"MY DREAMS"
मेरे सपने मेरे अपने हैं, इनका कोई मोल है या नहीं, नहीं जानता, लेकिन इनकी अहमियत को सलाम करने वाले हर दिल में मेरी ही सांस बसती है..मेरे सपनों को समझने वाले वो, मेरे अपने हैं..वो सपने भी तो, मेरे अपने ही हैं...
आजकल ये बहुत देखने में आ रहा है कि लोग पैसे के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। कुछ भी मतलब कुछ भी, शायद सब समझ गए होंगे कि इस कुछ भी का क्या मतलब होता है। पहले मैं सोचता था कि ये पैसा तो सिर्फ कॉरपोरेट कल्चर वालों को ही अपने इशारे पर नचाता है। पर धीर-धीरे मेरी जानकारी में इजाफा हुआ कि नहीं ये तो हर जगह बॉस है। चाहे फिर वो राजनीति हो, मीडिया हो, बॉलीवुड या फिर खेल।
अब देखिए हाल ही में कितना बवाल मचा था आईपीएल की बोली पर। क्यों पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं लिए गए, चैंपियनों को दर किनार कर दिया, वगैरा वगैरा। पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा (बकौल पाकिस्तानी मीडिया और क्रिकेटर) सब की जुबान सिर्फ दो को ही कोस रही थी, एक आईपीएल(बकौल उनके कि जिसे भारत सरकार चला रही है) और दूसरा ललित मोदी। दहाड़े मार-मार कर कहा जा रहा था कि पाकिस्तानी आवाम, पाक सरकार, और खुद पाकिस्तानी क्रिकेटर और पड़ोसी देश को आघात पहुंचा है। कभी भी भारत के साथ कोई भी संबंध बढ़ाने की बात तो दूर संबंध रखा भी नहीं जाएगा (बात बेसर पैर की)।
पर अब देखिए चार दिन बाद पैसे ने अपना जलवा दिखाया और फिर उन्हीं खिलाड़ियों के मुंह से अलग शब्दों की बौछार होने लगी है जो अब तक अपना अपमान मान कर भारत में ना खेलने का दम भर रहे थे। पीसीबी की माली हालत कितनी मजबूत है ये सारा क्रिकेट जगत जानता है। खाने के लिए दाने नहीं है और बातें गड़े हुए मुर्दे की कब्र के सामान खोखली, है कुछ नहीं पर घमंड में आंच ना आए।
एक बार बेइज्जती कराने के बाद भी ये नहीं सुधरे हैं। अब क्यों आफरीदी और तनवीर की जुबान पर ये जुमला आने लगा है कि ”we will forgive and play”। दिखादी ना अपनी औकात इन्होंने सिर्फ पैसे के लिए। क्योंकि वो बेहतर जानते हैं कि पैसा आईपीएल में बहुत है। इनके लिए ना बेइज्जती बड़ी है और ना ही देश। पैसा इनके लिए सबसे बड़ा है। और हमें इसे दोस्ताना समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।
’सर, मेरे पास भी वो ही सामान है जो कि उस स्टॉल पर है। आपने मेरा सामान देखा, मुझसे बात की और फिर दूसरे स्टॉल पर जाकर सामान खरीद लिया। जबकि मेरा सामान उसके सामान से क्वालिटी में बेहतर है, फिर भी आपने ऐसा किया। आपने जानबूझकर मेरे साथ ये बुरा व्यवहार किया है। आप नहीं चाहते कि मैं ऊपर उठूं। आपने उस दुकान से ही ये सामान क्यों लिया, आपको मेरे से ही सामान लेना होगा, नहीं लोगे तो मैं ट्रेड फेयर के मालिकों से और अपनी सरकार से आपकी शिकायत करूंगा। आपने मेरे साथ गलत किया है?’
‘मेरी मर्जी, मेरा पैसा मैं चाहे किसी से सामान खरीदूं, तुम कौन? मेरी मर्जी!’
ऐसा वाक्या आपके साथ भी हुआ होगा, कई बार ऐसा होता है। पर इसका ये मतलब नहीं कि दाना-पानी लेकर कोई दूसरे के ऊपर चढ़ जाए। पर कुछ ऐसा ही आजकल देखने में आ रहा है स्पोर्टसमैनशिप के नाम पर आईपीएल में।
पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल 3 के लिए यदि नहीं लिया गया तो इसमें कहां से आगई दुश्मनी की बात। क्यों बार-बार सरहद के पार से ये बयान आ रहा है कि पाक खिलाड़ियों पर बोली ना लगाकर उनकी बेइज्जती की गई है। अब तो हर पाकिस्तानी का मानना है कि इसमें हिंदुस्तान का षडयंत्र है। भारत सरकार ही नहीं चाहती कि पाकिस्तानी खिलाड़ी भारत में आकर खेलें और पैसा कमाएं।
अब बात मैं तर्कों से करता हूं।
सबसे पहला तर्क, ऑस्ट्रेलिया खिलाड़ियों को भी नहीं लिया गया, उनकी बोली नहीं लगी तो क्या ऑस्ट्रेलियन भी ये बोलने लगें कि ये भारत सरकार की करनी धरनी है?ऑस्ट्रेलिया में भारतियों पर हमला होने के कारण टेनिस सितारों ने नाम वापस ले लिया। तो ये भी सरकार का ही फैसला होगा?जबकि हाल में जो शिवसेना ने धमकी दी उसके बाद ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी ऐसा मानते हैं कि भारत में खेलने में कोई हर्ज नहीं है। पर भारतीयों पर हो रहे हमले पर भारतीयों की प्रतिक्रिया को क्या ऑस्ट्रेलियन नहीं समझते होंगे। जब एक देश समझ रहा है तो दूसरा देश हमारा पड़ोसी मुल्क समझने में कोताही क्यों बरत रहा है। क्या पाकिस्तान के लोगों को ये पता नहीं होता कि भारत की राजनीति में क्या चल रहा है?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि 20-20 के चैंपियनों की बेइज्जती हुई है। पर ये बेइज्जती की किसने है?मेरा जवाब है खुद पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने अपनी बेइज्जती करवाई है?
क्या पाकिस्तानी खिलाड़ी या वहां कि आवाम ये नहीं जानती कि 26/11 का घाव अभी भी हरा है। फिर कैसे कोई भी फ्रेन्चाइजी ओनर उसी ट्राइडेंट होटल में बैठकर उन्हीं पाकिस्तानियों की बोली लगाता जिसके देश से आए लोगों ने इसी होटल को कुछ समय पहले कब्रगाह बना दिया था।
आईपीएल एक प्राइवेट संस्था है वो किसको रखेगी कब वेन्यू चेंज करेगी इसमें सरकार का कोई भी हस्ताक्षेप नहीं है। यदि ये छोटी सी बात पाकिस्तानियों की मोटी बुद्धि(जो कि उनके पास नहीं है) में नहीं आती तो इसमें कोई भी कुछ नहीं कर सकता। ’मेरी मर्जी मैं आपको लूं या ना लूं’। इतना बड़ा आईपीएल सीजन है उसमें से कोई मजबूत खिलाड़ी नहीं पहुंचे तो उस टीम पर कितना फर्क पड़ेगा ये शायद दूर से हाथ सेकने वाले नहीं समझ सकते। उनको तो पैसा मिल जाता और फिर जो भी नुकसान होता फ्रेन्चाइजी को होता। क्या कोई भी पाकिस्तानी ये आश्वासन दे सकता है कि मार्च 13 तक भारत पर आतंकी हमला नहीं होगा। शायद कोई नहीं उनके हुक्मरान तक नहीं।
बिना किसी से पूछे आईपीएल ने अपना पहले मैच का वेन्यू चेंज कर दिया। क्या इसमें भी साजिश है नहीं। ये दिमाग है, दूरदर्शिता है।
तो क्यों वो खिलाड़ी इन सब कारणों को जानते हुए भारत में अपनी बेइज्जती करवाने आए?क्यों उन्होंने और पीसीबी ने एक बार भी नहीं सोचा कि ऐसा हो सकता है पर शायद मुझे लगता है कि उनकी बेइज्जती नहीं हुई उन्हें तो बख्स दिया गया वर्ना उन्हें तो इस से भी ज्यादा जल्लात सहनी पड़ती।
अंत में मेरी राय तो ये है कि जब तक संवाद ठीक नहीं हो जाते तब तक पाकिस्तानियों को भारत में आने से पहले सोचना चाहिए क्योंकि यहां पर कुछ भी उनके साथ घट सकता है और हो सके तो अभी नहीं आए तो बेहतर।
ये देखिए चल गए ना फिर से सचिन तेंदुलकर। कल ही तो मैंने लिखा था जब हर जगह ये ही बात होने लगी थी कि पता नहीं सचिन को क्या होगया है। मैंने साफ लिखा था कि भई कई बार ऐसा होता है कि हां कोई दो-चार मैच परफोर्म नहीं कर पाता पर इसका ये मतलब नहीं है कि दाना-पानी लेकर ही पीछे लग जाओ।
किंग्स इलेवन ने दूसरी भिड़ंत में भी 119 रन ही बनाए और जीत के लिए 120 की चुनौती मुंबई इंडियंस के सामने रखी। और मैच में टॉस हारने के बावजूद सचिन ने कप्तानी का सही रुख दिखाते हुए तीसरे ओवर से ही गेंदबाजों को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। फिर भज्जी को गेंद पकड़ाई और भज्जी ने कमाल ही कर दिया। सबसे खतरनाक खिलाड़ी संगकारा को आउट कर दिया। साथी ही ड्यूमनी को भी सचिन ने मौका दिया। ड्यूमनी ने भी युवराज को आउट कराके मुंबई की कमर ही तोड़ दी। सचिन ने फील्डिंग में भी कमाल दिखाया और सोहल जो कि खतरनाक बन रहा था उसे रन आउट किया।
जब बल्लेबाजी की बात आई तो सचिन ने गजब का आत्मविश्वास दिखाते हुए ब्रावो से ओपन करवाया और साथ ही जयसूर्या के आउट होने के बाद पिछले मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले राहणे को मैदान में उतारा। फिर रहाणे के आउट होने के बाद खुद मैदान में आए। चाहते तो ड्यूमनी को भेजा जा सकता था पर नहीं। अपनी परर्फोरमेंस को सुधारने का जज्बा लेकर सचिन मैदान में उतरे और 40 से 122 तक टीम को पहुंचाया। साथ ही ब्रावो का उत्साहवर्धन भी करते रहते। जहां ब्रावो ने श्रीशांत को छक्के मारे वहीं घातक बनते हुए पीयूष चावला को सचिन ने भी शानदार छक्का जड़ा।
माना कि अभी आईपीएल का सफर बहुत बाकी है और सचिन को हमेशा से ही बार-बार अपने आप को साबित करते रहना पड़ेगा खासकर टीम के लिए। वैसे पूरी दुनिया में कोई भी सचिन से साबित करने की बात तो कहने नहीं जा रहा। पर ट्वेंटी-20 में जैसी कप्तानी और परफोर्मेंस एक खिलाड़ी से चाहिए वहां पर अभी सचिन पूरा नहीं दे पा रहे हैं।
आपका अपना नीतीश राज
Monday, May 11, 2009
क्या हो गया है सचिन को? शुरुआत में तो लगा था कि वाह! मास्टर ब्लास्टर इस बार तो ब्लास्ट करने के लिए तैयार हैं। पर क्या होगया सचिन को एकदम से ब्रेक लग गए। आईपीएल सीजन 2 में सचिन ने 9 मैच खेले हैं और 226 रन बनाए हैं जिसमें से एक बार नॉट आउट भी रहे। पहले तीन मैचों में तो सचिन का जलवा देखने लायक था। पहले तीन मैचों में ही सचिन ने दो हॉफ सेंचुरी जमाई। पहले ही मैच में 49 गेंदों पर नाबाद 59 रन बनाए जिसमें 7 चौके शामिल थे। चेन्नई को बड़ी ही आसानी से मात दे दी थी। हैदराबाद के खिलाफ दूसरे मैच में टीम 12 रन से भले ही हार गई पर सचिन ने 3 छक्के और 2 चौकों की मदद से महज 27 गेंदों पर 36 रन बनाए। कोलकाता के खिलाफ तो कमाल ही कर गए मास्टर। ऐसा ब्लास्ट किया कि मजा ही आगया। महज 45 गेंद में 4 छक्के और 6 चौकों की मदद से 45 गेंद पर 68 रन की पारी खेली जो कि अभी तक सचिन की इस सीजन में सर्वश्रेष्ठ है। फिर तो लगता है जैसे कि सचिन को नजर ही लग गई। किंग्स के खिलाफ 01, कोलकाता के खिलाफ 34, बैंगलोर के खिलाफ 11, हैदराबाद के खिलाफ 02, दिल्ली के खिलाफ महज 15, फिर बैंगलोर के खिलाफ 00। मतलब- पहले तीन मैचों में- 59+36+68=163 बाकी के 6 मैचों में- 01+34+11+02+15+00=63 तो एकदम से अचानक सचिन को क्या होगया। कहां चली गई फॉर्म। माना की बैगलोर को हराकर टीम ने फिर से अपने आप को सेमीफाइनल की दौड़ में रखा है पर लगता है कि सचिन पर कप्तानी हावी होने लग गई है। जब भी थोड़ी सी टेन्स हालात होते हैं सचिन को नाखुन चबाते जरूर देखा जा सकता है चाहे वो मैदान में हों या फिर बाहर।
आजकल ये मुद्दा गर्माया हुआ है कि क्या हो गया है सचिन को? सब इस बारे में ही बात करते नजर आजाएंगे। पर सचिन को कुछ भी नहीं हुआ है। जहां तक सवाल रहा जयसूर्या का तो वो अभी ८ मैचों में सिर्फ १७१ रन बना पाए हैं। तो सचिन को कुछ नहीं हुआ है बस देखना ये है कि सचिन कब फॉर्म में वापस आ पाते हैं और उसका इंतजार सब को रहेगा।