Monday, November 17, 2008

युवराज ने फिर धोया अंग्रेजों को

पहला ४, दूसरा १५, तीसरा २९ पर भारत के विकेट गिर चुके थे। इस बार धोनी ने जीता था टॉस और पिछली बार की तरह पहले बल्लेबाजी फैसला गलत साबित होने वाला लग रहा था। पर जैसे कि गांगुली ने कहा था कि कप्तान के लिए जिस एक्सट्र लक की जरूरत होती है वो धोनी के पास है और हुआ भी कुछ ऐसा ही। पिछले मैच में युवराज ने महज ७८ गेंद पर नाबाद १३८ रन की पारी खेली थी। ठीक इस बार भी १२२ गेंद पर ११८ रन की शानदार पारी खेली जिसमें १५ चौके और २ लंबे छक्के थे।

ये यंग युवराज का जलवा है

इसे कहते हैं शानदार पारी। युवराज ने वापसी के बाद तो अपना जलवा दोनों मैचों में दिखाया है वो लाजवाब है। दूसरे वन डे में जब रनों के युवराज मैदान में आए तो सिर्फ आठवें ओवर में २९ रन पर ३ विकेट गिर चुके थे। फिटनेस से जूझ रहे २६ साल के युवराज के लिए ये परीक्षा की घड़ी के सामान थी। राजकोट में पीठ के दर्द के कारण एक दिन पहले तक लग रहा था कि युवी फिटनेस टेस्ट पास कर भी पाएंगे या नहीं। युवराज का साथ दिया दूसरी तरफ वन डे के राहुल द्रविड़ की जगह ले चुके मिस्टर भरोसेमंद गौतम गंभीर ने। गंभीर ने ५६ गेंदों पर अपनी हाफ सेंचुरी पुरी की और इसके साथ धोनी और गंभीर ने इस साल २००८ में १००० रन पूरे कर लिए। इस साल सिर्फ दो खिलाड़ी ही हैं जिन्हें ये खिताब मिला है। युवराज और गंभीर ने १३४ रन की साझेदारी की और भारत को सम्मानजनक स्कोर की तरफ बढ़ा दिया।

यूसुफ का साथ

अब बारी थी कप्तान की लेकिन कप्तान धोनी कमाल नहीं दिखा सके और महज १५ रन पर कोलिंगवुड ने उनके स्टंप बिखेर दिए। फिर आया वो शख्स जो टीम इंडिया को बड़े स्कोर की तरफ ले गया। यूसुफ पठान ने युवराज का साथ देते हुए टीम को एक ऐसी जगह पर ले गए जहां पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। युवराज ने कहा था कि वो तो सोच रहे थे कि २२५ रन का लक्ष्य काफी होगा इस पिच पर। और भारत ने बनाए २९२ रन जिसमें यूसुफ पठान के महज २९ गेंदों पर ५० रन शामिल हैं जिसमें ४ छक्के और २ चौके हैं। सहवाग, रैना, रोहित और युवराज स्टूअर्ट ब्रोर्ड के शिकार बने।

जोर का झटका धीरे से

इंग्लैंड पहले ही आधा मैच हार चुकी थी, ऐसी सोच रखने वालों को जोर का झटका जरा धीरे से लगा। पहले ओवर की आखिरी गेंद पर रैना ने जबरदस्त फुर्ती दिखाते हुए रोहित की तरफ खेली गई बैल की ड्राइव को बीच में लपककर स्टंप पर सटीक थ्रो से बैल को रन आउट कर दिया। प्रायर और शाह के बीच ९६ रन की साझेदारी हुई। इस बीच प्रायर को दो जीवनदान भी मिले और इंग्लैंड का स्कोर १०० का आंकड़ा पार कर गया। जहीर खान, आरपी सिंह, मुनाफ पटेल तीनों तेज गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए।

पहले बल्ले से रक्षक, फिर गेंद से भक्षक

युवराज ने अपना सबसे पहला शिकार शाह को बनाया, शाह की शानदार पारी १ छक्का और ८ चौकों की मदद से ५८ के निजी स्कोर पर समाप्त हुई। फिर प्रायर को अगले ओवर में कोई और जीवनदान युवराज ने नहीं दिया और क्लीन बोल्ड कर दिया। ये युवराज का दूसरा ओवर था लेकिन फिर फ्लिंटॉफ और कप्तान पीटरसन की जोड़ी ने मिलकर तेजी से रन चुराने शुरू किए। दोनों ने मिलकर १२ ओवर में ७४ रन की साझेदारी की। इस बीच ९ रन प्रति ओवर की औसत से रन चाहिए थे इंग्लैंड की टीम को, इसको कम करने के लिए ३२वें ओवर में पीटरसन ने तीसरा पावर प्ले लिया। इसका पूरा फायदा उठाते हुए फ्लिंटॉफ ने भज्जी के एक ही ओवर में ३ छक्के जड़ दिए। अंतिम पावरप्ले में इंग्लैंड ने ५९ रन बटोरे। अब १३ ओवर में चाहिए थे ११० रन। पर अपने आठवें ओवर में युवराज ने खतरा बनते पहले फ्लिंटॉफ को आउट किया और फिर पीटरसन को भी चलता कर दिया। प्रायर, शाह, फ्लिंटॉफ, पीटरसन सभी युवराज की तेज गति की गेंदों को समझ नहीं पाए। प्रायर और पीटरसन को क्लीनबोल्ड फिर शाह और फ्लिंटॉफ एलबीडब्ल्यू आउट किया।

बल्ले से ना सही गेंद से ही सही

बाकी बची कसर वीरेंद्र सहवाग ने पूरी कर दी। अभी सोचा जा रहा था कि कोलिंगवुड, बोपारा और पटेल कुछ कमाल कर सकते हैं पर तीनों खिलाड़ी कुछ कमाल नहीं कर पाए। वहीं सहवाग ने खतरनाक बनते पटेल को पहले आउट किया फिर ब्रोड और हारमीशन को भी चलता किया। सहवाग ने ५ ओवर में २८ रन देकर ३ विकेट झटके।
सीरीज में भारत २-० से आगे हैं और लगातार दो मैच जीतकर मेजबानों के हौसले जहां बुलंद हैं तो वहीं मेहमान ये सोचने पर मजबूर हैं कि क्या वो युवराज की आंधी को कभी रोक पाएंगे। फ्लिंटॉफ भी पंगा नहीं लेना चाहते क्योंकि पिछली बार पंगा लिया था तो ६ छक्कों की सौगात युवी ने भेंट के रूप में दी थी, अभी भूले तो नहीं होंगे फ्लिंटॉफ।

आपका अपना
नीतीश राज

3 comments:

  1. नीति‍श जी, मैच की बहुत अच्‍छी समरी सामने रख दी, आज पूरा मैच छूट गया कि‍सी जरूरी काम की वजह से मगर आपके ब्‍लॉग पर यह कमी पूरी हो गई। बहुत-बहुत शुक्रि‍या।

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  2. यह मैच हमारे शहर में हुआ ! पर आपकी रिपोर्ट पढ़ कर जो चित्र खिंचता है वह रूबरू देख कर भी मजा नही आता है ! हम गए थे स्टेडियम , बिल्कुल पास ही है , पहली समस्या पार्किंग, फ़िर कुछ भी सामान साथ नही ले जा सकते और अबकी बार हद हो गई जब पुलिसिये जी ने कहा - ताऊ ये बटुआ ( वेलेट) मुझे देदे ! ताऊ चौंके ! वो बोला - हां हाँ , सही कह रहा हूँ ! आप बटुआ नही ले जा सकते यह जमा करादो ! इसके रुपये आप निकाल लो ! अब जितने रुपये बटुए में थे उससे ज्यादा कीमत का तो हमारा बटुआ था ! आख़िर पैकिंग का ज़माना है ! :) सच मानिए , ऐसे लगा जैसे सजा काटने अन्दर जा रहे हो ! वहीं से वापस लौट कर आफिस के एक साथी को भेज दिया ! बाद में उसने बताया की दो घंटे की लाइन के बाद अन्दर पहुंचा ! और हम घर आकर सो गए ! बढिया रेस्ट करवा दिया इस मैच ने ! खैर .. आगे से हम तो आपकी रिपोर्टिंग ही पढेंगे ! बहुत धन्यवाद !

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“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”