Showing posts with label Russia. Show all posts
Showing posts with label Russia. Show all posts

Friday, July 3, 2009

क्यों छापें काली लड़कियों को, बिक्री नहीं होगी पेपर की, है ना.......।

यदि लीड स्टोरी है और फोटो अच्छी नहीं है तो उसे लीड बनाएंगे पर फोटो दूसरी या फिर तीसरी लीड की लगा देंगे।

जब मैंने पिछली पोस्ट की तो कई लोगों ने कहा कि हां यार ये तो सही है कि सारी खबर हर जगह छपी और साथ ही कई चैनलों पर भी चली पर यार किसी भी पेपर में महिला खिलाड़ी की फोटो नहीं दिखी। मैंने कहा, हां क्यों दिखेगी। ढूंढने से भी नहीं मिलेगी किसी भी महिला की फोटो। यदि मिलेगी भी तो एक दो में जिस की बिक्री काफी कम होगी। कारण क्या है?
आम का सीजन चल रहा है और आम भी कई प्रकार के आ रहे हैं। चाहे इनको इंजेक्शन से वो पका रहे हों या फिर किसी भी कारण से पर रेट उनके वो ही ३० रु किलो होंगे। उनके एक किलो जब वो थोक में लेते होंगे तो १२-१३ रु प्रति किलो पड़ता होगा। फिर यदि वो आपको १५ में दे देगा तो खाएगा क्या और बचाएगा क्या?
मैंने बताया कि एक टीवी या फिर मॉनिटर की कीमत १०-१२ हजार के करीब होती है। हमारे ऑफिस में हो ना हो तो तीन हजार के करीब टीवी और मॉनिटर लगे हुए हैं। तो सोचो १० साउंड मिक्सर, १०० के करीब कैमरा, हजारों लाइटस, हजारों कंप्यूटर की कीमत कहां तक पहुंच जाती होगी। इलैक्ट्रोनिक मीडिया में इसलिए कोई भी वो ख़बर जो टीआरपी नहीं दे सकती वो ज्यादा नहीं चल सकती।
वैसे ही जहां तक अखबार का सवाल है तो भई वो भी तो ऐसा ही करते हैं ना। यदि लीड स्टोरी है और फोटो अच्छी नहीं है तो उसे लीड बनाएंगे पर फोटो दूसरी या फिर तीसरी लीड की लगा देंगे। यदि तीनों स्टोरी की फोटो अच्छी नहीं है तो बस ब्रह्मास्त्र याने की एड की कोई तस्वीर।
कभी कोई क्यों छापने लगा काली-पीली लड़कियों को। पर मैंने उनको रोक कर बताया कि वैसे हम सब को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हां रंग, चेहरा, इन सब को देख कर कोई भी फैसला नहीं होना चाहिए। वैसे सभी को मैं मिला देता हूं ममता खरब से। पहचान लीजिए, कहीं मिले तो शुक्रिया अदा कीजिएगा। सच्ची श्रद्धा से देश के लिए काम करने के लिए दीजिएगा शुक्रिया।

~~~~ये हैं ममता खरब। (दिल से कह रहा हूं बहुत मुश्किल से देश की महिला हॉकी प्लेयर की फोटो गूगल पर ढूंढ पाया हूं।)

आपका अपना
नीतीश राज

Thursday, July 2, 2009

कौशिक जी, ये तो होना ही था, आपकी लड़कियां इतनी सुंदर जो नहीं हैं।



हमारे देश में कौन जानता है कि सीता गोसाई, मुधु यादव, प्रीतम सिवाच, रानी रामपाल, सुरिंदर कौर, सबा अंजुम, ममता खरब कौन हैं।

कौशिक जी ये तो होना ही था। इसका इल्म तो पहले से ही था हमें तो, आपको नहीं था ऐसा मैं सोच नहीं सकता। मुझे तो ये मालूम था कि ऐसा ही होगा। आपकी लड़कियों से कोई भी नहीं मिलने आएगा। आपकी कोई लड़की भी तो ऐसी नहीं कि जिसे कोई देखना पसंद करे। अधिकतर के पास तो रंग ही नहीं है, सभी तो काली हैं, शरीर ऐसा है कि कोई लड़की मानने को तैयार नहीं। खुद आप के घर के लोग उन्हें देखना पसंद नहीं करते। कौशिक जी, ये सब आप क्या सोचते थे कि दुनिया उमड़ पड़ेगी आपकी लड़कियों को देखने के लिए। नहीं, कतई नहीं।
हमारे देश में कौन जानता है कि सीता गोसाई, मुधु यादव, प्रीतम सिवाच, रानी रामपाल, सुरिंदर कौर, सबा अंजुम। चक दे के कारण ममता खरब को लोग जानने और पहचाने लगे वर्ना ममता खरब को भी कोई नहीं जानता। अरे, महिला हॉकी टीम की कप्तान कौन है? कौन बताएगा? यदि सर्वे कराया जाए तो शायद ही पूरे देश में आंकड़ा १०० को छू पाएगा। मैं प्रतिशत की बात नहीं कर रहा हूं कौशिक जी, पूरे देश में १०० लोग भी नहीं बता पाएंगे। यदि महिला हॉकी टीम के परिवार, रिश्तेदार और आस-पड़ोस को छोड़ दें तो। आप तो महिला हॉकी टीम की बात कर रहे हैं मैं ये दावा करता हूं कि पूरे देश में ५०० से ज्यादा लोग ये नहीं जानते होंगे कि पुरुष भारतीय हॉकी टीम का कप्तान कौन है। शर्त वो ही कि परिवार वगैरा को छोड़ कर साथ ही इंटरनेट में सर्च नहीं कर सकेंगे। आखिरकार ये आपके देश का राष्ट्रीय खेल है। है कि नहीं है, मुझे तो इस पर भी कई बार शक होता है।

>अरे
कौशिक जी आप ने तो मुगालता पाल रखा है
कि आप की टीम गर कोई टूर्नामेंट जीतकर आएगी तो आपकी लड़कियों को कोई सर-आंखों पर बैठाएगा। जी कौशिक साहब आपको तो जाते हुए इस बात का एहसास हो जाना चाहिए था जब कि आपकी लड़कियां पूरी रात एयरपोर्ट पर खड़ी रहीं और उनका ट्रांजित वीजा नहीं आया। और इस कारण से वो इस टूर्नामेंट में एक दिन की देरी से पहुंची। नहीं जी नहीं, कतई नहीं बदल सकता इनका भविष्य। आप मेहनत करके देखना चाहते हैं तो देख लीजिए पर कोई फायदा नहीं, आप अपने मन के खुद मालिक हैं। अरे हमारे देश में तो हमारे खेल मंत्री पुलेला गोपीचंद को भी नहीं जानते।
आपके देश के पीएम भी दो दिन बाद बधाई संदेश भेजते हैं। अब से कुछ देर पहले ही पीआईबी ने प्रेस रिलीज जारी किया गया है। गर ये ही हाल पुरुष हॉकी टीम के साथ हुआ होता तो पहाड़ टूट जाता और इससे भी अधिक यदि ये ही हाल यदि भारतीट क्रिकेट टीम यानी टीम इंडिया के साथ हुआ होता तो भूचाल आजाता।
कोई नहीं जानता कि रानी रामपाल हमारी टीम में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं। १६ साल की इस बाला ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल किए हैं। रानी पुरुष टीम के दिवाकर राम की तरह मानी जा रही हैं। पर लोग उसे क्यों जानेंगे वो सानिया मिर्जा कि तरह सुंदर जो नहीं है। वो सायना नेहवाल की तरह गुड लुकिंग भी नहीं है। वर्ना हमारे खेल दिग्गज तो ये कहते हैं कि आजकल सानिया मिर्जा को बहुत पीछे छोड़ दिया है सायना ने। पर कहीं देखी थी सायना की वो खबर जब सायना ने चीन की वॉग को हराकर चैंपियनशिप जीती थी। शायद नहीं। सानिया क्वार्टर फाइनल में भी पहुंचे तो खबर हो जाती है।
मुझे किसी भी खिलाड़ी से कोई शिकायत नहीं पर सोच ये है कि चेहरा और कद देख कर खासकर देश के मामले में प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए। एक दो अखबार को छोड़ दें तो किसी ने भी महिला टीम की तस्वीर नहीं छापी। क्यों छापें काली लड़कियों को, बिक्री नहीं होगी पेपर की, है ना.......


आपका अपना
नीतीश राज


नोटभारतीय महिला हॉकी टीम ने कप्तान सुरिंदर कौर की अगुवाई में रूस में एफआईएच चैंपियंस चैलेंज टू जीता है। जो कि पिछले २५ साल में भारत ने पहली बार जीता है। ये भारतीय महिला टीम ने रचा है इतिहास। अब उसे सीधे चैलेंज वन के लिए क्वालिफाई कर लिया है। पहले तो जाते हुए टीम को ट्रांजित वीजा के लिए पहले एयरपोर्ट पर फिर होटल में रात भर इंतजार करना पड़ा था और अब जीत कर लौटने पर महिला टीम का स्वागत के लिए कोई भी अधिकारी हॉकी इंडिया की तरफ से नहीं पहुचा। सिर्फ ये शिकायत है कौशिक साहब की। अब हॉकी इंडिया के महासचिव मोहम्मद असलम खानापूर्ती करने में लगे हुए है। हॉकी इंडिया अब सारी टीम को एकत्र करके टीम के सम्मान में कार्यक्रम करेगी। पर असलम साहब टीम के स्वागत के लिए अधिकारी क्यों नहीं पहुंचे? हां, एक बात और एम के कौशिक साहब टीम के कोच हैं।


Saturday, October 4, 2008

‘प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री अब तो जागो या आदत पड़ चुकी है फरियाद पर ही जागोगे’

क्या आपको पता है पीएम मनमोहन सिंह साहब और रक्षा मंत्री ए के एंटनी, की परिवार का कोई सदस्य यदि बंधक हो तो परिवार वालों पर क्या बीतती है। 19 दिन के बाद भी परिवार वालों की सुध लेने वाला सरकार की तरफ से कोई नहीं है। सिर्फ और सिर्फ आश्वासनों का दौर चल रहा है। हम अभी कार्रवाई कर रहे हैं, जल्द ही नतीजा आपके सामने होगा। अरे, क्या कार्रवाई कर रहे हैं, कब तक होगी कार्रवाई क्या आप बता सकते हैं। एक्शन लेने तक से तो आप डरते हैं। दूसरे देश अपनी नौसेना भेज रहे हैं। हमारे देश की नौसेना कह रही है कि वो बंधकों को रिहा करवाना चाहती है तो फिर कोई भी निर्णय लेने में हमारे देश की सरकार क्यों घबरा रही है। क्यो पीछे हट रहे हैं हम। अमेरिकी नौसेना वहां पर मौजूद है साथ ही रूस की तरफ से भी मदद दी जा रही है। रूस की नौसेना की टुकड़ी जिसमें कि तकरीबन 200 क्रू मैंबर हैं पहुंचने वाले हैं। यूक्रेन का भी एक जहाज इसी इलाके में बंधक खड़ा हुआ है जिसपर की अमेरिका आंखें गड़ाए बैठा है साथ ही इसमें रूस के लोग भी बंधक बने हुए हैं। जब दो देश की सेना वहां पहुंची हुई है तो फिर आप को क्या चिंता सता रही है। या तो मदद दो या फिर उनसे मदद लो लेकिन यदि अमेरिका या रूस जैसा बनना है तो फिर फैसला तो कुछ कड़ा ही लेना होगा क्योंकि कब तक कोई यूं ही हमारी मदद करता रहेगा। माना कि बंधकों में से आपका कोई भी नहीं है पर क्या जिन्होंने बंधक बनाया है वो आपके जान पहचान के हैं जो कि इतने दिन बाद भी इतनी ढिलाई बरती जा रही है।
15 सितंबर को सोमालिया कोस्ट पर एक व्यापारिक ऑयल टैंकर ‘स्टोल्ट वेलोर(Stolt valor)’ को बंधक बनाया गया था। जहाज पर 22 लोग हैं जिसमें से 18 भारतीय हैं। बाकी बचे 4 विदेशी हैं। हमारी सरकार कोई भी ठोस कदम या यूं कहें कि बल प्रयोग करने के पक्ष में नहीं है। रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है। हमारी सरकार घटना घट जाने के बाद अपने काम में लग चुकी है यानी कि अब नीति बनाई जा रही इन समुद्री लुटेरों से लड़ने के लिए। वाह ! चलो सांप तो निकल गया अब लाठी मारने का काम दिखावे के लिए तो कर लें।
क्या सोमालिया कोस्ट और यमन क्षेत्र के इन समुद्री लुटेरों के बारे में हम नहीं जानते। इनकी क्या रणनीति होती है क्या हमें नहीं पता। ये जहाज भी उड़ाना या डुबाना जानते हैं। इनका क़हर बरपा हुआ है। जनवरी 2008 से लेकर अब तक 55 जहाजों को अगवा कर चुके हैं जिसमें से 11 जहाज अब भी इनके कब्जे में हैं। इन समुद्री लुटेरों ने इस जहाज को छोड़ने के एवज में 6 करोड़ की मांग की है। कई बार तो इन लुटेरों से बातचीत महीने-महीने चल जाती है, नहीं तो कम से कम 30 दिन का समय तो लगता ही है। तब तक क्या होगा इन 22 लोगों का जो कि अभी तक तो सुरक्षित हैं पर क्या आगे भी रह पाएंगे।
Stolt valor भारतीय जहाज नहीं है, इसका रजिस्ट्रेशन हांगकांग में किया गया और मालिक जापानी है। क्रू पूरा भारतीय है तो सोचना तो भारतीय सरकार को ही होगा।सबसे बड़ी अड़चन जो भारत सरकार के सामने आ रही है शायद वो है कि सोमालिया के क्षेत्र में वो ही देश कार्रवाई कर सकता है जिस देश का झंडा उस बंधक जहाज पर लगा हो और उस पर भारत का झंडा नहीं है। ये प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हाल ही में पारित हुआ था। लेकिन हम हाथ पर हाथ धरे उन २२ लोगों को भगवान भरोसे तो नहीं ही छोड़ सकते।
तब से अब तक 19 दिन बीत चुके हैं। परिवार वाले मारे-मारे फिर रहे हैं। मंत्रियों के दर- दर की ठोकरें खा रहे हैं। कैप्टन पी के गोयल की पत्नी सीमा गोयल और साथ में बंधक परिवार के सदस्य भी हर समय कभी इस न्यूज चैनल तो कभी दूसरे, कि सरकार कैसे तो इनकी आवाज़ सुनें, और देश के लोगों तक उनकी आवाज़ पहुंचे, और तभी सरकार कोई कारगर कदम उठाए। साथ ही सीमा गोयल और बंधकों के परिवार वाले १० जनपथ जाकर राहुल गांधी से भी गुहार लगा चुके हैं और साथ ही साउथ ब्लाक भी फरियाद करके आगए हैं। पर क्या हमारी सरकार को परिवार वालों के फरियाद और गुहार करने के बाद ही फैसले के बारे में सोचना होगा। क्यों सरकार सोती रहती है कि जब कोई फरियादी उन तक आएगा तब जाकर सरकार कोई कदम उठाएगी? ऐसा क्यों?

आपका अपना
नीतीश राज

Saturday, September 27, 2008

क्या हैं हम, SOFT NATION या WEAK NATION? पार्ट 2

पिछली कड़ी में बात की हमने भारत की, जब कि हमने पहली बार आतंकवाद के सामने घुटने टेके थे। कुछ देश ऐसे भी हैं जो कि किसी भी कीमत पर आतंकवाद के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।

इस कड़ी में अब बात दूसरे नेशन रूस की। रूस के मॉस्को में 23 अक्टूबर 2002 की एक शाम। मॉस्को में शहर के सबसे बड़े थिएटर में गीत संगीत से भरी शाम अपने पूरे रंग में थी। करीब 850-900 के करीब लोग वहां मौजूद थे। तभी रात के 9।00 बजे करीब 42 चेचन्य आतंकवादी वहां आते हैं और पूरे थिएटर को अपने कब्जे में कर लेते हैं। करीब 90 लोग भागने में सफल हो जाते हैं। दो दिन बाद 150-200 लोगों को आतंकवादी छोड़ देते है जिनमें औरतें और बच्चे शामिल। उन चेचन्य आतंकवादियों की मांग थी कि सप्ताह भर के भीतर चेचन्य में से रूस अपनी सेना हटा ले और चेचन्य को आजाद कर दे। काफी लोगों ने मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाही पर वो सब बेकार। सरकार ने ये फैसला भी किया कि चेचन्य से अपने सैनिक हटा लिए जाएंगे पर समय बहुत कम था। वहीं कमांडो अपनी जगह ले चुके थे। 26 अक्टूबर 2002 को फौजी कार्रवाई से पहले सरकार ने संदेश इन विद्रहियों को भिजवाया---

“हमें नहीं पता कि कितने आतंकवादी थिएटर में मौजूद हैं और उनके पास कौन
से हथियार हैं, हमें ये भी नहीं पता कि वो हमारी जनता के साथ कैसा सलूक कर रहे हैं।
हमें तो सिर्फ ये पता है कि एक भी विद्रोही थिएटर से जिंदा बाहर नहीं निकल
पाएगा”
और हुआ भी ये ही सभी विद्रोही मार दिए गए। साथ ही करीब 150 बंधकों की भी मौत हुई। जबकि ऐन हमले से पहले कुछ बंधकों ने फोन पर ये जानकारी दी थी कि,
'विद्रोही उनको कोई भी हानि नहीं पहुंचाना चाह रहे ये तो हमारी सरकार है जो कि हमें यहां से जिंदा नहीं निकालना चाहती और थिएटर में जहरीली गैस छोड़ रही है’।
बाद में पुतिन सरकार को बहुत भला-बुरा कहा गया, वहां पर भी राजनीति खूब हुई। पुतिन सरकार पर आरोप भी लगे और एक वक्त तो ये आया कि शायद पुतिन हिल जाएंगे। पर ऐसा हुआ नहीं। लोगों ने फिर दूरदर्शिता को देखते हुए सरकार का साथ ही दिया।

क्या इस तरह के फैसले भारत सरकार ले सकती है?चाहे किसी की भी दल की सरकार हो। यदि रुबैया अपहरण कांड में सरकार ने सटीक फैसला ले लिया होता तो शायद आज देश का हर हिस्सा महफूज होता।
कई दिनों से ये बहस चल रही है कि हम क्या हैं एक Soft Nation या फिर Weak Nation। लेकिन इन दो उदाहरण से ये साफ जाहिर होगया होगा कि हम क्या हैं। Soft Nation रूस भी है पर वो Weak Nation नहीं है। पर हम Soft Nation के साथ साथ Weak Nation भी हैं। जब ही आतंकवाद सर चढ़कर बोल रहा है।

अगली बार भी नजर डालेंगे भारत सरकार और विदेशी सरकारों के रुख पर जो हमें एहसास कराएगा और बताएगा कि हां, हम Soft नहीं Weak Nation हैं।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”