लगाए और 7 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 63 रन बनाए पर रोहित शर्मा की शानदार फील्डिंग की बदौलत पीटरसन रन आउट हो गए। अब तो सिर्फ औपचारिकता मात्र शेष रह गई थी। पर बोपारा ने 5 दमदार छक्कों की बदौलत 54 रन सिर्फ 38 गेंद पर बना दिए। पर ये पारी सिर्फ इंग्लैंड को सबसे बड़ी और शर्मनाक हार होने से भर बचा पाई। और 38 ओवर में 229 पर इंग्लैंड की पारी सिमट गई। भारत 158 रन के राजकोट का रण जीत गया। युवराज को शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। भारत 7 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है।

अब नहीं कोई मलाल

युवराज को मैन ऑफ द मैच चुना गया और फिर मिली उनको बाइक। धोनी ने बाइक देखी और युवराज को पीछे बिठा कर चल दिए ग्राउंड का चक्कर लगाने। धोनी का टीम के साथ और साथ ही हर खिलाड़ी के साथ रमना बहुत ही अच्छा लगता है। शायद ये भी एक स्टाइल है हमारे युवा कप्तान की। बस देखना ये होगा कि युवराज अगले मैच के लिए पूरी तरह से फिट हो जाएं। आज की जीत के बाद तो ये ही लगता है कि टीम इंडिया को अपने पांच सीनियर खिलाड़ी की जगह लेने वाले सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मिल गए हैं।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”