कुछ लोग करतूत ही ऐसी करते हैं जिसे की कोई हजम नहीं कर सकता। 14 जून 2008 याने की इस साल का ही वीडियो सामने आया है जिसमें राज ठाकरे का जन्मदिन मनाया जा रहा था। इस वीडियो में दिख रहा है कि कैसे कोई किसी से कितनी नफरत कर सकता है कि अपने निजी जश्न में भी वो उसपर वार करने से नहीं चूकता। ये है राज
ठाकरे के दिल में उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत।
जन्मदिन का वीडियो या फिर नफरत का
वीडियो में दिख रहा है कि एक ऐसा केक काटा जा रहा है जिसपर लिखा था-भैया। भैया, इसका मतलब किसी को समझाने कि जरूरत नहीं है। भैया का मतलब होता है बिहार- यूपी के लोग।
सबसे ज्यादा एतराज केक को काटने में है। जिस तरह से केक को काटा गया उसे शायद हम में से कोई भी ये नहीं कह सकता कि वो केक काटा गया। साफ दिखता है कि केक काटा नहीं गया उसे चीरा गया। सीधे-सीधे राज ठाकरे ने केक को पहले बाएं से दाएं और
फिर दाएं से बाएं चीर दिया जिसपर लिखा था भैया। 40 सेकेंड के वीडियो में ये सब दिखाया गया है।
केक पर वैसे तो नाम ही लिखा जाता है उस शख्स का जिसका कि जन्मदिन होता है। उस केक पर लिखा था भैया, लेकिन क्या राज ठाकरे को भैया के नाम से जाना जाता है या उन्हें कोई राज ठाकरे के नाम से पुकारता है जिसे कि एमएनएस के लोग गाली की तरह इस्तेमाल करते हैं। तो ये बात तो यहीं पर खारिज हो जाती है कि राज ठाकरे को भैया के नाम का केक गिफ्ट किया गया।
राज की बहन या फिर कार्यकर्ता
फिर राज ठाकरे को कोई भैया कहकर बहन पुकारती हो और उसने ये तोहफे के तौर पर भेंट किया हो। बात तुरंत कहते के साथ ही सामने आई। एमएनएस की महिला शाखा की सचिव रीता गुप्ता राज ठाकरे की बहन के रूप में सामने आई। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि ये तो बड़ा ही पर्सनल वीडियो था इसे कैसे कोई सामने ला सकता है। साथ ही वो राज ठाकरे को भैया कहकर पुकारती हैं। तो उन्होंने गिफ्ट किया था अपनी ब्रेकरी में बना केक राज के जन्मदिन पर।
चलिए ये बात तो साफ हो गई कि केक बहन ने दिया था। पर केक काटने का तरीका सही था। रीता गुप्ता जी बार-बार इस सवाल को घुमा जाती। क्योंकि कोई जंगली भी इस तरीके से केक को नहीं काटता। मुझे सबसे ज्यादा आपत्ति सिर्फ इस बात से ही है।
वीडियो पर सियासत
राज ठाकरे के तहलका मचाने वाले इस वीडियो को जारी करने वाले शख्स है किशोर समरीते। किशोर समरीते मध्यप्रदेश के लांजी क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक है। सवाल ये है समरीते के पास ये वीडियो कहां से आया.. समरीते इसका खुलासा नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि उनके एक दोस्त ने उन्हें ये वीडियो दिया है। सवाल ये भी है छह महीने पुराने इस वीडियो को अचानक प्रेस को क्यों दिया। माना जा रहा है कि समरीते अपनी सियासत चमकाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे है
राज ठाकरे के इस केक मामले पर सियासत भी गरमा गई है। जहां सभी पार्टी इस की निंदा कर रही हैं। वहीं राज ठाकरे को लालू प्रसाद यादव ने फिर से मेंटल करार दे दिया है।
सही मायने में तो राज ठाकरे ने इस केक को केक माना ही नहीं है। ये है राज ठाकरे की नफरत उत्तर भारतीयों के लिए। लेकिन राज ठाकरे का अपने जन्मदिन को मनाने का तरीका बड़ा ही अनोखा और विचित्र लगा। तो राज ठाकरे इस तरह मनाते हैं अपना जन्मदिन और फैलाते हैं नफरत की आग।
आपका अपना
नीतीश राज
"MY DREAMS" मेरे सपने मेरे अपने हैं, इनका कोई मोल है या नहीं, नहीं जानता, लेकिन इनकी अहमियत को सलाम करने वाले हर दिल में मेरी ही सांस बसती है..मेरे सपनों को समझने वाले वो, मेरे अपने हैं..वो सपने भी तो, मेरे अपने ही हैं...
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Saturday, November 15, 2008
Thursday, October 23, 2008
राज्य सरकार ने राज ठाकरे को पिटने से बचाने के लिए खेला ये खेल
राज ठाकरे को पुलिस ने पकड़ा, किसके कहने पर सरकार के कहने पर। सरकार ने पहल करके ये बताना चाहा कि बहुत हो चुका अब इस बड़बोले शख्स को जेल की हवा खिलानी ही होगी। कानून ने एक तरफ तो न्याय का चाबुक चलाया और दूसरी तरफ चाबुक शरीर पर लगने से पहले ही पकड़ भी लिया। वहीं दूसरी तरफ कानून की वो देवी जो कि आंखों पर पट्टी बांधे रखती है वो फिर किसी तरह से जागी और फिर चाबुक चमड़ी उधेड़ने के लिए उठा लेकिन शरीर पर पड़ने से पहले ही चाबुक पकड़ लिया। हिम्मत के आगे कानून जीता, हिम्मत हारी।
ये कोई पहेली नहीं है ये है कल्याण कोर्ट की कहानी। राज ठाकरे के खिलाफ सरकार ने जो प्लान बनाया था वो काफी अच्छा था। पर सरकार भी ये जानती थी कि यदि इस शख्स को लोगों तक पहुंचने दिया तो ये राज्य सरकार के लिए ठीक नहीं होगा। तो खेल खेला गया। एक ऐसा खेल जिससे दिखाने के लिए काम भी हो जाए और राज ठाकरे भी पिटने से भी बच जाए।
सरकार को राज ठाकरे ने रत्नागिरी में चैलेंज किया था कि अगर हिम्मत है तो पकड़ के दिखाओ और फिर देखना कि महाराष्ट्र कैसे जलता है। राज्य सरकार काफी दिनों से ये धमकियां सुन रही थी। और इस बार तो दबाव भी केंद्र से बन गया था(सीएम देशमुख ने कहा कि राज्य सरकार पर कोई दबाव नहीं था, वहीं शिवराज पाटील ने कहा है कि गृहमंत्रालय ने चिट्ठी लिखी थी और फोन पर खुद उन्होंने बात की थी। सच्चा कौन?)।
तभी राज्य सरकार को पता चला, राज ठाकरे के खिलाफ जारी हो चुका है एक गैर जमानती वारंट। राज्य सरकार तुरंत हरकत में आगई। यदि जमशेदपुर पुलिस राज ठाकरे को अपने साथ ले गई तो फिर राज्य में राजनीति कौन करेगा। कौन मारेगा-पीटेगा उत्तर भारतीयों को, जिनकी तादाद मुंबई-ठाणे में ज्यादा हैं। पता नहीं कहीं जमशेदपुर ले जाते हुए कोई भी सुरक्षा में चूक होगई और राज ठाकरे को बिहारियों के साथ झारखंडियों ने मिलकर पीट दिया या फिर कुछ ऊंच-नीच हो गई तो फिर अलगाव को नहीं रोका जा सकेगा। राज्य सरकार ने घोड़े दौड़ाए और ३००-३५० किलोमीटर दूर बैठे राज ठाकरे को रात के २.३० बजे के करीब गिरफ्तार कर लिया गया।
खबर फैली हर जगह उत्पात होना ही था और हुआ भी। लेकिन इस बार सिर्फ महाराष्ट्र में ही उत्पात नहीं हुआ। इस चिंगारी की आग पटना तक गई। वहां पर स्टेशन पर तोड़फोड़ की गई। बहरहाल ये बात बाद में।
कोर्ट में राज की पेशी होती है। सुरक्षा कारणों से देरी होती है और फिर बांद्रा कोर्ट से राज को जमानत मिल जाती है। पर राज्य सरकार ने पूरा इंतजाम कर रखा था। अब बारी थी कल्याण कोर्ट की। कल्याण कोर्ट में एक दूसरे मामले में राज को पेश किया जाना था पर देरी की वजह से एक पूरी रात मानपाड़ा थाने की हवालात में काटनी पड़ती है राज ठाकरे को। हर पुलिसकर्मी जेल में बैठे उस ढ़ोंगी के वक्तव्य सुनता रहता है और जी हुजूरी करता रहता है। रात कट जाती है फिर सुबह पेश किया जाता है पर अदालत में खड़ी उस देवी के आंखें में पट्टी है साथ ही वो पट्टी कान के ऊपर से निकलती है इसलिए ना वो किसी का दर्द सुन सकती है और ना देख सकती है। अदालत ने अपना काम किया इतना तेज चाबुक मारा, कि दीवाली भी जेल में काटने का इंतजाम कर दिया, ५ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। फिर शरीर पर लगने से पहले ही पकड़ भी लिया, कोर्ट ने सिर्फ १५००० के निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी। साथ ही देखा कि रेलवे पुलिस खड़ी है राज ठाकरे को पकड़ कर लेजाने के लिए और इतनी देर हो चुकी है कि वकील चाहे कुछ भी करें तब भी रात तो हवालात में काटनी ही होगी। और राज ठाकरे कमजोर भी दिख रहे हैं। तुरंत २४ तक हर मामले में अदालत ने राज ठाकरे को अंतरिम राहत दे दी। यानि की अब जब भी कार्रवाई होगी वो होगी २५ को याने कि जमशेदपुर कोर्ट से जारी वारंट का इलाज मिल गया। और शनिवार को कोर्ट में इस याचिका के खिलाफ पहले ही अर्जी डाली जा चुकी है। तो राज ठाकरे राज्य सरकार की राजनीति की वजह से राजशाही ठाठबाट पाते रहेंगे।
राजनीति इसे ही कहते हैं मेरे दोस्त। राज्य सरकार ने अपना उल्लू भी सीधा कर दिया और साथ ही राज की मुश्किल भी हल कर दी। वर्ना यदि राज ठाकरे को महाराष्ट्र छोड़कर जाना पड़ता तो क्या होता राज ठाकरे का इसका अनुमान सब लगा सकते हैं।
आपका अपना
नीतीश राज
ये कोई पहेली नहीं है ये है कल्याण कोर्ट की कहानी। राज ठाकरे के खिलाफ सरकार ने जो प्लान बनाया था वो काफी अच्छा था। पर सरकार भी ये जानती थी कि यदि इस शख्स को लोगों तक पहुंचने दिया तो ये राज्य सरकार के लिए ठीक नहीं होगा। तो खेल खेला गया। एक ऐसा खेल जिससे दिखाने के लिए काम भी हो जाए और राज ठाकरे भी पिटने से भी बच जाए।
सरकार को राज ठाकरे ने रत्नागिरी में चैलेंज किया था कि अगर हिम्मत है तो पकड़ के दिखाओ और फिर देखना कि महाराष्ट्र कैसे जलता है। राज्य सरकार काफी दिनों से ये धमकियां सुन रही थी। और इस बार तो दबाव भी केंद्र से बन गया था(सीएम देशमुख ने कहा कि राज्य सरकार पर कोई दबाव नहीं था, वहीं शिवराज पाटील ने कहा है कि गृहमंत्रालय ने चिट्ठी लिखी थी और फोन पर खुद उन्होंने बात की थी। सच्चा कौन?)।
तभी राज्य सरकार को पता चला, राज ठाकरे के खिलाफ जारी हो चुका है एक गैर जमानती वारंट। राज्य सरकार तुरंत हरकत में आगई। यदि जमशेदपुर पुलिस राज ठाकरे को अपने साथ ले गई तो फिर राज्य में राजनीति कौन करेगा। कौन मारेगा-पीटेगा उत्तर भारतीयों को, जिनकी तादाद मुंबई-ठाणे में ज्यादा हैं। पता नहीं कहीं जमशेदपुर ले जाते हुए कोई भी सुरक्षा में चूक होगई और राज ठाकरे को बिहारियों के साथ झारखंडियों ने मिलकर पीट दिया या फिर कुछ ऊंच-नीच हो गई तो फिर अलगाव को नहीं रोका जा सकेगा। राज्य सरकार ने घोड़े दौड़ाए और ३००-३५० किलोमीटर दूर बैठे राज ठाकरे को रात के २.३० बजे के करीब गिरफ्तार कर लिया गया।
खबर फैली हर जगह उत्पात होना ही था और हुआ भी। लेकिन इस बार सिर्फ महाराष्ट्र में ही उत्पात नहीं हुआ। इस चिंगारी की आग पटना तक गई। वहां पर स्टेशन पर तोड़फोड़ की गई। बहरहाल ये बात बाद में।
कोर्ट में राज की पेशी होती है। सुरक्षा कारणों से देरी होती है और फिर बांद्रा कोर्ट से राज को जमानत मिल जाती है। पर राज्य सरकार ने पूरा इंतजाम कर रखा था। अब बारी थी कल्याण कोर्ट की। कल्याण कोर्ट में एक दूसरे मामले में राज को पेश किया जाना था पर देरी की वजह से एक पूरी रात मानपाड़ा थाने की हवालात में काटनी पड़ती है राज ठाकरे को। हर पुलिसकर्मी जेल में बैठे उस ढ़ोंगी के वक्तव्य सुनता रहता है और जी हुजूरी करता रहता है। रात कट जाती है फिर सुबह पेश किया जाता है पर अदालत में खड़ी उस देवी के आंखें में पट्टी है साथ ही वो पट्टी कान के ऊपर से निकलती है इसलिए ना वो किसी का दर्द सुन सकती है और ना देख सकती है। अदालत ने अपना काम किया इतना तेज चाबुक मारा, कि दीवाली भी जेल में काटने का इंतजाम कर दिया, ५ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। फिर शरीर पर लगने से पहले ही पकड़ भी लिया, कोर्ट ने सिर्फ १५००० के निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी। साथ ही देखा कि रेलवे पुलिस खड़ी है राज ठाकरे को पकड़ कर लेजाने के लिए और इतनी देर हो चुकी है कि वकील चाहे कुछ भी करें तब भी रात तो हवालात में काटनी ही होगी। और राज ठाकरे कमजोर भी दिख रहे हैं। तुरंत २४ तक हर मामले में अदालत ने राज ठाकरे को अंतरिम राहत दे दी। यानि की अब जब भी कार्रवाई होगी वो होगी २५ को याने कि जमशेदपुर कोर्ट से जारी वारंट का इलाज मिल गया। और शनिवार को कोर्ट में इस याचिका के खिलाफ पहले ही अर्जी डाली जा चुकी है। तो राज ठाकरे राज्य सरकार की राजनीति की वजह से राजशाही ठाठबाट पाते रहेंगे।
राजनीति इसे ही कहते हैं मेरे दोस्त। राज्य सरकार ने अपना उल्लू भी सीधा कर दिया और साथ ही राज की मुश्किल भी हल कर दी। वर्ना यदि राज ठाकरे को महाराष्ट्र छोड़कर जाना पड़ता तो क्या होता राज ठाकरे का इसका अनुमान सब लगा सकते हैं।
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