Monday, April 13, 2009

राह कठिन है डगर पनघट की


सचमुच, अभी दिल्ली दूर है। एक सीरीज क्या जीत ली कि बड़े-बड़े इरादे और वादे सामने आने लगे। माना सीरीज जीती है और एक हिंदुस्तानी होने के लिहाज से खुशी मुझे भी है। लेकिन ये बात बहुत अहम होती है कि आपने किस-किस के खिलाफ जीत दर्ज की है, उस सीरीज में था कौन-कौन? माना कि टॉप की टीमें तो थी ही नहीं। पहले (१) से लेकर छठे(६) नंबर तक कोई भी टीम हिस्सा नहीं ले रही थी। जो टीम हिस्सा ले रहीं थी उनमें से एक कि रैंक १५ (मलेशिया) और एक पहली बार (मिश्र) इस टूर्नामेंट में शिरकत कर रही थी। जो बाकी कि दो टीमें थी वो आपसे बेहतर रैंक पर थी। न्यूजीलैंड की रैंकिंग ७ और पाकिस्तान की ८ रैंकिंग थी। लेकिन दोनों टीमों ने इस बार अपने युवाओं को मौका दिया था और भारत के जोश के सामने वो दोनों ही टीमें टिक नहीं पाईं। जहां भारत की रैंकिंग १० है वहीं इस सीरीज से पहले भारत के कोच हरेंद्र सिंह ने कहा थी कि पिछले साल हमारा लक्ष्य था कि अजलान शाह के फाइनल तक पहुंचना और हम पहुंचे थे पर इस बार हमारा लक्ष्य ट्रॉफी है। ट्रॉफी के बाद उन्होंने और टीम ने कहा कि ये तैयारी २०१० के वर्ल्ड कप की है।

इस खुशी के पीछे कौन?

पर अभी भारत की परीक्षा की घड़ी तो बाकी है। यदि भारत एशिया कप जीत जाता है तो वर्ल्ड कप-२०१० में सीधे क्वालिफाई कर पाएगा। ये माना कि अपने ही घर में सौतेला व्यवहार झेल रही हॉकी टीम के लिए थोड़ा खुशी का मौका तो है ही। ये ये खुशी का मौका मिला लगातार हॉकी और लड़कों की तरफ ध्यान देने वाले कोच हरेंद्र सिंह और टैक्नीकल मैनेजर के रूप में टीम के साथ जुड़े धनराज पिल्लै के कारण। और साथ ही कप्तान संदीप सिंह के हौसलों के कारण और दलीप, प्रभजोत जैसे सीनियर्स की मेहनत। साथ ही जो एड हॉक कमेटी बनी है उसमें वो हैं जो हॉकी के लिए जान दिया करते थे। तो कैसे ना स्तर ऊपर उठता पर मंजिल अभी दूर है। याद आता है कि ऑपरेशन चक दे के कारण भारत की हॉकी को गर्क से निकाल दिया था और उस तानाशाह की तानाशाही को खत्म कर दिया था।

एशिया कप २००९

मलेशिया में ही ९ मई से १६ मई तक इस बार का एशिया कप खेला जाएगा। इस में जो टीमें हिस्सा लेंगी वो हैं- मेजबान मलेशिया और पाकिस्तान के अलावा भारत, कोरिया, चीन, जापान, बांग्लादेश, ओमान, सिंगापुर, श्रीलंका। पहली बार मलेशिया के राज्य पहांग की राजधानी कुआनतान में खेले जाएंगे जो कि कुआलालांपुर से २५० किलोमीटर की दूरी पर है। इसमें कोरिया ५वीं रैंक पर है, चीन की रैंकिंग १६, जापान की ११, बांग्लादेश की ३४, ओमान की रैंकिंग ५७ है, सिंगापुर की ४३ और श्रीलंका की ४१। तो भारत के लिए इस सीरीज में सबसे बड़ी चुनौती होंगे कोरिया, पाकिस्तान, जापान और मलेशिया। यदि २००५-०९ तक के एशिया कॉनटिनेंट के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले पायदान पर कोरिया और उसके पीछे भारत। जापान तीसरा, चौथा मलेशिया, पांचवां चीन, छठा पाकिस्तान का नंबर आता है। पर इसमें कोई दो राय नहीं कि पाकिस्तान की टीम कभी भी कोई उल्टपलट कर सकती है।

अजलान शाह २००९

१३ साल बाद भारत ने फिर से ये खिताब जीता। अजलान शाह में भारत के इतिहास पर नजर डालें तो ये चौथी बार भारत ने खिताब पर कब्जा किया। 1985, 1991, 1995 में भारत ने जीत दर्ज की है। दो बार 2006 और पिछले साल 2008 में भारत फाइनल में जगह बनाने में कामयाब भी रहा था। पिछले साल भारत को अर्जंटीना ने मात दी थी। वैसे ये दूसरी बार है जब भारत ने मलेशिया को फाइनल में मात दी है, १९८५ में भी भारत ये कर चुका है। पिछले साल जो टीम अंतिम पायदान पर थी वो इस बार फाइनल में भारत के साथ मुकाबले में उतरी। मलेशिया को लीग मैच में भारत ने 3-0 से करारी मात दी थी और फाइनल में ३-१ से मात दी। वैसे इस साल पांच देशों ने इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। भारत, मलेशिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, और पहली बार खेल रही मिश्र। भारत ने लीग मैचों में पाकिस्तान को 2-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। मिश्र के साथ मुकाबला 2-2 से बराबरी पर रहा और न्यूजीलैंड को भी भारत ने 2-2 से रोक दिया। वैसे इस बार सबसे कमजोर टीम मलेशिया को ही माना जा रहा था पर घरेलू जमीन पर खेलते हुए इसका फायदा मलेशिया ने खूब भुनाया और फाइनल तक की राह पकड़ी। मलेशिया की रैंकिंग 15 है, भारत की रैंकिंग 10 है, पाकिस्तान की 8, न्यूजीलैंड को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था जिसकी रैंकिंग 7 है। पर ऐसा हो ना सका और खिताब भारत ने जीत लिया।

संदीप सिंह ने सही किया कि ये जीत उस पिता के बेटे के नाम कर दी जिसे कंधा देने के बाद लड़का फिर से देश के लिए मैदान में कूद पड़ा। जय हो सुनील।



चक दे...

आपका अपना
नीतीश राज
(फोटो साभार-गूगल)

1 comment:

  1. आपको और आपके पुरे परिवार को वैशाखी की हार्दिक शुभ कामना !

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पोस्ट पर आप अपनी राय रख सकते हैं बसर्ते कि उसकी भाषा से किसी को दिक्कत ना हो। आपकी राय अनमोल है, उन शब्दों की तरह जिनका कोईं भी मोल नहीं।

“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”