Showing posts with label पाकिस्तान. Show all posts
Showing posts with label पाकिस्तान. Show all posts

Wednesday, May 19, 2010

ये फैसला तो जरूरी था।


पिछले वर्ल्ड टी 20 में मैंने एक पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता से पूछा था कि कौन सी टीम सब से प्रबल दावेदार है कप की। उनके जवाब से मैं संतुष्ट नहीं हुआ। मैंने कहा कि पाकिस्तान को आप कम मत आंकिए ये कभी भी उल्टफेर करने का माद्दा रखती है। उनका जवाब क्या था वो आप को बाद में बताता हूं पहले बात इस बारे में।

ये तो जरूरी था।

7 दिन के अंदर नोटिस का जवाब देना होगा भारतीय टीम के 6 खिलाड़ियों को जिन्होंने वर्ल्ड टी-20 में भारत की शर्मनाक विदाई के बाद पब में पंगा किया था। युवराज सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, रोहित शर्मा, पीयूष चावला और रवींद्र जडेजा को बोर्ड ने नोटिस जारी किया। वैसे तो हारने के बाद भारतीय जमीन पर कदम रखते ही आशीष नेहरा का पीछा पब ने नहीं छोड़ा था। पर पब के किसी भी तरह के पंगे से उन्होंने गुस्से की हंसी के साथ साफ-साफ इनकार किया था। साथ ही टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी युवराज सिंह ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर में कहा था कि उनका कोई पंगा नहीं हुआ।
वेस्टइंडीज टूर पर भारतीय टीम मैनेजर रंजीव बिस्वाल ने खिलाड़ियों के इनकार के बाद जो रिपोर्ट सौंपी उसमें ये साफ था कि पब में पंगा हुआ था पर हाथापाई नहीं हुई थी

कितनी शर्म की बात है कि सीनियर खिलाड़ियों ने ऐसा बर्ताव किया। हार गए और ऐसा बर्ताव। सीनियर खिलाड़ी बखूबी जानते हैं कि क्रिकेट को खुदा की तरह समझने वाले देश भारत के प्रशंसक कैसे हैं। इन्होंने गलती की और गलती के बाद झूठ बोला। एक बार नहीं बार-बार। वहीं दूसरी तरफ, हम यदि ये कहें कि हार का गम था और फैन्स को ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए था तो ये भी गलत है। ऐसा तो होना ही था पर हां उसको अंत कुछ इस तरह होगा ऐसा शायद ही किसी ने सोचा हो। ये अनुशासनात्मक कार्रवाई इन खिलाड़ियों के ऊपर होनी थी और ये जरूरी भी थी।

धोनी का बयान, एक तीर दो निशाने

वहीं धोनी ने कहा कि टीम के चयन में चयनकर्ता उनकी सुनते नहीं है। तो ये बात पहले भी कही जा सकती थी। जब तक टीम जीत रही थी तब तक आपको भी कोई दिक्कत नहीं हुई पर जैसे ही टीम हारी आप भी खिलाड़ियों के साथ छोड़कर दूर खड़े होगए। जबकि ये बात आप खुद जानते हैं कि इस बार के टी-20 में आपके कई फैसलों पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है। लेकिन धोनी कहीं ना कहीं टीम / बोर्ड की राजनीति को भी सामने लाना चाहते हैं।

बोर्ड भी कठघरे में

असल मायने में बोर्ड पर भी सवाल उठना चाहिए। ना वो कोच की सुनती ना ही वो कप्तान की सुनती, क्यों? याद है मुझे पिछले वर्ल्ड टी-20 में हार के बाद भी बोर्ड के एक सदस्य का ये ही कहना था जो कि इस बार भी दोहराया उन्होंने कि यदि खिलाड़ियों को थकान महसूस हो रही थी तो वो बताते तो हम उन्हें आराम देते। रटा-रटाया बयान फिर से जैसे पढ़ दिया गया हो। यानी की वो बोर्ड अधिकारी पुरानी गलतियों से सबक नहीं लेते हैं, इससे तो ये ही जाहिर होता है।
दूसरी बात, इस बात से मैं तो कतई इत्तेफाक नहीं रखता कि सहवाग की जगह मुरली विजय को भेजने का फैसला ठीक कहा जाएगा। आईपीएल की फॉर्म रॉबिन उथप्पा को भेजने की हिमायती दिखती है पर फिर ये फैसला क्यों लिया गया, शायद सेलेक्टर ही जानते हों। मुरली विजय जिस टीम से आईपीएल में खेलते हैं उस टीम के मेंबर बोर्ड में भी मेंबर हैं।

आईपीएल असर तो डालता ही है....

आईपीएल ने फायदा दिया या घाटा पहुंचाया इस पर बहुत समय से बहस हो रही है पर जहां पर जिस देश में आईपीएल ने जन्म लिया और उस देश का कप्तान ये कहे कि थैंक्स, अगली बार पहले वर्ल्ड कप है बाद में आईपीएल। इस बयान से आप एक कप्तान की व्यथा जान ही सकते हैं कि आईपीएल में कितना पेंच होता है। शायद ये ही कारण है कि इस बार आईपीएल के किसी भी खिलाड़ी ने वहां पर परचम नहीं लहराया।

जाते-जाते----अच्छा हुआ कि इंग्लैंड जीता कप

पिछले वर्ल्ड टी 20 में मैंने एक भूतपूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता से पूछा था कि कौन सी टीम सब से प्रबल दावेदार है इस बार वर्ल्ड टी 20 की। उनके जवाब से मैं संतुष्ट नहीं था। मैंने कहा कि पाकिस्तान को आप कम मत आंकिए ये कभी भी उल्टफेर करने का माद्दा रखती है। उनका जवाब था कि नए खिलाड़ी हैं क्या जीतेंगे। जवाब में मैंने कहा कि पिछली बार भी तो भारत जीत गया था सभी बच्चे थे। पाकिस्तान की ये टीम नहीं जीत सकती, उन्होंने जवाब दिया।
जब पाकिस्तान ने कप जीता, मेरा उनसे आमना-सामना कई बार हुआ अब वो कभी बातचीत में ऐसी कोई लाइन नहीं लेते कि ये तो नहीं हो सकता।
अच्छा हुआ फिर इस बार वो टीम जीती जिसे दावेदार की सूची में नहीं रखा जा रहा था। जितने लोग थे उतने चैंपियन थे, कोई कह रहा था वेस्टइंडीज, द. अफ्रीका, पाकिस्तान शायद भारत भी...। पर अच्छा हुआ कि इंग्लैड जीत गया। पहली बार इतिहास में इंग्लैंड ने कोई ऐसा खिताब जीता है। इंग्लैंड में शुरू हुआ क्रिकेट आज तक एक बार भी 50-50 का चैंपियन नहीं बन पाया है। ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सचमुच में हार हुई और ब्रिटेन में बदलाव आ ही गया।

आपका अपना
नीतीश राज

Thursday, January 28, 2010

पैसे के लिए कुछ भी करेगा। कभी ख़फा होगा, कभी खुद मान जाएगा, पर पैसा तो नहीं छोड़ेगा।


आजकल ये बहुत देखने में आ रहा है कि लोग पैसे के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। कुछ भी मतलब कुछ भी, शायद सब समझ गए होंगे कि इस कुछ भी का क्या मतलब होता है। पहले मैं सोचता था कि ये पैसा तो सिर्फ कॉरपोरेट कल्चर वालों को ही अपने इशारे पर नचाता है। पर धीर-धीरे मेरी जानकारी में इजाफा हुआ कि नहीं ये तो हर जगह बॉस है। चाहे फिर वो राजनीति हो, मीडिया हो, बॉलीवुड या फिर खेल।

अब देखिए हाल ही में कितना बवाल मचा था आईपीएल की बोली पर। क्यों पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं लिए गए, चैंपियनों को दर किनार कर दिया, वगैरा वगैरा। पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा (बकौल पाकिस्तानी मीडिया और क्रिकेटर) सब की जुबान सिर्फ दो को ही कोस रही थी, एक आईपीएल(बकौल उनके कि जिसे भारत सरकार चला रही है) और दूसरा ललित मोदी। दहाड़े मार-मार कर कहा जा रहा था कि पाकिस्तानी आवाम, पाक सरकार, और खुद पाकिस्तानी क्रिकेटर और पड़ोसी देश को आघात पहुंचा है। कभी भी भारत के साथ कोई भी संबंध बढ़ाने की बात तो दूर संबंध रखा भी नहीं जाएगा (बात बेसर पैर की)।  

पर अब देखिए चार दिन बाद पैसे ने अपना जलवा दिखाया और फिर उन्हीं खिलाड़ियों के मुंह से अलग शब्दों की बौछार होने लगी है जो अब तक अपना अपमान मान कर भारत में ना खेलने का दम भर रहे थे। पीसीबी की माली हालत कितनी मजबूत है ये सारा क्रिकेट जगत जानता है। खाने के लिए दाने नहीं है और बातें गड़े हुए मुर्दे की कब्र के सामान खोखली, है कुछ नहीं पर घमंड में आंच ना आए।

एक बार बेइज्जती कराने के बाद भी ये नहीं सुधरे हैं। अब क्यों आफरीदी और तनवीर की जुबान पर ये जुमला आने लगा है कि ”we will forgive and play”। दिखादी ना अपनी औकात इन्होंने सिर्फ पैसे के लिए। क्योंकि वो बेहतर जानते हैं कि पैसा आईपीएल में बहुत है। इनके लिए ना बेइज्जती बड़ी है और ना ही देश। पैसा इनके लिए सबसे बड़ा है। और हमें इसे दोस्ताना समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।

आपका अपना
नीतीश राज

Saturday, January 23, 2010

’मेरी मर्जी’


सर, मेरे पास भी वो ही सामान है जो कि उस स्टॉल पर है। आपने मेरा सामान देखा, मुझसे बात की और फिर दूसरे स्टॉल पर जाकर सामान खरीद लिया। जबकि मेरा सामान उसके सामान से क्वालिटी में बेहतर है, फिर भी आपने ऐसा किया। आपने जानबूझकर मेरे साथ ये बुरा व्यवहार किया है। आप नहीं चाहते कि मैं ऊपर उठूं। आपने उस दुकान से ही ये सामान क्यों लिया, आपको मेरे से ही सामान लेना होगा, नहीं लोगे तो मैं ट्रेड फेयर के मालिकों से और अपनी सरकार से आपकी शिकायत करूंगा। आपने मेरे साथ गलत किया है?’
मेरी मर्जी, मेरा पैसा मैं चाहे किसी से सामान खरीदूं, तुम कौन? मेरी मर्जी!’

ऐसा वाक्या आपके साथ भी हुआ होगा, कई बार ऐसा होता है। पर इसका ये मतलब नहीं कि दाना-पानी लेकर कोई दूसरे के ऊपर चढ़ जाए। पर कुछ ऐसा ही आजकल देखने में आ रहा है स्पोर्टसमैनशिप के नाम पर आईपीएल में।

पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल 3 के लिए यदि नहीं लिया गया तो इसमें कहां से आगई दुश्मनी की बात। क्यों बार-बार सरहद के पार से ये बयान आ रहा है कि पाक खिलाड़ियों पर बोली ना लगाकर उनकी बेइज्जती की गई है। अब तो हर पाकिस्तानी का मानना है कि इसमें हिंदुस्तान का षडयंत्र है। भारत सरकार ही नहीं चाहती कि पाकिस्तानी खिलाड़ी भारत में आकर खेलें और पैसा कमाएं।

अब बात मैं तर्कों से करता हूं।

सबसे पहला तर्क, ऑस्ट्रेलिया खिलाड़ियों को भी नहीं लिया गया, उनकी बोली नहीं लगी तो क्या ऑस्ट्रेलियन भी ये बोलने लगें कि ये भारत सरकार की करनी धरनी है? ऑस्ट्रेलिया में भारतियों पर हमला होने के कारण टेनिस सितारों ने नाम वापस ले लिया। तो ये भी सरकार का ही फैसला होगा? जबकि हाल में जो शिवसेना ने धमकी दी उसके बाद ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी ऐसा मानते हैं कि भारत में खेलने में कोई हर्ज नहीं है। पर भारतीयों पर हो रहे हमले पर भारतीयों की प्रतिक्रिया को क्या ऑस्ट्रेलियन नहीं समझते होंगे। जब एक देश समझ रहा है तो दूसरा देश हमारा पड़ोसी मुल्क समझने में कोताही क्यों बरत रहा है। क्या पाकिस्तान के लोगों को ये पता नहीं होता कि भारत की राजनीति में क्या चल रहा है?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि 20-20 के चैंपियनों की बेइज्जती हुई है। पर ये बेइज्जती की किसने है? मेरा जवाब है खुद पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने अपनी बेइज्जती करवाई है?
क्या पाकिस्तानी खिलाड़ी या वहां कि आवाम ये नहीं जानती कि 26/11 का घाव अभी भी हरा है। फिर कैसे कोई भी फ्रेन्चाइजी ओनर उसी ट्राइडेंट होटल में बैठकर उन्हीं पाकिस्तानियों की बोली लगाता जिसके देश से आए लोगों ने इसी होटल को कुछ समय पहले कब्रगाह बना दिया था।

आईपीएल एक प्राइवेट संस्था है वो किसको रखेगी कब वेन्यू चेंज करेगी इसमें सरकार का कोई भी हस्ताक्षेप नहीं है। यदि ये छोटी सी बात पाकिस्तानियों की मोटी बुद्धि(जो कि उनके पास नहीं है) में नहीं आती तो इसमें कोई भी कुछ नहीं कर सकता। मेरी मर्जी मैं आपको लूं या ना लूं। इतना बड़ा आईपीएल सीजन है उसमें से कोई मजबूत खिलाड़ी नहीं पहुंचे तो उस टीम पर कितना फर्क पड़ेगा ये शायद दूर से हाथ सेकने वाले नहीं समझ सकते। उनको तो पैसा मिल जाता और फिर जो भी नुकसान होता फ्रेन्चाइजी को होता। क्या कोई भी पाकिस्तानी ये आश्वासन दे सकता है कि मार्च 13 तक भारत पर आतंकी हमला नहीं होगा। शायद कोई नहीं उनके हुक्मरान तक नहीं।

बिना किसी से पूछे आईपीएल ने अपना पहले मैच का वेन्यू चेंज कर दिया। क्या इसमें भी साजिश है नहीं। ये दिमाग है, दूरदर्शिता है।

तो क्यों वो खिलाड़ी इन सब कारणों को जानते हुए भारत में अपनी बेइज्जती करवाने आए? क्यों उन्होंने और पीसीबी ने एक बार भी नहीं सोचा कि ऐसा हो सकता है पर शायद मुझे लगता है कि उनकी बेइज्जती नहीं हुई उन्हें तो बख्स दिया गया वर्ना उन्हें तो इस से भी ज्यादा जल्लात सहनी पड़ती।

अंत में मेरी राय तो ये है कि जब तक संवाद ठीक नहीं हो जाते तब तक पाकिस्तानियों को भारत में आने से पहले सोचना चाहिए क्योंकि यहां पर कुछ भी उनके साथ घट सकता है और हो सके तो अभी नहीं आए तो बेहतर।

आपका अपना
नीतीश राज

Tuesday, September 29, 2009

भारत में पाकिस्तान से ज्यादा पाकिस्तानी रहते हैं।



बहुत सोचने के बाद तकरीबन दो दिन सोचने के बाद मैंने ये फैसला किया कि इस बात को सब के साथ शेयर करूं।

हमारे देश की किस्मत ही है कि यहां रहने वाले ही उसकी पीठ में खंजर भोंकते हैं। ये हमारे देश में रहने वाले कुछ लोगों की फितरत है कि जिस थाली में खाते हैं वो उसी थाली में छेद करते हैं।

याद आता है कुछ साल पहले तक जब भारत-पाकिस्तान का मैच हुआ करता था तो सड़कें खाली हो जाया करती थीं। लोग घरों में टीवी, रेडियो से चिपककर बैठ जाया करते थे कि भारत-पाक का मैच आ रहा है। सब दिल, जज्बे और ना जाने क्या-क्या दांव पर लगा देते थे। पर इमरान खान की टीम कपिल देव और सुनील गावस्कर की टीम पर अधिकतर भारी पड़ती थी। हमारी हार होती थी तो लोगों के घरों में खाना नहीं बनता था, टीवी फोड़ दिए जाते थे, कुछ को दिल का दौरा पड़ जाया करता था, कोई खुदकुशी कर लेता था। ये सारी घटनाएं तो मैंने देखी और सुनी हैं।

याद आता है कि जब भारत की हार होती थी तो दूर-दूर तक सन्नाटा छा जाता था। कॉलोनियां-बस्तियां-गांव सब चुप हो जाते थे। पर तब भी कुछ जगह पर कुछ ऐसे लोग होते थे जिनके कदम से हर एक भारतीय आगबबूला हो जाता था।

यहां भारत हारी और कुछ इलाकों से जहां पर भी उनकी बहुलता होती थी वहां से पटाखे फोड़ने की आवाज़ें आती थी। जीत को मनाने और सब को बताने का साधन पटाखों से बेहतर कुछ नहीं होता। पर ये क्या भारत में रहकर भी कुछ लोग हैं जो कि पाकिस्तान की तरफ हैं और भारत की हार पर जश्न मना रहे हैं।

26 को भारत-पाक का मैच हुआ। मैच को पाकिस्तान की तरफ से जंग की तरह ही खेला गया और जिस बात का दावा पाक टीम के कप्तान ने किया वो कर भी दिया। अपनी गलती हो या फिर जज्बे की कमी हो जो भी मानें पर हम हार गए। मैदान में किसी एक टीम की हार और जीत तो होगी ही। कभी हम कभी वो ये सिलसिला तो बदस्तूर चलता ही रहेगा। 26 को जब भारत पाक से मैच हारा तो हमारे घर के पास ही कुछ लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े और अपनी खुशी का इजहार किया। जिससे मैं हैरान-परेशान हूं।



क्या हर एक भारतीय को उस पाकिस्तानी की ललकार का जवाब देने के लिए नहीं खड़ा होना चाहिए। यदि मुट्ठी में कोई भी उंगली कम बंद हो तो वो मुट्ठी मजबूत नहीं रह जाती। वैसे ही गर एक भी भारतीय पाकिस्तानियों की तरह सोचता है तो मुट्ठी बंध ही नहीं पाएगी। और अगर कोई सोचता है तो बेहतर है कि वो भारत को घुन की तरह ना खाए जाकर पाकिस्तान में ही बसे अपने भाइयों के बीच



हर बार मुस्लिम होने पर परीक्षा क्यों देनी होगी? बहुत लोग ये सवाल पूछते हैं। हम तो कभी उनको पराया नहीं समझते, हम हर उस शख्स को पराया समझते हैं जो कि हमारे देश के खिलाफ हो फिर चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो, अंग्रेज हो, ईसाई हो, सिख हो। क्यों कुछ लोग ऐसे हैं जो कि भारत की हार पर खुश होते हैं? तो उन खुश होने वाले लोगों पर तो प्रश्नचिन्ह बिल्कुल जायज है।

ऐसे लोग मेरे देश मे गर हैं तो बेहतर है कि वो निकल जाएं और गर नहीं जा सकते तो बेहतरी इसी में है कि दशहरे के मौके पर रावण के साथ अपने दुर्भाव जला दें। यदि नहीं जला सकते तो रावण के साथ खुद जल जाएं। क्योंकि कोई भी भारतीय भारत की हार पर पटाखे बर्दाश्त नहीं कर सकता।

आपका अपना
नीतीश राज



Monday, September 14, 2009

क्यों नहीं 26/11 मुंबई हमले पर पाक मंत्री की ललकार के जवाब में वन-टू-वन करते पी चिदंबरम।


हाल ही में पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलेआम भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम को ओपन डिबेट के लिए ललकारा। मुंबई हमलों पर बोलते हुए रहमान मलिक ने साफ तौर पर ये कहा कि 26/11 के मसले पर भारत पाकिस्तान पर दोष मढ़ना बंद करे। सबसे बड़ी बात उसमें ये कही गई कि भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम के साथ वो भारत में कहीं पर भी, पाकिस्तान या फिर किसी भी मुल्क में ये डिबेट कर सकते हैं।

चिदंबरम को चैलेज देने के अलावा भी रहमान मलिक सच से पर्दा उठाते ही रहे। जैसे, भारत ने मुंबई हमलों पर 9 फरवरी को भेजी हमारी दरख्वास्त का जवाब 20 जून को जाकर दिया जो कि बहुत देर से था और जवाब मराठी में भेजा। (कोई भी राष्ट्र किसी को जवाब अपनी क्षेत्रिय भाषा में क्यों देगा, ये इल्जाम कितना सच है ये तो मलिक जी ही बेहतर जानते हैं।) भारत ने चार्जशीट दाखिल करने में 90 दिन से भी ज्यादा का वक्त लिया वहीं हमने महज 76 दिन में इस कवायद को पूरा कर लिया। भारत कभी किसी को मास्टरमाइंड बताता है तो कभी किसी और को। हमने जकीउर रहमान लखवी को गिरफ्तार किया तो भारत हाफिज सईद को मास्टरमाइंड बताने लग गया। (क्योंकि दोनों ही इस साजिश में शामिल थे।) वहीं भारत समझौता एक्सप्रेस मामले पर सबूत साझा नहीं कर रहा जो कि बहुत अहम है। आप हमारे कोर्ट का सम्मान करो और हम आपके कोर्ट का सम्मान तो करते ही हैं। इस पर कितना सच था और कितनी बातों पर सच का पर्दा पड़ा रहा, ये हम सब बेहतर जानते हैं।

ये सारी बातें तब कही गई हैं जब कि भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिका दौरे पर थे और अमेरिका को पाक की नियत से रूबरू कर रहे थे। पाक मीडिया ने दोनों खबरों को खूब उछाला और साथ ही भारतीय मीडिया ने भी इन खबरों को दिखाया। फिर क्या वजह है कि इस बारे में पी चिदंबरम की तरफ से या फिर भारत की तरफ से कोई भी जवाब नहीं आया। क्यों?

सबसे ज्यादा बात जो खल रही है कि एक तरफ तो कोई ये कह रहा है कि कहीं भी बात करने के लिए तैयार हैं और हम उस पर प्रतिक्रिया भी नहीं दे रहे। क्यों? कब तक पाकिस्तान गलती करते हुए भी हर बात पर हेकड़ी जमाता रहेगा। गलती करके हमें ही ललकारता रहेगा और हम शांत रहकर उन बातों का जवाब बहुत गहन विचार करके ही देते रहेंगे। कब तक इन मामलों पर भी राजनीति होती रहेगी। क्यों सामने आकर कोई भी इस बारे में जवाब नहीं दे रहा है।
अभी थोड़े दिन पहले ही भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भारत को पाकिस्तानी तालिबान की तरफ से मुंबई हमलों की तर्ज पर हमले की आशंका से आगाह किया था। उस पर रहमान मलिक का जवाब था,
"There was a statement from the PM of India that they knew there might be Bombay-like attacks replicated in India by the Pakistani Taliban. Prime Minister Sir, you are the chief executive, whatever information you have, it must have come from your Intelligence agencies, why didn't you share it with us? Why were you holding this information before the Bombay attacks? Why didn't you tell us? We are two countries we could have investigated it together. I am still ready, let’s meet."

रहमान मलिक की इतनी बातों के बाद कोई भी ये सोचने पर मजबूर हो सकता है कि भारत सिर्फ इल्जाम लगाता रहता है लेकिन कार्रवाई करने से बचता है। इसका मतलब ये हुआ कि भारत गुमराह करने की पॉलिसी अपना रहा है। पर ये पूर्ण सत्य नहीं है।

भारत कैसे अपने इंटैलिजेंस सीक्रेट किसी दूसरे देश और वो भी पाकिस्तान जैसे दुश्मन राष्ट्र के साथ शेयर कर सकता है। कैसे-कैसे करके हमारी इंटैलिजेंस एजेंसी खबरों को इक्ट्ठा करती हैं उस पर यदि भारत ये बात भी शेयर करने लग गया तो शायद जो लोग इस काम में लगे हुए हैं उनकी जान सलामत नहीं रहे। लेकिन हां, भारत ये कर सकता था कि उस तथ्यों के पुलिंदों में से कुछ तथ्यों को पाकिस्तान भेज कर ये साबित जरूर कर सकता था कि हां हमारे पास एविडेंस है, सबूत हैं।

जानते हैं कि पाक उस पर कार्रवाई नहीं करता और गर करता भी तो पहले से ही वहां से आतंकी संगठनों को हटा दिया गया जाता। आतंकवादियों को हटाने या पकड़ने के लिए पाक का एक भी सिपाही मारा नहीं जाता। आर्मी इधर होती है तो बम उधर फटता है। क्या इस के पीछे की नीतियां समझ में नहीं आती?

चीन से मिलकर पाकिस्तान की भारत के ऊपर अपना रुतबा कायम करने की कोशिश असर नहीं दिखा पाएगी। माना कि भारत हथियारों और ताकत के मामले में चीन से पीछे है पर हथियारों कि गुणवत्ता में पीछे नहीं है। भारत के पास लेटेस्ट तकनीक के हथियार हैं और वही चीन के पास हथियारों की तादाद ज्यादा है पर वो बहुत पुराने हैं। भारत का एक हथियार उनके चार के बराबर है। पर ये सत्य है कि कई जगहों पर हम चीन के पासंग भी नहीं है। जहां तक पाकिस्तान की बात की जाए तो भारत उनसे हर क्षेत्र में कहीं ज्यादा आगे है।

ध्यान तो इस बात का रखना है कि भारत में मौजूद गद्दार भारत की जमीन को नुकसान नहीं पहुंचा सकें। साथ ही उन अलगाववादियों को भी ये सोचना चाहिए कि चाहे चीन दागे या फिर पाकिस्तान, गोली, बारूद और बम की आंखें नहीं होती वो दोस्त और दुश्मन में फर्क करना नहीं जानती। यदि भारत की जमीं पर बम फटेगा तो यहां मौजूद दोस्त-दुश्मन सब के शरीर छलनी होंगे। बेहतर है कि भारत को एकजुट रहने दो और खुद भी मिल कर रहो और दुश्मनों का मिलकर मुकाबला करो।

आपका अपना
नीतीश राज

Thursday, June 4, 2009

भारत ने पाकिस्तान को धो डाला, 20-20 में जमाई पाक पर जीत की हैट्रिक

पूर्व टी-20 चैंपियन भारत अपना पहला अभ्यास मैच न्यूजीलैंड से हार चुका था। लेकिन दूसरे अभ्यास मैच में अभ्यास अच्छा हुआ। पाकिस्तान के साथ इस अभ्यास मैच में फील्डिंग छोड़ कर भारत का स्तर एक चैंपियन की तरह ही दिखा।
पाकिस्तान ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। मैच की शुरुआत में तो लगा कि पाकिस्तान इस बार कुछ गजब कर के ही मानेगा। लेकिन पहले ही ओवर में प्रवीण कुमार ने ओपनर हसन को बिना खाता खोले क्लीन बोल्ड कर दिया। भारत के प्रशंसकों में खुसी की लहर दौड़ गई। पर दूसरे ओवर से चौथे ओवर तक खुश होना पाकिस्तान के खेमे में लिखा था। कामरान अकमल के साथ 17 साल के अहमद शहजाद ने हर ओवर की गेंदों को बाउंडरी पार पहुंचाना शुरू कर दिया। देखते-देखते महज चार ओवर में पाक का स्कोर 45 पहुंच गया।
अब खुश होने की बारी भारत की थी। कामरान अकमल को रैना ने शानदार फील्डिंग का नमूना दिखाते हुए रन आउट कर दिया। पांचवें ओवर में ही ईशांत की आखरी गेंद पर शहजाद ने लंबी शॉट खेलने में चूक कर दी और फिर रैना ने एक आसमान चूमती गेंद को लपककर पाक खेमें में सनसनी फैला दी। पर अभी तो कहर बाकी था। अगले ओवर में पठान की पहली ही गेंद पर कप्तान धोनी ने शानदार कैच लपककर शाहिद आफरीदी को बिना खाता खोले पवैलियन लौटा दिया।
कप्तान यूनिस खान और शोहेब मलिक ने टीम को संभालने की कोशिश की पर मलिक ने ओझा की एक गेंद में चूक कर दी और धोनी ने कोई गलती नहीं की। यूनिस खान ने कुछ शानदार शॉट खेले पर हरभजन सिंह की फिरकी में फंस कर वो क्रीज से नहीं निकलना चाहते हुए भी आगे निकल आए और धोनी ने वापसी का मौका नहीं दिया। मिसबाह और यासिर अराफात ने मिलकर स्कोर को 113 से 158 तक पहुंचा दिया वो भी सिर्फ 25 गेंदों में। भारत के सामने जीत का लक्ष्य था 159।
भारत बिना सहवाग के खेल रही थी। तो ओपनिंग की बागडोर संभाली रोहित शर्मा और गंभीर ने। शुरूआत से ही दोनों ने हाथ दिखाने शुरू कर दिए। गेंदबाज ये समझने में दिक्कत महसूस करने लगे कि गेंद डालें तो कहां? इस मैच में रोहित शर्मा ने ही गेंद को हवा में बाऊंड्री के पार पहुंचाया। रोहित ने महज 53 गेंदों में 80 रन बनाए जिसमें 9 चौके और दो शानदार छक्के शामिल थे। आमेर ने शहजाद के हाथों 16वें ओवर में भारत के 140 के आंकड़े पर रोहित को कैच आउट करवा दिया। तब भारत को जीत के लिए 18 रन की दरकार थी। जिसे गंभीर और धोनी ने मिलकर 18 गेंद रहते ही हासिल कर लिया। गंभीर ने 5 चौकों की मदद से 47 गेंद पर 52 रन बनाए और वो धोनी के साथ अंत तक नाबाद रहे। आखिर एक ओपनर तो फॉर्म में लौटा।
20-20 फॉर्मेट में ये भारत की पाकिस्तान पर लगातार तीसरी जीत थी।

आपका अपना
नीतीश राज

Monday, May 11, 2009

फिर वहीं आगए-अब करो या मरो

मलेशिया में अजलान शाह कप में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। वहीं मलेशिया में ही एशिया कप में तीन बार की चैंपियन पाकिस्तान ने उसका बदला उतारते हुए पिछली एशिया चैंपियन भारत को पहले ही मैच में 3-2 से मात दे कर अचरज में डाल दिया। अब भारत को चीन से किसी भी हाल में जीत दर्ज करनी ही होगी वर्ना सेमीफाइनल में जगह नहीं हाथ से निकल जाएगी। भारत की हॉकी टीम के लिए फिर स्थति करो या मरो की होगी। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान से पहले मैच में बराबर पर चुकी चीन के लिए मैच को ड्रॉ करने से भी काम चल जाएगा और वो ड्रॉ के साथ भी सेमीफाइनल में जगह बना जाएगी।

भारत-पाकिस्तान का मैच हमेशा से ही बड़ा कांटे का होता है। और इस बार मुकाबला था दो दिग्गजों का। दुनिया के दो सर्वश्रेष्ठ पेनल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट भारत की तरफ से संदीप सिंह और पाकिस्तान की तरफ से सोहेल अब्बास। अजलान शाह में भारत की तरफ से किए 11 गोलों में से 8 गोल संदीप सिंह ने किए थे। पर इस बार हार संदीप सिंह के हाथ लगी और जीत सोहेल अब्बास के।

शुरुआत से ही मैच में दोनों टीमों ने एक दूसरे पर हमले करने शुरु कर दिए। गेंद कभी इस पाले में तो कभी उस पाले में। मैच देख रहे लोगों को मैच की रफ्तार ने रोमांच से भर दिया। दोनों टीमों से आज भी रफ्तार के मामले में कोई बाजी नहीं मार सकता। पर मैच में शुरू से ही पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहा। चौथे(4) मिनट में ही पाकिस्तान की तरफ से गोल दाग दिया गया। अंपायर ने गोल को गलत ठहराते हुए गोल को नकार दिया और फैसला भारत के पक्ष में दिया। 15वें मिनट में ही प्रभजोत सिंह ने भारत को बढ़त दिला दी। पर हसीम खान ने 33वें और रेहान बट्ट ने ३६वें मिनट में पाक को 2-1 की लीड दिला दी। फिर भारत की तरफ से राजपाल सिंह ने 45वें मिनट में गोल दागकर स्कोर बराबर कर लिया। मैच खत्म होने से 16 मिनट पहले पाकिस्तान के ड्रेग फ्लिकर सोहेल अब्बास ने गोल दागकर अपनी टीम को 3-2 से जीत दिला दी। अंत के 10 मिनट में भारत को 3 पेनल्टी कॉर्नर मिले पर संदीप सिंह अपना जादू नहीं बिखेर पाए।

इसी के साथ भारत-पाकिस्तान के बीच जीत का फासला और भी बढ़ गया। अभी तक दोनों देशों के बीच 139 मैच हुए हैं और पाकिस्तान ने 73 और भारत ने 43 मुकाबले जीते हैं वहीं 23 में कोई भी नतीजा नहीं निकला है।

अब मंगलवार को दोपहर 3 बजे भारत को एशिया कप में बने रहने के लिए चीन को मात देनी ही होगी। हमारी दुआ टीम के साथ है।

आपका अपना
नीतीश राज

Thursday, December 25, 2008

कब तक डरपोक बने रहेंगे हम? हर दिन के मरने से तो बेहतर है कि एक बार ही मर जाएं।

जब-जब भारत पर आतंकी हमला हुआ है तब-तब भारत की सरकार ने बड़ा ही कड़ा रुख इख्तियार किया है। हर बार पाकिस्तान की तरफ ही निशाना रहा। भारत की तरफ से सबूत भी पाक सरकार को दिए गए। हर बार भारत के कड़े रुख के बाद पाक का रवैया क्या रहा? क्या पाकिस्तान ने कभी भी इस बात को स्वीकार किया कि वो आतंकवादी हमला पाकिस्तान की जमीन से किया गया। नहीं, भारत के हर कड़े रुख का जवाब पाकिस्तान ने और भी तीखे तेवरों में दिया। कोई भी कुछ कहता रहा, पर पाकिस्तान ने किसी की भी नहीं सुनी। भारत ने पूरे विश्व का समर्थन हासिल किया लेकिन पाकिस्तान का रवैया उतना ही सख्त रहा, उसने कभी नहीं माना कि आतंकियों को पाक जमीन मुहैया है।
भारत की संसद पर हमला हुआ, विमान अपहरण कांड और दिल्ली, बैंगलोर, राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश, भारत के हर प्रदेश पर संकट के काले बादल अपना क़हर बरपाते रहे। भारत को सबूत के तौर पर कुछ आतंकवादी मिलते रहे लेकिन कभी भी पाकिस्तनी सरकार ने ये कबूल नहीं किया कि उनकी जमीन ही है दहशतगर्दों की पनाहगाह। पाक अधिकृत कश्मीर में तो आतंकवादियों के गढ़ के इतने पुख्ता सबूत मिले जिसे की दरकिनार नहीं किया जा सकता था पर पाकिस्तानी सरकार ने इसे कभी नहीं माना और आज भी वहां कई आतंकवादी संगठन अपना गढ़ बनाए बैठे हैं और उनकी मदद कर रहा है आईएसआई। जिसके पुख्ता सबूत बकौल भारत सरकार भारत के पास हैं और कुछ तो पाक और यूएन को भी दिए जा चुके हैं।
करगिल, क्या किसी को याद नहीं है, अभी हम नहीं भूले हैं, पाकिस्तान की सरकार पर करगिल करवाने का इल्जाम लगा। जब तक कि पाक सरकार पर काबिज नवाज शरीफ कुछ कर पाते तब तक उन्हें ही देश से ऱुखसत करवा दिया गया। आज भी नवाज शरीफ इस बात से इनकार नहीं करते कि करगिल पाकिस्तान पर काबिज समानान्तर सरकार की ही देन थी जिसे कि उस समय के जनरल परवेज मुशर्रफ चला रहे थे। वो दौर था जब कि भारत के राजनीतिक और आपसी संबंध पाकिस्तान के साथ काफी सौहार्दपूर्ण हो गए थे। लेकिन ठीक इसी दौर के बाद पाकिस्तान को एक ऐसा जनरल कम नेता मिला जो कि चाणक्य की तरह सोचता था। उसने कई मामलों में भारत के साथ ऐसी कूटनीति खेली कि भारत के चाणक्य कुछ कर नहीं सके। हमारे देश में आकर ही पाक सरकार का वो जनरल अपनी अधिकतर बातें मनवा के चला गया। आगरा वर्ता के असफल होने का ठीकरा भी भारतीय सरकार के ऊपर ही फोड़ दिया गया। जनरल परवेज मुशर्रफ ने यूएन तक में जाकर हमारे कई तथ्यों को दरकिनार कर दिया और साथ ही पीठ में छुरा भोंकने से भी वो बाज नहीं आया।
अब बात आती है कि घुसपैठ तो पहले भी भारत की लगी पाक सीमा से भारत की जमीन पर होती ही रही हैं। लेकिन इस बार मुंबई में फिदाइनों ने मासूम जनता पर क़हर बरपा दिया। इस हमले ने भारत की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ पूरे देश को दहशत से भर दिया। २०० से ज्यादा लोग मारे गए उसमें २० से ज्यादा विदेशी भी थे। पूरे विश्व में इस हमले की निंदा हुई। लेकिन पहली बार किसी फिदाइन हमलावर को जिंदा पकड़ा जा सका। उस आतंकवादी अजमल आमिर कसाब ने ये कबूला कि वो पाकिस्तानी है। आतंकवादी के कबूलनामें के बाद इस समय की सरकार को बाहर से सहयोग देने वाले नवाज शरीफ ने भी ये मान लिया कि कसाब पाकिस्तानी है। पाक मीडिया की जुबानी पूरी दुनिया ने ये जाना कि खुद कसाब के पिता और उस गांव फरीदकोट के लोगों ने ये माना कि कसाब पाकिस्तानी है पर पाकिस्तान को अब भी सबूत की दरकार रही।
भारत एक तरफ डर-डर कर ये बात कहता रहा कि भारत के सारे विकल्प खुले हुए हैं। भारत के विदेश मंत्री और पीएम ने कहा कि हम तो आतंकवाद को ख़त्म करने की बात कर रहे हैं। पाकिस्तान अपनी जमीन से जितनी जल्दी हो आतंकवादियों को पनाह देना बंद करे। दूसरी तरफ पीएम ने साफ शब्दों में कहा कि भारत का मुद्दा युद्ध नहीं, आतंकवाद है। पर दूसरी तरफ पाकिस्तान डंके की चोट पर कार्रवाई करने से मना कर रहा है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ परवेज कयानी ने तो यहां तक साफ कह दिया कि
‘पाकिस्तान की आर्मी पूरी तरह तैयार है और यदि भारत कोई भी कदम उठाता है तो भारत के हर कदम का जवाब एक मिनट के अंदर दे दिया जाएगा।’
जहां भारत सूझबूझ का परिचय दे रहा है वहीं पाकिस्तान अकड़ और अड़ियल रवैया अपना रहा है। पाकिस्तान ने अपने रैंजर्स राजस्थान और गुजरात सीमा से हटा कर वहां पर फौज की तैनाती कर रहा है। जबकि पाकिस्तान के इस कदम को भारत रुटीन कार्रवाई मान कर अभी अपनी सेना की तैनाती पर विचार कर रहा है। जबकि भारत की तरफ से एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं। सेना को अलर्ट पर रख दिया गया है लेकिन सीमा पर अभी भी बीएसएफ ही है।
मुंबई हमारे देश का हिस्सा है जब मुंबई पर हमला हुआ तो बैकफुट पर भारत क्यों है। कब तक हम ये सोचते रहेंगे कि अमेरिका हस्ताक्षेप करेगा तभी कोई फैसला होगा। क्या जब सबूत हमारे पास हैं तो क्या हम कार्रवाई नहीं कर सकते। पाकिस्तान के ऊपर जब अमेरिका को शक हुआ था तो उनके घर में घुसकर अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की थी। मुशर्रफ को पूरा सहयोग देना पड़ा था, पाक के जितने कठमुल्ला थे सब मियां मुशर्रफ के खिलाफ हो गए थे। लेकिन अमेरिका ही आकर जज की भूमिका क्यों निभाए। हम फैसले बाद में लेते हैं अब जब कि पाकिस्तान पूरे एक्शन में आ गया है तो सरकार भी अपनी सीमा पर सुरक्षा तैनात करना शुरू कर देगी। ये ही समय होता है जब कि भारत की सरजमीं पर आतंकवादी सबसे ज्यादा आते हैं उन बर्फीली चोटियों से जो कि भारत का मस्तक है।
मेरा भारत महान, हम आजाद हैं, मेरे देश की तरफ जो भी निगाह उठा कर देखेगा हम उनकी आंखें नोच लेंगे। असल मायने में हम बस कहते रहते हैं, डरपोक हैं हम, डरते हैं हम, हर दिन हम जीते हैं पर डरते हुए, कब कोई गोली हमें मौत के आगोश में डाल दे। मौत से भरी जिंदगी से हमें शिकवा नहीं पर एक दिन में ये फैसला नहीं कर सकते कि इस जिल्लत से भरी जिंदगी नहीं चाहिए। अरे आज हम खुश नहीं हैं कल हमारे बच्चे खुश नहीं रहेंगे परसों उनके बच्चे। क्या करना है इस बात का फैसला भी हम अपने अनुसार नहीं लेते। क्यों आखिर क्यों? हम दूसरों की तरफ नजरें गड़ाए बैठे रहते हैं कि या तो वो आकर फैसला कर दे या फिर जब तक दूसरा कोई हरकत नहीं करेगा तब तक हम कोई हल्ला नहीं बोलेंगे। और जब हल्ला बोलेंगे और पैर पर गिरकर माफी मांगने लगेगा तो फिर हमसे बड़ा दानवीर इस धरती पर कोई नहीं। १९७१ में यदि बांग्लादेश बना तो हमारे कारण लेकिन पाकिस्तानियों के घर में घुसकर उन्हें हमने औकात दिखाई थी। पर जंग जीतने के बाद भी भारत ने क्या किया। वो जो भारत और पाकिस्तान के बीच की जड़ थी उस को खत्म नहीं किया। हम जंग जीत चुके थे तब भी हमने पीओके वापस नहीं लिया। क्यों, क्यों नहीं लिया आज वहां पर आतंकवादियों ने हमारी ही जमीन पर आतंक के कैंप लगा रखे हैं। अरे, मुंबई मेरा अपना है, मेरे देश का हिस्सा है, करगिल हमारा है, उसपर किसी ने आंखें उठाई थी, तुमने आंखें तो नोच ली पर ये क्या साथ में उन आंखों को ठीक करने के लिए दवा दारू सब कुछ खुद मुहैया करा दिया। मैंने देखी थी लाशें, जब जवानों को ताबूत में से निकाला जाता था और पूरा गांव दहाड़ें मार मारकर रोता था उस सफेद पाउडर से लिपे बिना हरकत के जिस्म को।
भारत के साथ-साथ अमेरिका तक ने भी ये कह दिया कि पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवादी वारदातें बंद करे। सख्त बात कोई भी देश नहीं कर रहा है। साथ ही विश्व ये चाहता है कि ये पड़ोसी देशों का आपसी मामला है और हो सके तो दोनों देश ही मिलकर इस मसले को सुलझाएं। सभी ये जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु सक्षम देश हैं और यदि लड़ाई हुई तो नुकसान विश्व का होगा। इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान ये गेम खेलता है, जब भी पाक पर आतंकियों को पनाह देने की बात आती है तब ही वो सीमा पर ऐसा माहौल बना देता है कि जिससे लगे कि तनावपूर्ण स्थति बन चुकी है। ये भारत को समझना होगा कि पाकिस्तान हर बार इसी गेम प्लान के अंतर्गत काम करता है। भारत अब तक बहुत संयम का परिचय दे चुका है लेकिन हमारे संयमपन को हमारी कायरता ना समझा जाए, हम बार-बार ये बात कह चुके हैं लेकिन हमने कभी भी ये दिखाया नहीं है। देश का हर बाशिंदा इस खौफ के साए से अपने आप को निकालना चाहता है। हमारा साथ हमारी सरकार के साथ है, हम एक जुबान में कहते हैं कि अब कहने का नहीं करने का वक्त आ गया है।

आपका अपना
नीतीश राज

Sunday, December 21, 2008

सबूत पे सबूत मांगते हो, कार्रवाई करोगे या फिर...।

सबूत, सबूत, सबूत, सबूत मांगता है पाकिस्तान। कितने सबूत चाहिए पाकिस्तान को और किस बात के सबूत चाहिए। अब क्या आकाशवाणी होगी कि पाकिस्तान ही है जिम्मेदार। वो ही है मुंबई के २०० लोगों का हत्यारा और करोड़ों लोगों के दिल को दुखाने और दहशत भरने का जिम्मेदार। क़ातिल ने खुद मान लिया कि हां मैंने ही क़त्ल किया है। करोड़ों लोगों के सामने उसने नरसंहार किया। ऐसा नहीं कि तुम(पाक) नहीं देख रहे थे उस हत्याकांड को। पाक को भी पता चल रहा था कि हां ये उनके ही आदमी है लेकिन कबूल कर तो वो सकता ही नहीं।
मुंबई हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को सबूत दिए साथ ही २० मोस्ट वांटेड लोगों की लिस्ट भी थमा दी। पाक ने तुरंत इस बात से मना कर दिया कि उनके देश में मोस्ट वांटेड नहीं हैं। साथ ही यदि होंगे भी तो हम भारत को नहीं सौपेंगे, जो भी करना होगा हम पाकिस्तान की अदालत में ही करेंगे। मतलब उनका भी साफ था कि पाकिस्तान फिर से अंग्रेजों के शासनकाल में लौट जाएगा जहां पर हर कानून उनका अपना होता था, जज से लेकर पैरोकार तक। भारत ने वो ही सबूत यूएन के पास भी भेजे थे। यूएन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तुरंत पाक को आगाह किया और पाक के एक आतंकवादी संगठन पर कार्रवाई होगई। फिर पाक किस बात के सबूत मांग रहा है। जब एक तरफ तो हमारे दिए हुए सबूत पर कार्रवाई कर रहा है तो फिर किस बात के सबूत।
दूसरी तरफ जब कसाब ने ये खुद कबूल किया है कि वो पाकिस्तानी है और साथ ही पाक के फरीदकोट का रहने वाला है तो फिर भी पाकिस्तान को भरोसा नहीं हो रहा है। चलो भई कसाब को हमने और हमारी पुलिस ने खूब पीटा और फिर उससे जबर्दस्ती ये लिखवाया और बुलवाया जा रहा है तो चलो कसाब की बात भी छोड़ देते हैं।
पाकिस्तान के फरीदकोट का रहने वाला एक शख्स जो कि अपना नाम आमिर बताता है उसने बोला है कि टीवी पर दिखलाए जाने वाला आतंकवादी जिसने की मुंबई में नरसंहार किया वो उसका ही बेटा है। उस पिता ने तो यहां तक कहा कि वो कई दिन तक ये सोचते रहे कि कैसे कबूल करें कि अजमल आमिर कसाब उनकी ही औलाद है।
फरीदकोट के इस शख्स को रातों रात कहां गायब कर दिया जाता है कि पता ही नहीं चलता। दूसरी तरफ बीबीसी के संवाददाता जब वहां जाकर तहकीकात करता है तो उसे कसाब के घर सादी ड्रेस में पुलिस का पहरा दिखता है। पुलिस का पहरा क्यों? कोई जवाब देने के लिए। फिर उस रिपोर्टर को वहां से चले जाने के लिए कहा जाता है।
पाकिस्तान का नेशनल टीवी डॉन, एक स्टिंग ऑपरेशन करता है वो भी कसाब के गांव का। कैमरे पर तो नहीं पर हिडन कैमरे पर सभी लोगों ने कसाब की असलियत खोल दी।
अब पाकिस्तान की दो ऐसी शख्सियत ये बोल रही हैं कि अजमल आमिर कसाब पाकिस्तानी है। नवाज शरीफ ने एक पाक टीवी को दिए इंटरव्यू में ये साफ साफ कह दिया कि कसाब पाकिस्तानी है और जरदारी इस सच को सामने आने देना नहीं चाहते। साथ ही पाकिस्तान में इस सच को कबूल करने वाले तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन सामने लाने वाला नहीं। नवाज शरीफ ने ये भी कहा कि खुद नवाज ने इस बात का पता लगाया है कि फरीदकोट का ही रहने वाला है कसाब और उसका परिवार भी वहीं रहता है और साथ ही उसके परिवार पर हर समय पेहरा है। सीधे उन्होंने ये बात कही है कि यदि कसाब पाकिस्तानी नहीं है तो फरीदकोट में इतनी सुरक्षा क्यों है।
अब पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष असमा जहांगीर ने ये माना है कि पाकिस्तान का ही है कसाब। साथ ही उन्होंने ये भी माना कि बेहतर हो कि पाकिस्तान सीधे-सीधे इस बात को मान ले और फिर क्या अब भी सबूत की जरूरत है पाकिस्तान को, ये असमा जहांगीर ने कहा।
पाकिस्तान और पाक मीडिया इस बात को कहीं और से जोड़ कर देख रहे हैं। पाक के मैरियट होटल को उड़ाने के अंदाजे से आरडीएक्स से भरा ट्रक होटल से टक्करा दिया जाता है वहां पर इस बात को भारत की तरफ से कार्रवाई माना जा रहा है। पाक मीडिया और विश्लेषक भी जरदारी राग अलापने में लगे हुए हैं। भारत को इस बार कड़ा कदम उठाना होगा।
कहीं से भी छोटी से भूल भारत-पाक को युद्ध की ओर लेजा सकती है। दोनों देशों को बचाना तो इस युद्ध से ही है क्योंकि अलगाववादी ये ही तो चाहते हैं।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”