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Wednesday, May 19, 2010

ये फैसला तो जरूरी था।


पिछले वर्ल्ड टी 20 में मैंने एक पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता से पूछा था कि कौन सी टीम सब से प्रबल दावेदार है कप की। उनके जवाब से मैं संतुष्ट नहीं हुआ। मैंने कहा कि पाकिस्तान को आप कम मत आंकिए ये कभी भी उल्टफेर करने का माद्दा रखती है। उनका जवाब क्या था वो आप को बाद में बताता हूं पहले बात इस बारे में।

ये तो जरूरी था।

7 दिन के अंदर नोटिस का जवाब देना होगा भारतीय टीम के 6 खिलाड़ियों को जिन्होंने वर्ल्ड टी-20 में भारत की शर्मनाक विदाई के बाद पब में पंगा किया था। युवराज सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, रोहित शर्मा, पीयूष चावला और रवींद्र जडेजा को बोर्ड ने नोटिस जारी किया। वैसे तो हारने के बाद भारतीय जमीन पर कदम रखते ही आशीष नेहरा का पीछा पब ने नहीं छोड़ा था। पर पब के किसी भी तरह के पंगे से उन्होंने गुस्से की हंसी के साथ साफ-साफ इनकार किया था। साथ ही टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी युवराज सिंह ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर में कहा था कि उनका कोई पंगा नहीं हुआ।
वेस्टइंडीज टूर पर भारतीय टीम मैनेजर रंजीव बिस्वाल ने खिलाड़ियों के इनकार के बाद जो रिपोर्ट सौंपी उसमें ये साफ था कि पब में पंगा हुआ था पर हाथापाई नहीं हुई थी

कितनी शर्म की बात है कि सीनियर खिलाड़ियों ने ऐसा बर्ताव किया। हार गए और ऐसा बर्ताव। सीनियर खिलाड़ी बखूबी जानते हैं कि क्रिकेट को खुदा की तरह समझने वाले देश भारत के प्रशंसक कैसे हैं। इन्होंने गलती की और गलती के बाद झूठ बोला। एक बार नहीं बार-बार। वहीं दूसरी तरफ, हम यदि ये कहें कि हार का गम था और फैन्स को ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए था तो ये भी गलत है। ऐसा तो होना ही था पर हां उसको अंत कुछ इस तरह होगा ऐसा शायद ही किसी ने सोचा हो। ये अनुशासनात्मक कार्रवाई इन खिलाड़ियों के ऊपर होनी थी और ये जरूरी भी थी।

धोनी का बयान, एक तीर दो निशाने

वहीं धोनी ने कहा कि टीम के चयन में चयनकर्ता उनकी सुनते नहीं है। तो ये बात पहले भी कही जा सकती थी। जब तक टीम जीत रही थी तब तक आपको भी कोई दिक्कत नहीं हुई पर जैसे ही टीम हारी आप भी खिलाड़ियों के साथ छोड़कर दूर खड़े होगए। जबकि ये बात आप खुद जानते हैं कि इस बार के टी-20 में आपके कई फैसलों पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है। लेकिन धोनी कहीं ना कहीं टीम / बोर्ड की राजनीति को भी सामने लाना चाहते हैं।

बोर्ड भी कठघरे में

असल मायने में बोर्ड पर भी सवाल उठना चाहिए। ना वो कोच की सुनती ना ही वो कप्तान की सुनती, क्यों? याद है मुझे पिछले वर्ल्ड टी-20 में हार के बाद भी बोर्ड के एक सदस्य का ये ही कहना था जो कि इस बार भी दोहराया उन्होंने कि यदि खिलाड़ियों को थकान महसूस हो रही थी तो वो बताते तो हम उन्हें आराम देते। रटा-रटाया बयान फिर से जैसे पढ़ दिया गया हो। यानी की वो बोर्ड अधिकारी पुरानी गलतियों से सबक नहीं लेते हैं, इससे तो ये ही जाहिर होता है।
दूसरी बात, इस बात से मैं तो कतई इत्तेफाक नहीं रखता कि सहवाग की जगह मुरली विजय को भेजने का फैसला ठीक कहा जाएगा। आईपीएल की फॉर्म रॉबिन उथप्पा को भेजने की हिमायती दिखती है पर फिर ये फैसला क्यों लिया गया, शायद सेलेक्टर ही जानते हों। मुरली विजय जिस टीम से आईपीएल में खेलते हैं उस टीम के मेंबर बोर्ड में भी मेंबर हैं।

आईपीएल असर तो डालता ही है....

आईपीएल ने फायदा दिया या घाटा पहुंचाया इस पर बहुत समय से बहस हो रही है पर जहां पर जिस देश में आईपीएल ने जन्म लिया और उस देश का कप्तान ये कहे कि थैंक्स, अगली बार पहले वर्ल्ड कप है बाद में आईपीएल। इस बयान से आप एक कप्तान की व्यथा जान ही सकते हैं कि आईपीएल में कितना पेंच होता है। शायद ये ही कारण है कि इस बार आईपीएल के किसी भी खिलाड़ी ने वहां पर परचम नहीं लहराया।

जाते-जाते----अच्छा हुआ कि इंग्लैंड जीता कप

पिछले वर्ल्ड टी 20 में मैंने एक भूतपूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता से पूछा था कि कौन सी टीम सब से प्रबल दावेदार है इस बार वर्ल्ड टी 20 की। उनके जवाब से मैं संतुष्ट नहीं था। मैंने कहा कि पाकिस्तान को आप कम मत आंकिए ये कभी भी उल्टफेर करने का माद्दा रखती है। उनका जवाब था कि नए खिलाड़ी हैं क्या जीतेंगे। जवाब में मैंने कहा कि पिछली बार भी तो भारत जीत गया था सभी बच्चे थे। पाकिस्तान की ये टीम नहीं जीत सकती, उन्होंने जवाब दिया।
जब पाकिस्तान ने कप जीता, मेरा उनसे आमना-सामना कई बार हुआ अब वो कभी बातचीत में ऐसी कोई लाइन नहीं लेते कि ये तो नहीं हो सकता।
अच्छा हुआ फिर इस बार वो टीम जीती जिसे दावेदार की सूची में नहीं रखा जा रहा था। जितने लोग थे उतने चैंपियन थे, कोई कह रहा था वेस्टइंडीज, द. अफ्रीका, पाकिस्तान शायद भारत भी...। पर अच्छा हुआ कि इंग्लैड जीत गया। पहली बार इतिहास में इंग्लैंड ने कोई ऐसा खिताब जीता है। इंग्लैंड में शुरू हुआ क्रिकेट आज तक एक बार भी 50-50 का चैंपियन नहीं बन पाया है। ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सचमुच में हार हुई और ब्रिटेन में बदलाव आ ही गया।

आपका अपना
नीतीश राज

Thursday, June 18, 2009

धोनी के हाथ में कमान नहीं

आधी रात तक टीवी के आगे आंख गड़ाए रखना, मैच के जुनून के कारण घर में सभी से झगड़ा करके टीवी के सामने डटे रहना, एक भी गेंद नागा जाने नहीं देना। हर गेंद पर विश्लेषण करते रहना और लग रहा था कि टीम इंडिया यदि कैसे भी 125-130 तक दक्षिण अफ्रीका को रोक दे तो फिर जीत हाथ में होगी। हुआ भी वो ही भारत ने उनको रोक तो दिया और यदि डीविलियर्स के साथ भारतीय गेंदबाजों ने चूक ना की होती तो ये स्कोर और भी शायद कम होता। पर 131 का टारगेट ठीक था और लग रहा था कि टीम जीत जाएगी। टीम इंडिया की बैटिंग आई तो लगा कि दोनों ओपनर पिछली हार से सबक ले चुके है। 6 ओवर तक बिना विकेट खोए टीम इंडिया का स्कोर 47 रन हो चुका था। अब लगा कि 84 गेंद पर 83 रन जीत के लिए टीम इंडिया को चाहिए थे तो जीत के भरोसे के साथ अधिकतर लोग सो गए पर सुबह ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।

सुबह सबको पता चला कि भारत 12 रन से हार गया। मुझे याद है कि जब मैंने मैच देखना बंद किया था ठीक उसके एक रन के बाद ही गंभीर आउट हो गए। और भारत ने मात्र 22 रन के अंतर पर अपने 5 विकेट खो दिए। जिसमें गंभीर,रैना, रोहित, कप्तान धोनी, सुपर हीरो यूसुफ पठान सब पवेलियन लौट चुके थे। हाइलाइट्स देखने के बाद लगा कि ये कैसा गेम खेली है टीम इंडिया। रैना ने पिछले तीनों मैच में ऐसी ही गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर अपना विकेट खो दिया। कप्तान धोनी ने फर्राटा दौड़ लगाने के बाद अपना विकेट गंवा दिया। यदि युवराज पूरी तरह से फिट होते तो शायद वो रन हो जाता वर्ना वो रन किसी भी कीमत पर नहीं था। साथ ही साथ धोनी ने ये भी देखना उचित नहीं समझा कि उनके सहयोगी अपनी क्रीज से एक कदम भी नहीं आगे बढ़े हैं और धोनी सुपरफास्ट तरीके से आधी क्रीज पार कर गए और आउट होकर चलते बने। आईपीएल के हीरो यूसुफ पठान तो कैच प्रैक्टिस कराके चलते बने। और इस तरह भारत ने महज 22 रन के अंदर आधी टीम लौट गई। दिल पे लेने वाले अधिकतर आहत हुए। तो क्या कारण था कि टीम इंडिया टी-20 में इस बार क्यों हारी?

धोनी मान रहे हैं कि जब टीम का सलेक्शन हुआ तब ही काफी खिलाड़ी 100 फीसदी फिट नहीं थे
सुपर 8 में सुपर फ्लॉप, आईसीसी वर्ल्ड टी 20 में इस बार भारत ने 5 मुकाबले खेले और सिर्फ 2 में ही जीत हासिल की वो भी उन टीमों के साथ जो शायद इस टूर्नामेंट की सबसे कमजोर टीमें थी। 2007 में टीम इंडिया ने सुपर 8 में तीन मैच खेले थे और दो में जीत दर्ज की थी पर इस बार 2009 में टीम इंडिया ने फिर 3 मैच खेले और तीनों में हार का मुंह देखना पड़ा।

अब बात सामने आती है क्यों ऐसा हुआ? क्यों टीम इंडिया सुपर 8 में अपने सारे मैच हार गई? क्यों टीम इंडिया को इस वर्ल्ड कप की सबसे फेवरेट टीम माना जा रहा था पर फिर भी वो हर क्षेत्र में फेल रही? क्यों टीम इंडिया के खिलाड़ी इस वर्ल्ड कप में पर्फोर्म नहीं कर पाई? क्या हुआ जो कि एकजुट टीम बिखरी हुई नजह आई? पहली बार ऐसा क्या हुआ कि कप्तान और कोच आमने-सामने आकर खड़े हो गए? क्यों इस बार चयनकर्ता और बोर्ड एक ही सुर में बोलते हुए कोच के पीछे पड़ गए उस कोच के पीछे जिसे वो अब तक का सबसे बेहतरीन कोच मान रहे थे?

तो क्या है इन सब के पीछे की बात। पहली बात तो ये कि टीम इंडिया को फेवरेट क्यों माना जा रहा था क्योंकि भारत पूर्व चैंपियन था। वर्ना भारत ने पिछले वर्ल्ड कप 2007 से 2009 वर्ल्ड कप तक सिर्फ 5 मैच 20-20 टीम की तरह खेले और उसमें 3 में हार मिली। पिछले वर्ल्ड कप का जादू टीम इंडिया नहीं दिखा सकी। पिछली बार ये सभी देशों के लिए एक नया फॉरमेट रहा पर भारत के पास मजबूत, चुस्त, फुर्तीले, जवान, जोशीले, खिलाड़ी थे जिन्होंने अपने जोश के कारण टीम को जीत दिला दी। और साथ ही पिछला वर्ल्ड कप धोनी ने एक चैलेंज की तरह लिया था पर इस बार ऐसा नहीं था। 'हमारे सारे खिलाड़ी टूर्नामेंट से पहले बुरी तरह थके हुए थे' कोच ने कहा। कप्तान ने इससे अलग कहा, नहीं हम थके नहीं थे पर बाद में पलट गए कि हम थके जरूर थे पर उतने नहीं जितना श्रीलंका सीरीज से पहले। अब धोनी मान रहे हैं कि जब टीम का सलेक्शन हुआ तब ही काफी खिलाड़ी 100 फीसदी फिट नहीं थे। अरे, धोनी साहब हार गए तो अब सब बोलने लगे।

वर्ल्ड कप 2007 से 2009 वर्ल्ड कप तक सिर्फ 5 मैच 20-20 टीम की तरह खेले और उसमें 3 में हार मिली।

यदि देखा जाए तो भारत के खिलाड़ी हर जगह दूसरी टीम के साथ चैक मेट किए गए। जिस खिलाड़ी को शॉट पिट गेंदें खेलने में दिक्कत होती थी तो दूसरी टीम ने इस पर खूब होमवर्क किया और उस खिलाड़ी को कोई दूसरी गेंद नहीं फेंकी गई। रोहित और रैना आईपीएल में मजबूत दिखे पर यहां पर बुत बन कर ही रह गए खासकर कि रैना जिनसे शॉट पिच गेंदें खेली ही नहीं गई। सुपर 8 में तीन में से दो बार रैना इस गेंद का ही शिकार बनें। वहीं धोनी ने बाद में खुद कबूला कि हां वो 100 फीसदी नहीं दे पाए। जहां तक गेंदबाजी की बात है तो दूसरी टीम के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित होने वाले ईशांत शर्मा को कुछ यूं मार्क किया गया कि ईशांत को बांग्लादेश के खिलाफ सिर्फ दो विकेट मिले और अब तक खेले 8 मैचों में सिर्फ 4 विकेट का उनका कैरियर रहा। वहीं ईशांत के कारण ही आरपी सिंह बाहर बैठे जो कि पिछली बार टीम विनर साबित हुए थे। सेलेक्टर को इस बात पर ध्यान रखते हुए ईशांत को और ट्रेनिंग देनी चाहिए। हर कीमत पर फील्डिंग भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती नजर आई। खुद धोनी ने इस बार रन आउट और स्टंपिंग छोड़ी। साथ ही युवराज के घुटने की चोट इतनी ज्यादा थी कि वो झुक नहीं पा रहे थे। इंग्लैंड से भारत सिर्फ ३ रन से हारा था उसका कारण यदि सीनियर खिलाड़ियों को माना जाए तो वो कम नहीं है। सरासर वो धोनी की गलती थी कि आरपी सिंह के 1 ओवर होते हुए भज्जी को ओवर दिया गया और भज्जी ने 10 रन उस ओवर में दे दिए। साथ ही अंतिम गेंद पर यदि युवराज थोड़ा झुक जाते और अपने पैर के नीचे से गेंद को नहीं निकलने देते तो शायद वो चौका नहीं होता पर अनफिट युवी वो चौका नहीं रोक सके और भारत 3 रन से हार गया।

कोच ने इल्जाम लगाया कि थकी हुई टीम उनको मिली वर्ल्ड कप से पहले मिली थी। वहीं सेलेक्टर कहते हैं कि आईपीएल से नुकसान नहीं हुआ और दूसरे देशों को तो फायदा हुआ फिर गैरी कैसे कह रहे हैं। सेलेक्टर ऐसा कैसे कह सकते हैं। दूसरे देश के खिलाड़ी अनुभव लेकर अपनी टीम के साथ जाकर मिल गए पर वहीं टीम इंडिया के खिलाड़ी साथ होकर भी साथ नहीं थे। हम आईपीएल में आपस में ही लड़ रहे थे, कोई ये तो बताए कि हम टीम की तरह न्यूजीलैंड के दौरे के बाद कब खेले? पिछले 12 महीने में भारत ने 11 महीने क्रिकेट खेली है। क्यों झूठ कहने पर तुले हुए हैं बोर्ड और चयनकर्ता।


जून 2008 में किटप्लाई कप
जून-जुलाई 2008 में एशिया कप
जुलाई-अगस्त 2008 में भारत का श्रीलंका दौरा
अक्टूबर-नवंबर 2008 में भारत के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया
नवंबर-दिसंबर 2008 में इंग्लैंड का भारत दौरा
जनवरी-फरवरी 2008 में भारत का श्रीलंका दौरा
फरवरी-अप्रैल 2009 में भारत का न्यूजीलैंड दौरा
18 अप्रैल से द.अफ्रीका में आईपीएल
5 जून से आईसीसी वर्ल्ड टी-20
अब 26 जून 2009 से वेस्टइंडीज दौरा

तीसरा सबसे बड़ा कारण है इस कप के शुरूआत में ही धोनी की सहवाग संग लड़ाई। इसने टीम को खेमों में बांट दिया। कप्तान को आकर मीडिया के सामने, दुनिया के सामने बयान देना पड़ा। वहीं, दूसरी तरफ धोनी ने अपना कूल टेंप्रामेंट खो दिया और मीडिया के साथ वाकयुद्ध में उलझ गए जो कि सरासर गलत था खासकर कि किसी भी टूर्नामेंट से पहले। इससे साफ पता चलता था कि धोनी टीम पर अपना वर्चस्व कायम रखना चाहते थे और वहीं टीम में गुट बनने लगे थे। युवराज, गंभीर, रैना सब अलग-थलग रहे पूरे टूर्नामेंट के दौरान। वहीं उपकप्तान के नाम पर गंभीर के नाम का सुझाव देना भी किसी संशय को जन्म देता है। युवराज का उपकप्तान बनते ही युवी का मीडिया से पीसी में कहना कि हम अभ्यास आपसे(मीडिया से) पूछ कर नहीं करेंगे और हम जानते हैं कि हमें कब प्रैक्टिस करनी है, कल के नतीजे बता देंगे कि हमें प्रैक्टिस करनी चाहिए थी या नहीं। अगले दिन इंग्लैंड से हार गई टीम। और टीम के कुछ खिलाड़ी हार के बाद हंसते हुए दिखाई दिए कैमरे पर। जब युवी पीसी में ये बात कर रहे थे तब दूसरी तरफ वहीं धोनी प्रैक्टिस कर रहे थे इससे साफ लगता है कि धोनी के हाथ में कमान नहीं रह गई है।

आपका अपना
नीतीश राज

Monday, June 15, 2009

धोनी तूने ये क्या किया, भारत को आईसीसी वर्ल्ड टी-२० से बाहर किया।

....और भारत हार गया। पूर्व चैंपियन भारत सेमीफाइनल की रेस से बाहर होगया। इंग्लैंड ने 3 रन से दी मात। काश! भारतीय कप्तान अब होने वाले दर्द को पहले समझे होते तो बेहतर होता, पर जबतक समझते तब तक बहुत देर हो गई।
धोनी ने कहा कि वो दबाव में युवराज को नहीं भेजना चाहते थे।

गलतियों का पिटारा बने कप्तान

हार का ठीकरा कई गलतियां कर बैठे धोनी, सारी रणनीति बेकार होगई, इस बार ऐसा लगा कि धोनी में वो जीत की भूख कहीं खत्म हो गई है, वो आग जिसके कारण पिछला टी 20 वर्ल्ड कप जीता था। कहां गई धोनी की टीम को साथ लेकर चलने की काब्लियत। कहां काफुर हो गया वो कूल एटिट्यूड जिसके कारण माही जाने जाते थे। कई गलतियां की इस बार के टी 20 में कप्तान साहब ने।

ये धोनी तुझे हुआ क्या?

हंसता हुआ, लंबे बाल वाला वो लड़का जब भी कीपिंग करता तो दुश्मन देश के जनरल के मन को भी लुभा जाता। जब से कप्तानी संभाली धोनी के ऊपर सीनियर्स को दरकिनार करने का इल्जाम लगता रहा। इसी कारण से जब सहवाग की बात सामने आई तो कोई भी धोनी पर यकीन नहीं कर पा रहा था। जब ध्यान मैच और प्रैक्टिस पर होना चाहिए था तब वो टीम की एकता परेड कराने में जुटा हुए थे। क्योंकि धोनी को अपने नाम को बचाने की चिंता जयादा सताने लगी थी। धोनी ने शायद कहीं ना कहीं क्रिकेटरों का विश्वास खोया है जिसका एहसास धोनी को भी हो गया है।
रवींद्र जडेजा को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका क्यों दिया गया?

ड्रेसिंग रूम में राजनीति! और अपनों ने डुबोई लुटिया

टीम में बने रहने के लिए गुटबाजी करना तो धोनी की आदत बन गई और आरपी सिंह के मामले में तो वो सेलेक्टर से दो-चार भी हो लिए। वहीं जब सहवाग की छुट्टी हुई तो उपकप्तान कौन हो इस पर चर्चा शुरु हुई। सीनियर भज्जी, युवराज को छोड़कर धोनी ने गौतम गंभीर का नाम सामने रखा। वेस्टइंडीज से मैच खेलने से ठीक पहले इस तरह की राजनीति, क्यों?
टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला क्या इसलिए भी लिया गया क्योंकि धोनी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बयान दिया था कि भारतीय टीम दबाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है। पर पहले गेंदबाजी भारत ने की और हमेशा की तरह ईशांत शर्मा कोई कमाल नहीं कर सके। अभी तक ईशांत ने टी-20 में 8 मैच खेले हैं और 4विकेट लिए हैं। हमारे पेसर में सबसे घटिया प्रदर्शन गर किसी का है तो वो ईशांत ही हैं। तेज गेंद डालने की फिराक में स्विंग भी हाथ से निकल रही है और विकेट भी हाथ में नहीं आरहे।

सबसे सफल गेंदबाज आरपी से अंतिम ओवर नहीं कराया गया क्यों? क्यों??

वहीं रवींद्र जडेजा को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका क्यों दिया गया? जहां पर जाकर जडेजा ने ३५ गेंद की मदद से सिर्फ २५ रन बनाए जिसमें १ ही चौका शामिल था। २०-२० के मुकाबले में १० गेंद खाली जाने का मतलब समझ सकता है कोई। चौथे नंबर पर सचिन, वेंगसरकर, अजहरुद्दीन, युवराज जैसे खिलाड़ी खेलते रहे हैं। ये वो क्रम है जिस पर टीम का पूरा दारोमदार होता है। युवराज हमेशा से ही इस नंबर पर खेलते रहे हैं और इस करो या मरो के मुकाबले में हमारे सबसे महत्वपूर्ण क्रम के साथ ही ये फेरबदल क्या सोच कर किया गया?

वैसे भी धोनी कहते रहे हैं कि टीम इंडिया दबाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है, यदि ये बात सही थी तो फिर धोनी खुद क्यों दबाव में ठीक प्रदर्शन तक नहीं कर पाए। बाद में धोनी ने कहा कि वो दबाव में युवराज को नहीं भेजना चाहते थे। क्या नहीं लगता कि धोनी अपनी ही बातों से मुकरने लगे हैं। यदि धोनी चाहते तो जडेजा की जगह पर यूसुफ को भेज सकते थे।

खुद का प्रर्दशन हुआ धुंआ-धुंआ

ईशांत और आरपी बैटिंग में बिग जीरों हैं। ईशांत ने तो अब तक सिर्फ ३ रन बल्ले से बनाए हैं और ८ मैच में महज़ ४ विकेट लिए हैं।
आरपी सिंह को इरफान पठान की जगह खिलाया गया। आरपी ने प्रदर्शन भी सही किया महज ३ ओवर में १३ रन देकर १ सफलता भी ली। सबसे सफल गेंदबाज से अंतिम ओवर नहीं कराया गया क्यों? क्यों?? ईशांत और आरपी बैटिंग में बिग जीरों हैं। ईशांत ने तो अब तक सिर्फ ३ रन बल्ले से बनाए हैं। वहीं इरफान पठान बल्ले से तो ईशांत से काफी ठीक हैं। फिर क्यों ये फेरबदल किया गया।

ये कहानी रही दोस्तों की पर वहीं खुद के प्रदर्शन ने धोनी को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। आईसीसी वर्ल्ड २००९ में धोनी का प्रदर्शन-बांग्लादेश- 26 रन-21गेंद पर, आयरलैंड 14 रन-13 गेंद, वेस्टइंडीज 11 रन-23 गेंद, इंग्लैंड 30 रन-20 गेंद। करो या मरो मुकाबले में कप्तान क्रीज पर हो और टीम हार जाए। इसका क्या मतलब लगाया जाए? चौदहवें ओवर में मैदान पर पहुंच थे कप्तान तब जीत के लिए चाहिए थे ३९ गेंद पर 69 रन पर दो धुरंधर क्रीज पर थे और स्कोर नहीं पा सके, इतनी खराब बल्लेबाजी कि एक छक्का भी धोनी से नहीं लगा। एक कप्तान के लिए इससे शर्मनाक क्या हो सकता है कि उस के क्रीज पर रहते हुए मैच हार जाए। पर फिर भी ना तो बैटिंग ऑर्डर में फेरबदल की गलती मानी और ना ही टीम पर चढ़ी थकान।

चलते-चलते

इंग्लैंड की तरफ से बल्लेबाजी में बोपारा के ३७, पीटरसन के २७ गेंद पर ४६ रन, मैस्क्रेनेस ने नाबाद २५ रन बनाए। पर साथ ही भारत ने १६ रन एक्स्ट्रा दिए जिसमें १४ रन वाइड से गए। भज्जी ने ३, जडेजा ने २, आरपी और जहीर ने १-१ विकेट लिए। जिसमें आरपी से पूरा स्पैल भी नहीं कराया गया।
भारत की तरफ से नहीं चले रोहित और रैना। पता नहीं क्यों शॉट पिच बॉल से इतना क्यों घबराता है रैना, इंडीज के खिलाफ भी इसी तरफ आउट और इतने निर्णायक मैच में भी फिर से वही गलती। गंभीर टिके पर वो लय और आग नहीं दिखी जो दिखनी चाहिए थी। अंदर की राजनीति का शिकार गंभीर सिर्फ २६ रन पर अपना विकेट मैस्क्रेनेस के ओवर में ब्रोड के हाथों में देकर वापिस हो लिए। जडेजा ने अपना पूरा जोर लगा लिया पर गेंद ने उनके बल्ले को चूम कर बाउंडरी पार करने से मना कर दिया और धोनी के साथ मिलकर जडेजा ने टीम इंडिया को सेमीफाइनल की रेस से बाहर कर दिया। युवराज नहीं चाहते थे कि जडेजा के आउट होते ही उस खिलाड़ी के साथ साझेदारी करनी पड़े जिससे खट्टास मैदान और मैदान के बाहर दिखती है। पर हुआ ऐसा ही तो युवराज विकेट कीपर फोस्टर के ग्लब्ज से अपना स्टंप उखड़वाकर चलते बने। और फिर ना तो धोनी और ना ही यूसुफ पठान कुछ कर सके और भारत ने लगातार दूसरा मैच लॉर्ड्स में गंवा दिया।

मैच से एक दिन पहले युवी ने कहा था कि हम जानते हैं कि हमें कब अभ्यास करना है और कब नहीं ये आप मीडिया वालों से पूछकर हम फैसला नहीं करेंगे। हमने देख लिया युवी की आज युवराज नाम के उस सुपर फील्डर के पैर के नीचे से बॉल चली गई और वो फील्डर झुक कर बॉल रोक तक नहीं पाया। खूब मस्ती की गई है और आगे करोगे भी ये हम जानते हैं।

पर इतना याद रखो युवराज-धोनी, जब हॉकी टूटी थी और भारत की टीम ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई थी तब कुछ चुनिंदा लोगों ने हॉकी में लग चुके जंग और गिल के तानाशाह रवैये को खत्म करने का बीड़ा उठाया था कहीं तुम्हार साथ भी ऐसा ना हो। होटल के कमरों में बंद चारदीवारी का सच जब तक अंदर है तब तक ही सुरक्षित है जिस दिन बाहर आगया तो वो तूफान तुमको यूं निगल जाएगा कि दुनिया को पता भी नहीं चलेगा।

आपका अपना
नीतीश राज

Saturday, June 13, 2009

धोनी गलतियों का पिटारा मत बनो, एक ही हारे हो, राजनीति ना करो तो जीत सकते हो कप।

1983 में कपिल के रणबांकुरों ने इसी लॉर्ड्स के मैदान पर वेस्टइंडीज की धुरंधर टीम को मात देकर वर्ल्ड कप जीता था। उस दिन कपिल देव ने विवियन रिचर्डस का कैच लपका था आज उसी मैदान पर सिमोन्स ने उसी तरह गंभीर का कैच पकड़ा। सुपर 8 के अपने पहले ही मुकाबले में चैंपियन भारत हार गया। कप्तान धोनी की कप्तानी नहीं चली और ना ही काम आई युवराज की शानदार पारी। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। फैसला तब गलत साबित होने लगा जब भारत के तीन बल्लेबाज महज 29 रन पर पवैलियन लौट गए। गौतम गंभीर 14 रन, रोहित शर्मा और सुरेश रैना 5 रन।

कप्तान-उपकप्तान से आस, पर कप्तान ने किया निराश

फिर क्रीज पर थे कप्तान और उप कप्तान। दोनों से टीम को बहुत उम्मीदें थीं। पर कप्तान धोनी बल्ले से कुछ भी कमाल नहीं दिखा सके और महज 11 रन बनाकर पवैलियन लौट गए। इन 11 रन को बनाने के लिए धोनी ने गेंद खेली 23 और इस 11 रन में धोनी किसी भी गेंद को बाउंड्री के पार नहीं पहुंचा सके। वहीं दूसरी तरफ मैच से पहले उपकप्तान बने युवराज सिंह ने लाज बचा ली। युवी ने 43 गेंद का सामना करते हुए 67 रन की पारी खेली। इस पारी में 6 चौके और 2 छक्के शामिल थे। एडवर्डस ने अपनी ही गेंद पर कैच लपककर युवी की पारी को समाप्त किया।

नहीं दिखा यूसुफ पठान का जलवा

यूसुफ पठान का जलवा वैसा नहीं दिखा जैसा आईपीएल में दिखा था। जैसी उम्मीद यूसुफ से थी उसके पासंग भी नहीं फटके यूसुफ मियां। कई बार सिर्फ बल्ला घुमाते नजर आए। जब पठान से उम्मीद थी कि वो 2-4 छक्के मार कर टीम के स्कोर को मजबूती की तरफ ले जाएंगे वहीं पर वो विफल रहे। 23 गेंद पर 31 रन जिसमें 3 चौके और 1 छक्का। इरफान भी कोई कमाल बल्ले से नहीं कर पाए। पर अंत में भज्जी ने हाथ जमाते हुए महज़ 4 गेंदों पर 3 चौकों की मदद से नाबाद 13 रन बनाए।
टीम इंडिया ने युवराज के आउट होने के बाद अंतिम 20 गेंदों पर सिर्फ 23 रन जोड़े जो कि हार का एक मुख्य कारण बने। वेस्टइंडीज की तरफ से ब्रावो ने 4 और एडवर्डस ने 3 विकेट झटके और किसी अन्य गेंदबाज को कोई भी सफलता नहीं मिली। भारत की पूरी टीम पर ये दो गेंदबाज ही भारी पड़े।

इंडीज की बैटिंग, शुरूआती झटके के बाद कमाल

154 रन का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज को शुरुआत में ही इरफान ने फ्लेचर को आउट कर दिया। पर दूसरी तरफ गेल जमे रहे और भारत की मुश्किलें बढ़ाते रहे। यूसुफ पठान ने जब जहीर के हाथों केच लपकवाकर गेल को 22 के स्कोर पर आउट किया तो लगा कि टीम जीत सकती है पर ये दिन टीम इंडिया के लिए नहीं था। सिमोन्स और ब्रावो ने सारे गेंदबाजों को पीटा। ब्रावो ने सब गेंदबाजों को धुना। सिमोन्स को ओझा ने इरफान के हाथों कैच आउट किया। 5 चौकों की मदद से 37 गेंद पर सिमोन्स ने 44 रन बनाए। वहीं ब्रावो ने सिर्फ 36 गेंद पर शानदार नाबाद 66 रन बनाए, इसमें 4 चौके और 3 छक्के शामिल थे। ब्रावो बने मैन ऑफ द मैच। भारत की तरफ से भज्जी ने क्रिस गेल के सामने ओवर मेडिन डाला।

ना चला बल्ला, ना चली कप्तानी, कीपिंग में भी कांपे हाथ

बल्लेबाजी के ऑर्डर में फेरबदल, क्या होगया धोनी को? इस महत्वपूर्ण मुकाबले से ठीक पहले धोनी ने बल्लेबाजी क्रम में फेरबदल किया। अभ्यास मैच और लीग मुकाबलों में धोनी ने 3 नंबर पर बल्लेबाजी की, तो क्या वजह थी कि इस महत्वपूर्ण मुकाबले में धोनी ने फेरबदल किया और रैना को 3 नंबर पर भेजा। धोनी ने कीपिंग में भी गलती की। सिमोन्स को रन आउट करने का मौका धोनी ने गंवा दिया और साथ ही ब्रावो का कैच छोड़ना ये काफी भारी पड़ा। धोनी के दिमाग में क्या चल रहा है ये बता पाना तो मुश्किल है लेकिन उसकी बानगी देखने को मिली जब कि धोनी ने वीरू के जाने के बाद पूछा गया कि कौन हो टीम इंडिया का उपकप्तान। तो धोनी ने युवराज की जगह गंभीर का नाम लिया। ऐसा क्यों? क्या धोनी अपने ऊपर कोई भी सीनियर टीम में नहीं चाहते। पर अभी पूरा वर्ल्ड कप बाकी है धोनी यदि सब को साथ लेकर चलें तो ये कप हमसे कोई नहीं छीन सकता।

इस मैच की हार से ये भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्टेडियम में भारतीय प्रशंसकों का दिमाग इतना खराब हुआ कि उन्होंने भारत के खिलाफ वेस्टइंडीज के लिए नारे लगाने लगे। वैसे आज इस मैच को देखने के लिए वो शख्स भी लॉर्ड्स के स्टे़डियम में मौजूद था जिसे पूरा भरोसा है कि टीम इंडिया ये कप किसी और को नहीं लेने देगी। सचिन तेंदुलकर भी स्टेडियम में मौजूद थे शायद निराश होंगे कि भारत इतनी बुरी तरह से हार गया।


आपका अपना
नीतीश राज

Tuesday, November 18, 2008

युवराज ने फिर धोया अंग्रेजों को

पहला ४, दूसरा १५, तीसरा २९ पर भारत के विकेट गिर चुके थे। इस बार धोनी ने जीता था टॉस और पिछली बार की तरह पहले बल्लेबाजी फैसला गलत साबित होने वाला लग रहा था। पर जैसे कि गांगुली ने कहा था कि कप्तान के लिए जिस एक्सट्र लक की जरूरत होती है वो धोनी के पास है और हुआ भी कुछ ऐसा ही। पिछले मैच में युवराज ने महज ७८ गेंद पर नाबाद १३८ रन की पारी खेली थी। ठीक इस बार भी १२२ गेंद पर ११८ रन की शानदार पारी खेली जिसमें १५ चौके और २ लंबे छक्के थे।

ये यंग युवराज का जलवा है

इसे कहते हैं शानदार पारी। युवराज ने वापसी के बाद तो अपना जलवा दोनों मैचों में दिखाया है वो लाजवाब है। दूसरे वन डे में जब रनों के युवराज मैदान में आए तो सिर्फ आठवें ओवर में २९ रन पर ३ विकेट गिर चुके थे। फिटनेस से जूझ रहे २६ साल के युवराज के लिए ये परीक्षा की घड़ी के सामान थी। राजकोट में पीठ के दर्द के कारण एक दिन पहले तक लग रहा था कि युवी फिटनेस टेस्ट पास कर भी पाएंगे या नहीं। युवराज का साथ दिया दूसरी तरफ वन डे के राहुल द्रविड़ की जगह ले चुके मिस्टर भरोसेमंद गौतम गंभीर ने। गंभीर ने ५६ गेंदों पर अपनी हाफ सेंचुरी पुरी की और इसके साथ धोनी और गंभीर ने इस साल २००८ में १००० रन पूरे कर लिए। इस साल सिर्फ दो खिलाड़ी ही हैं जिन्हें ये खिताब मिला है। युवराज और गंभीर ने १३४ रन की साझेदारी की और भारत को सम्मानजनक स्कोर की तरफ बढ़ा दिया।

यूसुफ का साथ

अब बारी थी कप्तान की लेकिन कप्तान धोनी कमाल नहीं दिखा सके और महज १५ रन पर कोलिंगवुड ने उनके स्टंप बिखेर दिए। फिर आया वो शख्स जो टीम इंडिया को बड़े स्कोर की तरफ ले गया। यूसुफ पठान ने युवराज का साथ देते हुए टीम को एक ऐसी जगह पर ले गए जहां पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। युवराज ने कहा था कि वो तो सोच रहे थे कि २२५ रन का लक्ष्य काफी होगा इस पिच पर। और भारत ने बनाए २९२ रन जिसमें यूसुफ पठान के महज २९ गेंदों पर ५० रन शामिल हैं जिसमें ४ छक्के और २ चौके हैं। सहवाग, रैना, रोहित और युवराज स्टूअर्ट ब्रोर्ड के शिकार बने।

जोर का झटका धीरे से

इंग्लैंड पहले ही आधा मैच हार चुकी थी, ऐसी सोच रखने वालों को जोर का झटका जरा धीरे से लगा। पहले ओवर की आखिरी गेंद पर रैना ने जबरदस्त फुर्ती दिखाते हुए रोहित की तरफ खेली गई बैल की ड्राइव को बीच में लपककर स्टंप पर सटीक थ्रो से बैल को रन आउट कर दिया। प्रायर और शाह के बीच ९६ रन की साझेदारी हुई। इस बीच प्रायर को दो जीवनदान भी मिले और इंग्लैंड का स्कोर १०० का आंकड़ा पार कर गया। जहीर खान, आरपी सिंह, मुनाफ पटेल तीनों तेज गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए।

पहले बल्ले से रक्षक, फिर गेंद से भक्षक

युवराज ने अपना सबसे पहला शिकार शाह को बनाया, शाह की शानदार पारी १ छक्का और ८ चौकों की मदद से ५८ के निजी स्कोर पर समाप्त हुई। फिर प्रायर को अगले ओवर में कोई और जीवनदान युवराज ने नहीं दिया और क्लीन बोल्ड कर दिया। ये युवराज का दूसरा ओवर था लेकिन फिर फ्लिंटॉफ और कप्तान पीटरसन की जोड़ी ने मिलकर तेजी से रन चुराने शुरू किए। दोनों ने मिलकर १२ ओवर में ७४ रन की साझेदारी की। इस बीच ९ रन प्रति ओवर की औसत से रन चाहिए थे इंग्लैंड की टीम को, इसको कम करने के लिए ३२वें ओवर में पीटरसन ने तीसरा पावर प्ले लिया। इसका पूरा फायदा उठाते हुए फ्लिंटॉफ ने भज्जी के एक ही ओवर में ३ छक्के जड़ दिए। अंतिम पावरप्ले में इंग्लैंड ने ५९ रन बटोरे। अब १३ ओवर में चाहिए थे ११० रन। पर अपने आठवें ओवर में युवराज ने खतरा बनते पहले फ्लिंटॉफ को आउट किया और फिर पीटरसन को भी चलता कर दिया। प्रायर, शाह, फ्लिंटॉफ, पीटरसन सभी युवराज की तेज गति की गेंदों को समझ नहीं पाए। प्रायर और पीटरसन को क्लीनबोल्ड फिर शाह और फ्लिंटॉफ एलबीडब्ल्यू आउट किया।

बल्ले से ना सही गेंद से ही सही

बाकी बची कसर वीरेंद्र सहवाग ने पूरी कर दी। अभी सोचा जा रहा था कि कोलिंगवुड, बोपारा और पटेल कुछ कमाल कर सकते हैं पर तीनों खिलाड़ी कुछ कमाल नहीं कर पाए। वहीं सहवाग ने खतरनाक बनते पटेल को पहले आउट किया फिर ब्रोड और हारमीशन को भी चलता किया। सहवाग ने ५ ओवर में २८ रन देकर ३ विकेट झटके।
सीरीज में भारत २-० से आगे हैं और लगातार दो मैच जीतकर मेजबानों के हौसले जहां बुलंद हैं तो वहीं मेहमान ये सोचने पर मजबूर हैं कि क्या वो युवराज की आंधी को कभी रोक पाएंगे। फ्लिंटॉफ भी पंगा नहीं लेना चाहते क्योंकि पिछली बार पंगा लिया था तो ६ छक्कों की सौगात युवी ने भेंट के रूप में दी थी, अभी भूले तो नहीं होंगे फ्लिंटॉफ।

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नीतीश राज

Saturday, November 15, 2008

ऑस्ट्रेलिया के बाद अंग्रेजो के छूटे छक्के

ऑस्ट्रेलिया को टेस्ट सीरीज में धूल चटाने के बाद भारत ने अंग्रेजों के छक्के छुडा़ दिए। राजकोट में धोनी के रनवीरों ने ऐसा खेल खेला जिसे देख अंग्रेजों की हालत पतली हो गई। टॉस जीतने का बाद भारत को पहले बल्लेबाजी कराने का पीटरसन का फैसला उनके लिए हार का कारण बन गया। बाकी का काम भारतीय बल्लेबाजों ने कर दिया।

भारत की शानदार बल्लेबाजी

भारत की सलामी जोड़ी वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ने अपने बल्ले का जादू दिखाना शुरु कर दिया। माना जा रहा था कि जो भी पहले बल्लेबाजी करेगा उसे शुरुआत के एक घंटे तक परेशानी तो होगी ही। पर वीरु की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने ये टीम इंडिया के ड्रेर्सिंग रुम में ये विश्वास तो पैदा कर ही दिया कि भारत एक बड़े स्कोर की तरफ जरुर बढ़ चला है। वीरू ने 10 चौके और 3 छक्कों की मदद से 73 गेंदों पर 85 रन की पारी खेली और उनका बखूबी साथ दिया गंभीर ने। गंभीर ने 63 गेंदों पर 51 रन बनाए जिसमें 8 चौके शामिल थे। 20 ओवर में 127 के स्कोर पर गंभीर को पटेल ने आउट किया। फिर रैना ने आकर ताबड़तोड़ 3 छक्कों की मदद से 44 गेंद पर 43 रन बनाए।

राजकोट का युवराज

भारतीय पारी की सबसे खास बात रही युवराज की विस्फोटक नाबाद पारी। युवराज ने 78 गंदों पर 16 चौकों और 6 शानदार छक्कों की मदद से 138 रन बनाए। युवराज ने इंग्लैंड के खिलाफ सबसे तेज शतक जमाने का कीर्तिमान भी जमाया और किसी भी भारतीय का दूसरा सबसे जल्दी शतक। अपने ही देश में टीम इंडिया ने बनाया अब तक का सबसे बड़ा स्कोर। साथ ही पूरी दुनिया में भारत का दूसरा सबसे विशाल स्कोर। इंग्लैंड की ये तीसरी सबसे बड़ी और शर्मनाक हार है। युवराज ने इंग्लैंड के सभी गेदंबाजों को खूब धुना। युवराज ने फ्लिंटॉफ की 13 गेंदों पर 34 रन ठोंके, हारमिसन की 26 गेंदों पर 48 रन बनाए और साथ ही स्टूअर्ट ब्रोड की 15 गेंदों पर 26 रन बटोरे। कप्तान धोनी ने 32 गेंदों पर 39 रन बनाए जिसमें 1 छक्का और 3 चौके थे। युवराज ने 100 रन सिर्फ चौकों और छक्कों से ही बना दिए पूरी पारी में सिर्फ 38 रन दौड़ कर लिए। पांच महीने के बाद युवराज ने राजकोट के रण में अपना तूफान बरपा कर ये तो बता दिया कि उनको टीम से बाहर रखना सही फैसला नहीं है। अब भारत ने अब तक का अपना दूसरा सबसे बड़ा स्कोर इंग्लैंड के सामने खड़ा कर दिया। इंग्लैंड को 388 रन की चुनौती देकर भारत 75 फीसदी मैच जीत चुका था।

गेंदबाजों ने किया कमाल

अब देखना ये था कि गेंदबाज कितनी जल्दी इस मैच को खत्म करते हैं। इंग्लैंड के स्कोर बोर्ड पर जब 12 रन ही बने थे तब मुनाफ ने प्रायर को सहवाग के हाथों लपकवाकर चलता कर दिया। फिर 150 वां वन डे खेल रहे जहीर ने कमाल दिखाते हुए एक के बाद एक तीन विकेट झटक लिए। 11 वें ओवर में बैल और फिर डेंजर मैन फ्लिंटॉफ को आउट कर भारत की जीत पर मुहर लगा दी। अब सारा का सारा दारोमदार कप्तान पीटरसन पर आगया। पीटरसन ने कुछ शानदार शॉट लगाए और 7 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 63 रन बनाए पर रोहित शर्मा की शानदार फील्डिंग की बदौलत पीटरसन रन आउट हो गए। अब तो सिर्फ औपचारिकता मात्र शेष रह गई थी। पर बोपारा ने 5 दमदार छक्कों की बदौलत 54 रन सिर्फ 38 गेंद पर बना दिए। पर ये पारी सिर्फ इंग्लैंड को सबसे बड़ी और शर्मनाक हार होने से भर बचा पाई। और 38 ओवर में 229 पर इंग्लैंड की पारी सिमट गई। भारत 158 रन के राजकोट का रण जीत गया। युवराज को शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। भारत 7 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है।

अब नहीं कोई मलाल

युवराज को मैन ऑफ द मैच चुना गया और फिर मिली उनको बाइक। धोनी ने बाइक देखी और युवराज को पीछे बिठा कर चल दिए ग्राउंड का चक्कर लगाने। धोनी का टीम के साथ और साथ ही हर खिलाड़ी के साथ रमना बहुत ही अच्छा लगता है। शायद ये भी एक स्टाइल है हमारे युवा कप्तान की। बस देखना ये होगा कि युवराज अगले मैच के लिए पूरी तरह से फिट हो जाएं। आज की जीत के बाद तो ये ही लगता है कि टीम इंडिया को अपने पांच सीनियर खिलाड़ी की जगह लेने वाले सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मिल गए हैं।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”