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Monday, November 24, 2008

लगा भारत के हाथ से मैच गया, पर सीरीज जीत गए हम

भारत ने 19 रन से बैंगलोर वन डे जीतकर सीरीज पर कब्जा कर लिया। लगातार 4 वन डे जीतकर भारत इस सीरीज में 4-0 से आगे हो गया। वैसे तो ये मैच भी डकवर्थ लुइस का शिकार हुआ लेकिन इस मैच में रोमांच अंत तक बरकरार रहा।

इंग्लैंड ने टॉस जीता, पहले गेंदबाजी का फैसला

बैंगलोर में छिटपुट बारिश तो एक-दो दिन से चल ही रही थी। इस बात का ध्यान में रखकर जब पीटरसन ने टॉस जीता तो पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। कहीं ना कहीं ये दिमाग में जरूर रहा होगा कि यदि डकवर्थ लुइस नियम का इस्तेमाल इस मैच में हुआ तो बाद में खेलने वाली टीम को फायदा शायद जरूर हो। इस बार सहवाग के साथ सचिन ओपनिंग के लिए मैदान में उतरे। आठ महीने के बाद सचिन की वापसी के बाद पहले ही मैच में ओपनिंग कराने का फैसला ठीक नहीं लग रहा था। वैसा ही हुआ, सचिन को मात्र 11 रन के निजी स्कोर पर ब्रोड ने क्लीन बोल्ड कर दिया। लेकिन शुरूआत से ही सहवाग अपना बल्ला चला रहे थे और जब सचिन आउट हुए तो भारत का स्कोर था 38 रन और उसमे सहवाग के रन थे 26। गंभीर ने आते के साथ ही हाथ दिखाने शुरू किए। अभी टीम इंडिया के 14 ओवर में एक विकेट के नुकसान पर 82 रन ही बने थे कि बारिश ने मैच में बाधा डाल दी।

बारिश ने डाली मैच में बाधा

बारिश के साए में लग रहा था कि मैच पूरा होगा ही नहीं पर थोड़ी देर में ही बारिश रुक गई और फिर 44 ओवर का मैच कर दिया गया। पर मैदान पर थोड़ी देर बाद ही मैच शुरू होगया लेकिन अभी तक किसी को ये पता नहीं चल पा रहा था कि इस अंतरराष्ट्रीय मैच में पावरप्ले कितने ओवर का हो गया है। कई बार ये सामने आया कि 9,4 और 4 ओवर के रूप में पावरप्ले खेला जाएगा। पर जब तक ये साफ हो पाता तब तक तो 17 ओवर में भारत ने 1 विकेट के नुकसान पर 106 रन बना लिए थे। भारत के समय अनुसार रात 8.30 बजे अंपायरों ने पिच और मैदान का मुआयना किया और फिर ये फैसला लिया कि मैच 22 ओवर का होगा और भारत को अब मात्र 5 ओवर और शेष खेलने होंगे। लेकिन टारगेट में बदलाव आएगा जब कि डकवर्थ लुइस नियम लागू होगा। यदि भारत 22 ओवर में 5 विकेट तक 144 रन बनाता है तो इंग्लैंड को 181 रन बनाने होंगे 22 ओवर में।

भारत ने दिया 166 का लक्ष्य, डकवर्थ ने किया उसे 198

बारिश के बाद के खेल की शुरूआत ही सहवाग के छक्के के साथ हुई। गंभीर और सहवाग बढ़-बढ़ कर मारने लगे। सहवाग 9 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 69 रन पर स्वान का शिकार बने। गंभीर का बखूबी साथ निभाने आए युवराज। दोनों ने मिलकर जल्दी स्कोर को बढ़ाना शुरू किया। गंभीर भी 40 के निजी स्कोर पर स्वान का शिकार बने। लेकिन अगली ही गेंद पर युवराज ने छक्का जड़कर गंभीर की कमी को पूरा किया। फिर धोनी ने पहली ही गेंद खेलते हुए छक्का जड़कर मैच मे मजा ला दिया। धोनी को पटेल ने 9 रन पर एक शानदार गेंद पर क्लीन बोल्ड कर दिया। मैच की आखरी गेंद बाकी थी और यूसुफ पठान इस एक गेंद के लिए आए थे। पठान ने छक्का जड़कर भारत का स्कोर 4 विकेट पर 166 पहुंचा दिया। पर डकवर्थ लुइस नियम लगकर इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 198 की चुनौती थी।

इंग्लैंड के लिए करो या मरो

भारत जहां सोच रहा था कि यदि 160-170 का लक्ष्य इंग्लैंड को दिया गया तो उस लक्ष्य पर लड़ा जा सकता है। पर इंग्लैंड की रणनीति अलग ही थी। जहीर खान के पहले ओवर में सिर्फ 1 रन निकला। मुनाफ पटेल के पहले ओवर की दूसरी गेंद पर खतरनाक बोपारा का लाजवाब कैच ईशांत ने पकड़ा। फिर इंग्लैंड के बल्लेबाज जमकर और संभलकर खेलने लगे। एक समय तो लगने लगा कि बेल और शाह की जोड़ी जम गई है। दोनों खिलाड़ी अच्छा खेल रहे थे।

गंभीर से छूटा कैच

भारतीय खिलाड़ी पूरी कोशिश करने में लगे थे कि कैसे भी इन को आउट कर दें पर दोनों कोई भी मौका नहीं दे रहे थे। पर भज्जी की गेंद पर 8वें ओवर की तीसरी गेंद पर शाह का कैच उछला और गंभीर कैच को लपकने के लिए आगे बढ़े पर बॉल हाथ से निकलकर जमीन पर जा गिरी। भज्जी ने तुरंत कप्तान की तरफ मुड़ कर देखा जैसे कि शिकायत कर रहे हों कि देख लो मेरी तरफ से तो पूरी कोशिश थी पर गंभीर ने कैच छोड़ दिया। उस समय शाह 29 रन पर खेल रहे थे और इग्लैंड के रन थे 38। पर अगली ही गेंद पर बेल को भज्जी ने क्लीन बोल्ड कर दिया। फिर ईशांत ने अगले ओवर में पीटरसन को बोल्ड कर दिया अब लगा कि भारत की वापसी होने लगी है। पर अब फ्लिंटॉफ और शाह की जोड़ी को तोड़ने में भारत कामयाब नहीं हुआ। 17 वें ओवर तक दोनों बल्लेबाजों ने जहां पर चाहे वहां पर रन बटोरे। शाह का वो छूटा कैच भारत को महंगा पड़ने लग रहा था।

लगा भारत के हाथ से मैच गया, पर....

शाह और फ्लिंटॉफ ने जमकर सभी गेंदबाजों की धुनाई की। 17वें ओवर में इंग्लैंड ने आखिरी पावरप्ले लेने का फैसला किया। भारत की तरफ से जहीर खान को गेंद सौंपी गई। पावरप्ले के इस ओवर में कुल 4 रन निकले और एक कामयाबी भी मिली। खतरा बन चुके शाह को जहीर ने सचिन के हाथों कैच करवाकर भारत की मैच में वापसी करवा दी। अगले ही ओवर में फ्लिंटॉफ को ईशांत ने आउट कर दिया। भारत पावरप्ले को बहुत ही अच्छे ढंग से खेलने में कामयाब हुआ। जो खतरा बन रहे थे वो दोनों खिलाड़ी इस पावरप्ले में आउट होगए। अब लगा कि भारत मैच जीत जाएगा। इंग्लैंड के 18 ओवर के खत्म होने के बाद 145 पर पांच विकेट गिर चुके थे और उनको 24 गेंदों पर 54 रन बनाने थे। जहीर ने पटेल को 11 पर आउट किया और फिर मुनाफ ने अपने फालोथ्रू पर स्वान को रनआउट किया। अगली ही गेंद पर कोलिंगवुड को तेंदुलकर के हाथों लपकवाकर मुनाफ ने इंग्लैंड को आठवां झटका दिया। अब इंग्लैंड को 1 गेंद पर 20 रन जीत के लिए चाहिए थे। मुनाफ ने अंतिम गेंद पर रन ना देकर भारत को 19 रन से जीत दिला दी। सहवाग की शानदार पारी के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच और बाइक दी गई। इस बार सहवाग ने मैदान में बाइक को घुमाया ना कि धोनी ने। पर इस मैच में युवी ने इंग्लैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा छक्के मारने वाले सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोड़ दिया। युवी ने 26 मैच में 23 छक्के जमाए।

आपका अपना
नीतीश राज

Wednesday, November 5, 2008

मेरी नजर से, कुंबले की कोटला से विदाई

कभी-कभी अनायास ही कुछ ऐसा हो जाता है जिसके बारे में मालुम तो पहले से होता है लेकिन अनायास कारणों से अनायास ही निर्णय लेना पड़ जाता है। क्रिकेट में कहते हैं कि एक गेंद ही होती है जो तकदीर बदल देती है। वसीम अकरम की एक गेंद ही थी जो के.श्रीकांत के हेल्मेट पर लगी थी और वो रिटायर्ड हर्ट हो गए थे। हेल्मेट होने के बावजूद भी श्रीकांत को वो गेंदे इतनी चोट पहुंचा गई थी कि फिर कभी भी वो वसीम अकरम को ठीक से खेल नहीं पाए और हर मैच में उनका ही शिकार हो जाते। श्रीकांत का करियर खत्म हो गया। कैच लपकने की कोशिश में जंबो की बाएं हाथ की छोटी उंगली में इतनी गहरी चोट लगी कि ११ टांके लगे और फिर वो फैसला हो गया जिसे की उन्होंने सीरीज के आखिरी मैच के लिए बचा के रख रखा था, एक मैच पहले ही कुंबले को संन्यास लेना पड़ा।
कोटला टेस्ट में कुंबले को चोट लगी तब उनकी पत्नी चेतना दिल्ली एयरपोर्ट पर बैंगलोर के लिए फ्लाइट लेने के इंतजार में खड़ीं थीं। तभी पता चला कि कुंबले को हाथ में चोट लगी है और उनको अपोलो अस्पताल में भेज दिया गया है। तुरंत वो अपोलो पहुंची और फिर पता चला कि ऊंगली में ११ टांके लगे हैं और शायद ये भी हो सकता है कि नागपुर टेस्ट के साथ-साथ वो ये टेस्ट भी ना खेल पाएं। दोनों ने मिलकर ये फैसला किया कि बस ये टेस्ट ही आखिरी टेस्ट होगा क्योंकि अगले टेस्ट में कुंबले को शायद मौका भी ना मिले। वो खेलते हुए संन्यास लेना चाहते थे, मैदान में रहते हुए संन्यास।
आखिरकार १९ साल के लंबे खेल करियर को विराम लग ही गया। आए दिन कयास लगाए जा रहे थे कि अनिल कुंबले भी सौरव गांगुली की तरह कभी भी संन्यास का एलान कर देंगे। इस सीरीज में इस जीवट खिलाड़ी के ऊपर शक किया जाने लगा था कि आखिर कब तक कुंबले? लोगों कि तरफ से आवाज़ भी आने लगी कि क्या टीम पर बोझ बन गए हैं जंबो?
इस सब सवालों पर एकदम से विराम लगाते हुए ऑस्ट्रेलिया के साथ कोटला में तीसरे टेस्ट के आखिरी दिन जब कमेंट्री के दौरान ये एलान हुआ कि कुंबले संन्यास ले रहे हैं, थोड़ी देर तक तो सुनने वालों को इस बात का पर यकीन ही नहीं हुआ पर तभी स्क्रीन पर लिखा आया----

“Anil Kumble Decides To Retire From International Cricket.
Please Wait Till The End To Cheer Anil Kumble”.



सारी दुनिया को यकीं हो गया कि कुंबले संन्यास ले रहे हैं। उसी कोटला मैदान पर संन्यास का फैसला लिया जिस पर उन्होंने १९९९ में एक पारी में १० विकेट लेने का कीर्तिमान हासिल किया था जिसे सिर्फ एक खिलाड़ी ही उनके साथ बांट रहा है। साथ ही ये वो रिकॉर्ड है जिसे कि कोई भी तोड़ नहीं सकता बस पा सकता है। सब बस मैच खत्म होने का इंतजार करने लगे।
और मैच खत्म हो गया। सभी खिलाड़ी कुंबले से हाथ मिलाने लगे और गले मिलने का सिलसिला शुरू होगया। कुंबले को सम्मान देने के लिए कमेंट्रीटेटर ने लोगों से अपील की कि सभी खड़े होकर इस महान गेंदबाज को सम्मान दें।

फिर पूरा कोटला खड़ा होगया अपने पैरों पर और वहीं कुंबले को हाथों में उठा लिया उनके पुराने दोस्त और सहयोगी राहुल द्रविड़ और जहीर खान ने। पिच से मैदान के एक छोर तक की दूरी ही काफी लगने लगी और वहां ये आवाज़ आने लगी कि कुंबले को और ऊंचा उठाया जाए। पूरे समय १९ साल से कदम-दर-कदम साथ चल रहे सचिन यहां भी उनके साथ ही चल रहे
थे। सहवाग दौड़ते हुए आए साथ में आर पी सिंह भी। तभी पीछे से एक शख्स और दौड़ता हुआ आया जो बार-बार कहने लगा कि मैं बैठाता हूं कंधे पर कुंबले को। आर पी सिंह ने इशारा किया कि बैठाओ हम उठाते हैं कुंबले को और वो शख्स अपने कंधे पर बैठा कर जंबो को आगे बढ़ चला।

जी हां, महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी की कमान भी सौंपी गई है और माही ने ही अपने कंधों का एहसास कराकर जंबो को बता दिया कि ये कंधे भी तुम्हारे कंधों की तरह ही मजबूत हैं। और फिर वो जंबो को लेकर मैदान का चक्कर लगाने लगे।

यदि देखें तो जंबो सच में जंबो ही हैं लेकिन धोनी को ऐसा करते देख अच्छा ही लगा और सच, ये भी लगा कि हां सिर्फ ऑस्ट्रेलियन ही अपनों की विदाई ऐसे नहीं करते हम भी कह सकते हैं कुछ इसी शान से अपनों को बाय बाय, कुंबले।

कोटला में कुंबले के अंतिम पल

मेरी नजर से कुंबले की कुछ चुनिंदा यादें अगले अंक में।

आपका अपना
नीतीश कुमार
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”