Showing posts with label NewZealand. Show all posts
Showing posts with label NewZealand. Show all posts

Saturday, September 12, 2009

कल खुशी पर भारी पड़ा गम।


कहीं खुशी, कहीं गम, ये ही हाल रहा दो दिन के बारे में कहूं तो। दिल्ली में बारिश ही बारिश। हरियाणा से यमुना में पानी भी छोड़ा गया जिसके कारण दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। पता नहीं कितने सालो बाद ऐसी बारिश हुई है। शायद 98 में दिल्ली में ऐसा ही एक बार हुआ था जब कि यमुना पुश्ता पर पानी भर गया था और दिल्ली में बाढ़ आई थी।
एक गाना हुआ करता था रिमझिम गिरे सावन....पर अब तो सावन बीत जाए और फिर रिमझिम शुरू हो जाए। ये हाल हो गया है मौसम का।

वैसे, मैं यहां पर बात क्या करने वाला था और क्या करने लग गया। कल के दिन खुशी मिली पर जब गम सामने आया तो वो खुशी पर भारी पड़ गया।

ऑफिस में इस बात का इंतजार हो रहा था कि क्या भारत आज का मैच जीत जाएगा। चार विकेट गिर चुके थे। मैं और मेरे साथ ही कुछ इस पर चर्चा भी कर रहे थे कि जब स्कोर छोटा होता है तो टीम इंडिया जरूर उतना ही मर मर कर जीतती है। ये नहीं कि शेर की तरह खेले और जल्दी जीत कर मैच को रफा-दफा करे। चार विकेट गिर चुके थे, द्रविड़ ने 65 मिनट क्रीज पर रहकर 45 गेंदों में महज 14 रन बनाए। द्रविड़ एक महान खिलाड़ी हैं पर क्यों द्रविड़ वन डे को भी टेस्ट की तरह खेलते हैं।

इस बीच एक खबर ने सब में रोमांच भर दिया। पहले था कि सीरीज जीतने पर ही टीम इंडिया नंबर वन बन पाएगी। पर अब ये खबर आई कि न्यूजीलैंड को हराने के साथ ही हम नंबर वन बन जाएंगे पर नंबर वन बने रहने के लिए कॉम्पेक कप जीतना जरूरी होगा। और थोड़ी देर बाद ही धोनी और रैना ने जीत दिला दी। धोनी और रैना दोनों की तारीफ करना चाहूंगा कि दोनों ने सूझबूझ कर बैटिंग की और अंत तक टिके रहे। आशीष नेहरा को मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया। सचिन को सम्मान के रूप में बाइक दी गई जिसपर इस बार सचिन खुद ही बैठे धोनी को बैठने का मौका नहीं दिया।

अब बात गम की भी कर लें।

अभी ऑफिस से घर की तरफ निकले ही थे कि पता चला कि डीडी ने सेमीफाइनल और फाइनल के राइट्स खरीद लिए हैं। अब तो लगा कि वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी भारत का झंडा ऊंचा होगा और विजेंदर अपने बाउट जीतकर फाइनल की जंग में पहुंच जाएगा।

पूरे ऑफिस में बताया गया कि रात के 1.30 बजे है बाउट। मैं घर पहुंच कर खाना पीना करके टीवी खोलकर कभी कुछ कभी कुछ देखते हुए जगने की कोशिश में लग गया। बार-बार न्यूज पर वापिस आता कि जब तक क्रिकेट का ही लुत्फ ले लिया जाए। दिल में एक इच्छा थी कि विजेंदर जीत जाए क्योंकि हाल ही में करोड़ों का मुनाफा हुआ है विजेंदर को।

इतिहास तो विजेंदर ने भी रच ही दिया है। पहली बार कोई भारतीय बॉक्सर इस ऊंचाई तक पहुंच पाया है। यदि विजेंदर जीत जाए तो अच्छा होगा क्योंकि बहुत हो लिया क्रिकेट। पर ये ही सोचते-सोचते कब नींद आगई पता ही नहीं चला। सुबह जब उठा तो तुरंत टीवी चलाया देखा तो हर न्यूज चैनल पर सिर्फ क्रिकेट ही क्रिकेट चल रहा था। लग गया कि विजेंदर का क्या हुआ। यानी हार गया विजेंदर।

जी हां, उजबेकिस्तान बॉक्सर अब्बोस अतोव जिसकी रैंक इस चैंपियनशिप में चौथी थी उसने पहली रैंक विजेदर को 7-3 से मात दे दी। जबकि पहले राउंड में 0-1 से आगे चल रहा थे विजेंदर। पर दूसरे राउंड में ज्यादा डिफेंसिव मोड विजेंदर को हार के कगार पर ले गया। और उजबेक बॉक्सर ने दूसरे राउंड में 5 अंक बटोर लिए और फिर अंतिम राउंड में तो सिर्फ खानापूर्ति ही रह गई। अतोव ने 2007 में लाइट वेट में वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल जीता था और वो भी तब जब कि वो बाउट के दौरान प्रतिद्वंदी के पंच के कारण नीचे गिर गए थे। दूसरे राउंड के बाद स्कोर 5-1 था और अंत में 7-3 से विजेंदर हार गया और मुझे लगता है कि बॉक्सिंग का फ्यूचर भी हार गया।

मैंने टीवी बंद कर दिया था। सोच रहा था कि आज भी दो मैच हैं। जहां एक जगह टीम इंडिया श्रीलंका से भिड़ेगी, वहीं दूसरी तरफ जीतेगा भी भारत और हारेगा भी भारत। अमेरिकी ओपन टेनिस चैंपियनशिप में भूपति और पेस होंगे आमने-सामने। देखते हैं कि खुशी मिलती है या फिर आज का पार्ट-2।
आपका अपना
नीतीश राज

Monday, March 9, 2009

सचिन ने पूरा किया अपने चाहने वालों का अरमान

जब ये सीरीजी शुरू हुई तो सबसे पहले मैंने इस बात पर ही जोर दिया था कि क्या सचिन पूरा कर सकोगे अपने चाहने वालों के अरमान? थोड़ी-थोड़ी उम्मीद थी और थोड़ी-थोड़ी नहीं भी। पर सचिन एक महान बल्लेबाज की तरह पूरे मैच में खेले और उस अधूरे काम को पूरा कर दिया जिसे वो बहुत पहले से करना चाहते थे। न्यूजीलैंड में शतक मारने के सपने को सचिन ने सच कर दिखाया। वैसे भारत ने अपनी पारी में मारे 18 छक्के जो कि किसी भी पारी में मारे गए छक्कों के बराबर है।
न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर की फील्डिंग।
क्राइस्टचर्च में भारत ने अभी तक ५ वन डे खेले थे और एक भी नहीं जीता था। 6ठे वन डे में भारत क्राइस्टचर्च में जीत की दरकार के साथ फील्ड पर उतरा। डेनियल विटोरी की पत्नी प्रेग्नेंट हैं तो विटोरी अपनी पत्नी के पास रहे पर मैच में बीच-बीच में दिखते रहे। इस लिए आज मैच की कप्तानी पहली बार मैक्कुलम ने की और टॉस जीतकर विटोरी के ना होने पर पहले फील्डिंग चुनी। पर मैक्कुलम को क्या पता था कि उनकी कप्तानी में रिकॉर्ड बनने वाला है न्यूजीलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा रन। शुरुआत में लगा कि मैक्कुलम का ये फैसला टीम के लिए सही साबित हुआ जब कि सहवाग महज 3 रन बनाकर एक सीधी गेंद को छोटी बाउंडरी से बाहर पहुंचाने के चक्कर में मिस कर गए और क्लीन बोल्ड हो गए। भारत ने अपना पहला विकेट 15 के स्कोर पर खो दिया। फिर गंभीर ने सचिन का साथ दिया और सचिन अपनी लय में खेल रहे थे। तभी गंभीर 15 के निजी स्कोर पर बटलर का शिकार बने। भारत के स्कोरबोर्ड पर 13 ओवर में 65 रन हो चुके थे पर 2 विकेट भी खो दिए थे।
सचिन-युवराज की जोड़ी ने क्राइस्टचर्च में मचाया कोहराम।
युवराज आते के साथ ही सचिन के साथ टीम का स्कोर आगे बढ़ाने में लगे। तीसरे विकेट के लिए दोनों के बीच 132 रन की पार्टनरशिप हुई। इसमें युवराज ने 60 गेंदों में 87 रने बनाए। जिसमें 10 जानदार चौके और 6 शानदार छक्के शामिल थे। इस से आप हिसाब लगा सकते हैं कि युवराज ने चौके-छक्के से ही 76 रन बनाए सिर्फ 11 रन दौड़कर लिए। इस बीच सचिन युवराज का साथ देते रहे और स्ट्राइक ज्यादा से ज्यादा युवी को देते रहे और दर्शक सचिन के कलात्मक खेल का लुत्फ लेते रहे। भारत का स्कोर तब 203 था जब 145 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग कर रहे युवराज 30 ओवर में एलियट की दूसरी गेंद का शिकार बने, सिर्फ 13 रन से शतक से चूके पर सबको बता दिया कि फॉर्म में आ चुका हूं।
सचिन रिटायर्ड हर्ट।
युवराज के बाद कप्तान धोनी 5वें नंबर पर बैटिंग करने उतरे। युवराज के जाने के बाद ऐसा लग रहा था जैसे सचिन ने युवराज की जगह ले ली है और भारत के स्कोर को तेजी से बढ़ाने लगे। सचिन ने मैदान के हर कोने में स्ट्रोक खेले। पर कप्तान और सचिन के बीच की साझेदारी 135 रन की ही हो सकी। लेकिन इस बीच सचिन काफी देर से एक दिक्कत से गुजर रहे थे। सचिन के पेट की मसल खिंच चुकी थी जिसे की वो काफी देर से दबा कर खेल रहे थे। पर अब बात बढ़ चुकी थी। सचिन दोहरे शतक से सिर्फ 37 रन दूर थे तब वो मैदान से बाहर आगए।
सचिन की इस पारी के लिए न्यूजीलैंड के कप्तान मैक्कुलम ने कहा कि, 'मैंने ऐसी पारी काफी कम देखी हैं। हर शॉट उनके बल्ले के मिडल से गया।' इस शानदार पारी के लिए सचिन को मैन ऑफ द मैच मिला।

रैना बने रनमशीन।
18 गेंदें, 38 रन, 5 छक्के। ये था रैना का आंकड़। इस पूरी सीरीज में रैना ने कमाल की बैटिंग की है। पहले वन डे में भी रैना ने 5 चौके और 4 छक्के लगाए थे। जब भारत का स्कोर 382 पहुंचा तो धोनी 5 चौके और 2 छक्कों की मदद से 68 रन पर मिल्स की गेंद का शिकार बने। लेकिन तब तक भारत की तरफ से क्राइस्टचर्च के पांच नायक काम कर चुके थे। भारत ने न्यूजीलैंड के सामने रखा 393 का लक्ष्य। ये न्यूजीलैंड में किसी भी टीम का सर्वाधिक स्कोर था।

भारत को मिली कड़ी टक्कर।
राइडर और इस मैच के लिए कप्तान बने मैक्कुलम ने बताया कि वो भी दम रखते हैं। राइडर ने शुरू से समझदारी से बैटिंग की और साथ ही मैक्कुलम को जब भी कहीं रन लेने का मौका मिला वहां पर उन्होंने रन चुराया। शुरूआत में भारत की फिल्डिंग अप टू डेट नहीं थी और कई बार मिस फिल्डिंग हुई और इस का फायदा न्यूजीलैंड के ओपनरों ने खूब उठाया। पूरा ओवर ठीक पड़ता लेकिन दो गेंद गलत हुई नहीं कि जितने की दरकार थी उनको वो रन निकालते। दोनों ओपनर गेंदबाजों के पास उन दोनों बल्लेबाजों का तोड़ नहीं मिल रहा था। गेंदबाजों को बदला गया लेकिन फिर भी कोई भी फायदा नहीं हुआ और न्यूजीलैंड ने 50 फिर 100 और फिर 150 रन बिना विकेट खोए बना लिए। फिर एक छोटी सी चूक और रैना की फुर्ती ने मैक्कुलम को रन आउट कर दिया और यहां से गेम पलट गया। मैक्कुलम ने 71 रन बनाए जिसमें 6 चौके और 3 छक्के शामिल थे। पहला विकेट 166, दूसरा 179, तीसरा 182, चौथा 188, पांचवां 203, छठा विकेट 217, सांतवा 218 यानी कि इस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ 52 रन के अंदर 7 खिलाड़ी न्यूजीलैंड ने खो दिए। बाकि तो कुछ नहीं कर पाए लेकिन राइडर को भज्जी ने आउट किया जब कि राइडर 105 पर खेल रहे थे जिसमें 12 चौके और 4 छक्के लगाए थे।
आंठवें विकेट के लिए 83 रन की साझेदारी ने भारत के लिए एक बार तो मुश्किल खड़ी कर दी थी। लग ये रहा था कि कभी भी ये मैच भारत के हाथ से निकल सकता है। यहां पर विटोरी की कमी न्यूजीलैंड को और भारत को ईशांत शर्मा की कमी खली। सबसे ज्यादा खेल के लिहाज से गलत ये हुआ कि जब भारतीय टीम को विकेट नहीं मिल रहे थे तब मुनाफ पटेल ने दो लगातार बीमर डाल दी जिसके कारण अंपायर ने उन्हें बॉल करने से मना कर दिया। पर फिर एक विकेट यूसुफ और दूसरा विकेट प्रवीण कुमार ने लेकर न्यूजीलैंड की टीम की पारी समाप्त कर दी।
कुछ दिलचस्प जानकारी
इस मैच की दोनों पारियों में 726 रन बने जो कि दूसरा एक मैच में सबसे ज्यादा स्कोर रहा। सचिन को 58वीं बार मैन ऑफ द मैच का खिताब मिला जो कि सबसे ज्यादा है। दोनों पारियों में लगे 31 छक्के जो कि अपने में एक रिकॉर्ड है। भारत ने लगाए एक पारी में 18 छक्के जो कि रिकॉर्ड की बराबरी है।
पर कुछ भी हो सचिन ने अपने चाहने वालों का अरमान पूरा तो कर ही दिया।

आपका अपना
नीतीश राज

Wednesday, March 4, 2009

न्यूजीलैंड में भारत जीता, पाकिस्तान में क्रिकेट हारा।

ट्वेंटी-20 सीरीज हारने के बाद धोनी और धोनी की टीम के लिए पहला वन डे बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने था। धोनी के लिए फिर टॉस अच्छा रहा, और टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला। ओपनर के रूप में जैसा कि सोचा जा रहा था वो ही हुआ सहवाग के साथ गंभीर नहीं सचिन ही थे। सचिन से लोगों को काफी उम्मीदें, सचिन ने जमने की कोशिश की। वहीं दूसरी तरफ सहवाग अपने रंग में आ चुके थे। जहां सहवाग अर्ध शतक के नजदीक थे वहीं सचिन अभी डबल फिगर को छू ही पाए थे।

सचिन ने भी अपने हाथ दिखाए और दो शानदार चौके लगाए। एक-दो चौकों के बाद लग रहा था कि सचिन शायद उतनी फॉर्म में नहीं हैं, फिर भी इतने तो हैं कि नेपियर में अपना सर्वाधिक बना देंगे और जैसे मैंने सचिन से सवाल पूछा था कि क्या सचिन अपने चाहने वालों का अरमान पूरा कर पाओगे? चाहने वालों को जवाब मिल गया, दो चौके मारने के बाद सचिन बाहर जाती बॉल को स्लिप के रास्ते चार रन तक पहुंचाने की कोशिश में बॉल की रफ्तार और हवा से चकमा खा गए और कीपर को एक आसान सा कैच थमा बैठे।
जिसकी उम्मीद थी बिल्कुल उससे हटके हुआ। जहां लोग सोच रहे थे कि लेफ्ट-राइट का कॉम्बिनेशन देने के लिए कोई लेफ्टी आएगा याने कि सबसे सफल जोड़ी फिर होगी क्रीज पर, पर ऐसा हुआ नहीं। लोगों और मीडिया की खरी-खरी सुनने के बाद अपना पसंदीदा नंबर 7 छोड़ कप्तान धोनी 3 नंबर पर बैटिंग करने पहुंचे। अपने इस निर्णय को साबित करने के लिए धोनी ने धीमे और सधी शुरुआत करी। वहां वीरू का बल्ला बोल रहा था। अब तक वीरू 56 गेंदों पर 11 चौके और 1 छक्के की मदद से 77 रन बना चुके थे। विटोरी की गेंद पर एक लाजवाब शॉट सहवाग ने खेली और सर्कल के अंदर खड़े टेलर ने उससे भी शानदार कैच लपक वीरू की शानदार पारी पर ब्रेक लगा दी। चौथे नंबर पर टीम के युवराज आए और
कप्तान के साथ दूसरे रन के फेर में पड़कर पवैलियन की राह पर निकल लिए। अब टी-20 के स्टार सुरेश रैना की बारी थी। 20-20 के क्रम को आगे बढ़ाते हुए रैना ने मैदान के हर कोने में बॉल पहुंचाई और शानदार 4 छक्के और 5 चौंकों की मदद से महज 39 गेंदों पर 66 रन बनाकर छक्के मारने के प्रयास में एलिट की गेंद पर ब्रायन को कैच थमा बैठे। वहीं दूसरे छोर पर कप्तान ने पारी संभाल रखी थी। अब धोनी का साथ देने क्रीज पर आए यूसुफ पठान आए और 10 गेंदों पर 1 छक्के और 2 चौकों की मदद से 20 रन बनाए। धोनी की इस समझदारी भरी पारी में सिर्फ ६ चौकों की मदद से 89 गेंदों पर 84 रन बनाए। न्यूजीलैंड के सामने 7.20 की औसत के साथ लक्ष्य 38 ओवरों में 274 रहा।
वैसे, इस बीच न्यूजीलैंड में झमाझम बारिश होने लगी और पाकिस्तान में श्रीलंका टीम की बस पर दनादन फायरिंग। पाकिस्तान में दूसरे टेस्ट के साथ-साथ दौरा भी खटाई में पड़ गया। खेल और क्रिकेट के इतिहास का काला दिन। वहीं दूसरी तरफ न्यूजीलैंड में बारिश के कारण पहला वन डे के ओवर कम कर दिए गए, मैच 38-38 ओवरों का हो गया।
इरफान की जगह टीम में आए प्रवीण कुमार ने बिना खाता खोले न्यूजीलैंड को दूसरे ओवर में ही पहला झटका मैक्कुलम के रूप में दिया। न्यूजीलैंड की तरफ से टी-20 का सितारा अस्त हो गया था। दूसरा विकेट भी प्रवीण कुमार की झोली में गया। गुप्टिल और टेलर जब खेल रहे थे तो लग रहा था कि औसर रन रेट तो बढ़ता जा रहा है पर फिर भी यदि ये दोनों टिके रहे तो मैच को कभी भी पलटने की काब्लियत रखते हैं। १६वें ओवर में यूसुफ पठान ने घातक होते टेलर को सचिन के हाथों कैच करवाकर न्यूजीलैंड की मुसीबत और बढ़ा दी। एलिट को सहवाग के सपाट थ्रू ने रन आउट कर दिया और बारिश शुरू हो गई।
डकवर्थ लुईस नियम को लागू किया गया और फिर जो टार्गेट न्यूजीलैंड के सामने था वो लगभग नामुमकिन सा ही था। 43 गेंद पर 111 रन। जब चौथा विकेट गिरा था तो न्यूजीलैंड को 102 गेंद पर 163 रन चाहिए थे और उनके हाथ में 6 खिलाड़ी थे।
जब मैच शुरू हुआ तो स्कोर को आगे बढ़ाने के कारण ओरम युवराज का शिकार बने। अब लगने लगा कि यदि गुप्टिल का विकेट भारत कैसे भी झटक ले तो फिर पूरी तरह मैच भारत के पक्ष में हो जाएगा। और हुआ भी कुछ यूं ही, पर अब बारी थी भज्जी की। चार गेंद पर भज्जी ने 3 विकेट झटक लिए। सबसे पहले गुप्टिल, फिर ब्रूम और फिर मिल्स को आउट कर न्यूजीलैंड की हार में चारों तरफ कील ठोंक दी। कहां एक समय 132 पर 5 विकेट थे वहीं 9 विकेट भी होगए। अब बस खानापूर्ति ही शेष रह गई थी। और भारत ने पहला वन डे 53 रन से डकवर्थ लुईस नियम से जीत लिया। मैन ऑफ द मैच चुने गए टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी।

जब टीम इंडिया बैटिंग कर रही थी तब ये खबर फैल चुकी थी कि श्रीलंका की टीम पर हमला हो गया है। और दोनों टीमों ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। धोनी ने कहा कि अच्छा हुआ कि भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया और शायद ही अब कोई भी खिलाड़ी पाकिस्तान में जाकर खेलना पसंद करेगा।
पर सच तो ये है कि पाक में पनपे आतंक के सच से खुद पाकिस्तानियों को लड़ना होगा और क्रिकेट को जिंदा रखने के लिए तालिबानी ताकतों के सामने घुटने नहीं टेकने होंगे। फिल्म के बाद अब इन दहशतगर्दों के निशाने पर है क्रिकेट पर आतंक से तो लड़ना होगा ही।

आपका अपना
नीतीश राज

(फोटो साभार-क्रिक इन्फो)

Monday, March 2, 2009

सचिन,अपने चाहने वालों के अरमानों को पूरा कर पाओगे?

सचिन तेंदुलकर के दीवाने न्यूजीलैंड में भी हैं। 2002-03 के बाद से न्यूजीलैंड में उनके दीवाने अब उनको खेलते हुए देख पाएंगे इसलिए उत्सुक्ता और बढ़ गई है। पिछला दौरा ना ही सचिन और ना ही भारत टीम के लिए अच्छा रहा था। 2002-03 में 7 वन डे भारत-न्यूजीलैंड के बीच खेले गए और भारत ने वो सीरीज 5-2 से गंवाई थी। 2003 वर्ल्ड कप से ठीक पहले की ये सीरीज थी। पर इस बार सचिन के ऊपर जो जिम्मेदारी है वो बहुत बड़ी है। पिछली सीरीज की नाकामयाबी का दाग धोना है जिसमें सचिन ने 3 वन डे में सिर्फ 0, 1, 1 रन बनाए थे। अभी तक यदि देखें तो सचिन ने न्यूजीलैंड में 15 वन डे खेले हैं और 27 की औसत से 408 रन का ही योगदान देने में कामयाब हो सके हैं। न्यूजीलैंड में सचिन ने वन डे में शतक नहीं जमाया है, तो इस बार सचिन को ये कीर्तिमान अपने नाम करना ही होगा। साथ ही टेस्ट में भारत 1967 के बाद से अब तक न्यूजीलैंड में टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाया है। तो भारतीय टीम के सबसे सीनियर और बुजुर्ग खिलाड़ी से ये उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद तो मौका मिलने नहीं जा रहा है, हो सके तो इस टूर में न्यूजीलैंड में अपने सारे सपने पूरे कर डालें और टीम के भी।

सचिन को लोग क्रिकेट का खुदा मानते हैं। सचिन से सब को बहुत उम्मीदें होती हैं और चाहे कोई कुछ भी कहे लेकिन सचिन को खेलते देखना अपने में एक अलग रोमांच भर देता है। यहां तक की गेंदबाज जो कि सचिन को गेंद डालता है वो भी रोमांचित हुए नहीं रह पाता। हर एक गेंदबाज का सपना होता है अपने करियर में सचिन को एक बार आउट करना। पर सवाल ये उठता है कि क्या क्रिकेट में सचिन का कद इतना बड़ा हो चुका है कि सचिन अपने चाहने वालों के अरमान को पूरा कर सकें? न्यूजीलैंड में न्यूजीलैंड की टीम के खिलाफ वन डे में शतक का अरमान? एक अच्छी ईनिंग का अरमान?
न्यूजीलैंड में सचिन के आंकड़े सचिन के बढ़ते कद को ठेंगा दिखाते हुए उनकी वहां पर नाकामयाबी की चुगली करते हैं। न्यूजीलैंड में सचिन 15 मैचों में 3 बार शून्य पर आउट हुए हैं, 3 बार तो 10 का आंकड़ा भी नहीं छू सके। सिर्फ 3 हाफ सेंचुरी और यदि देखें तो 1994 से लेकर अब तक सचिन के बल्ले को तलाश है एक हाफ सेंचुरी की। न्यूजीलैंड में अभी सचिन के बल्ले की प्यास शतक को लेकर नहीं बुझी है। तो क्या ये आंकड़े महान बल्लेबाज से सवाल नहीं करते कि क्या सचिन अपने चाहने वालों के अरमान को पूरा कर पाएंगे? श्रीलंका में तीन बार अंपायर की गलती तो सारी दुनिया मान रही थी पर क्या सचिन के रिफ्लेक्सिस ज्यादा धीरे नहीं हो गए जिसके कारण ना चाहते हुए भी सचिन के बल्ले की बजाय हर बार बॉल पेड पर लग जा रही थी।

माना जा रहा है कि भारत कि इस समय की टीम पहले की सभी टीमों से बेहतर है तो साबित करना होगा इस टीम को कि ये टीम सर्वश्रेष्ठ है। 1967 के बाद यदि ये करिश्मा कोई टीम कर सकती है तो वो ये ही टीम होगी। लेकिन पहले वन डे में 2003का बदला उतारना है फिर टेस्ट की बात करेंगे।
नेपियर में अब तक सचिन तीन बार खेलने उतरे हैं और दो बार दूसरे नंबर पर बल्लेबाजी की है। फरवरी 1995 में दूसरे मैच में 15 गेंदों पर 13 रन और तीसरे मैच जनवरी 1999 में 23 रन 19 गेंदों पर बनाए थे, जिसमें 4 चौके शामिल थे। दुआ है कि इस बार सचिन नेपियर में कामयाबी की ऊंचाइयों को छू लें।

बेस्ट ऑफ लक टीम इंडिया और बेस्ट ऑफ लक मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर।

आपका अपना
नीतीश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”