"MY DREAMS" मेरे सपने मेरे अपने हैं, इनका कोई मोल है या नहीं, नहीं जानता, लेकिन इनकी अहमियत को सलाम करने वाले हर दिल में मेरी ही सांस बसती है..मेरे सपनों को समझने वाले वो, मेरे अपने हैं..वो सपने भी तो, मेरे अपने ही हैं...
Sunday, June 13, 2010
ये हुई ना बात
Thursday, January 28, 2010
पैसे के लिए कुछ भी करेगा। कभी ख़फा होगा, कभी खुद मान जाएगा, पर पैसा तो नहीं छोड़ेगा।
Tuesday, September 29, 2009
भारत में पाकिस्तान से ज्यादा पाकिस्तानी रहते हैं।
क्या हर एक भारतीय को उस पाकिस्तानी की ललकार का जवाब देने के लिए नहीं खड़ा होना चाहिए। यदि मुट्ठी में कोई भी उंगली कम बंद हो तो वो मुट्ठी मजबूत नहीं रह जाती। वैसे ही गर एक भी भारतीय पाकिस्तानियों की तरह सोचता है तो मुट्ठी बंध ही नहीं पाएगी। और अगर कोई सोचता है तो बेहतर है कि वो भारत को घुन की तरह ना खाए जाकर पाकिस्तान में ही बसे ’अपने भाइयों के बीच’।
Saturday, September 12, 2009
कल खुशी पर भारी पड़ा गम।
वैसे, मैं यहां पर बात क्या करने वाला था और क्या करने लग गया। कल के दिन खुशी मिली पर जब गम सामने आया तो वो खुशी पर भारी पड़ गया।
ऑफिस में इस बात का इंतजार हो रहा था कि क्या भारत आज का मैच जीत जाएगा। चार विकेट गिर चुके थे। मैं और मेरे साथ ही कुछ इस पर चर्चा भी कर रहे थे कि जब स्कोर छोटा होता है तो टीम इंडिया जरूर उतना ही मर मर कर जीतती है। ये नहीं कि शेर की तरह खेले और जल्दी जीत कर मैच को रफा-दफा करे। चार विकेट गिर चुके थे, द्रविड़ ने 65 मिनट क्रीज पर रहकर 45 गेंदों में महज 14 रन बनाए। द्रविड़ एक महान खिलाड़ी हैं पर क्यों द्रविड़ वन डे को भी टेस्ट की तरह खेलते हैं।
इस बीच एक खबर ने सब में रोमांच भर दिया। पहले था कि सीरीज जीतने पर ही टीम इंडिया नंबर वन बन पाएगी। पर अब ये खबर आई कि न्यूजीलैंड को हराने के साथ ही हम नंबर वन बन जाएंगे पर नंबर वन बने रहने के लिए कॉम्पेक कप जीतना जरूरी होगा। और थोड़ी देर बाद ही धोनी और रैना ने जीत दिला दी। धोनी और रैना दोनों की तारीफ करना चाहूंगा कि दोनों ने सूझबूझ कर बैटिंग की और अंत तक टिके रहे। आशीष नेहरा को मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया। सचिन को सम्मान के रूप में बाइक दी गई जिसपर इस बार सचिन खुद ही बैठे धोनी को बैठने का मौका नहीं दिया।
अब बात गम की भी कर लें।
अभी ऑफिस से घर की तरफ निकले ही थे कि पता चला कि डीडी ने सेमीफाइनल और फाइनल के राइट्स खरीद लिए हैं। अब तो लगा कि वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी भारत का झंडा ऊंचा होगा और विजेंदर अपने बाउट जीतकर फाइनल की जंग में पहुंच जाएगा।
पूरे ऑफिस में बताया गया कि रात के 1.30 बजे है बाउट। मैं घर पहुंच कर खाना पीना करके टीवी खोलकर कभी कुछ कभी कुछ देखते हुए जगने की कोशिश में लग गया। बार-बार न्यूज पर वापिस आता कि जब तक क्रिकेट का ही लुत्फ ले लिया जाए। दिल में एक इच्छा थी कि विजेंदर जीत जाए क्योंकि हाल ही में करोड़ों का मुनाफा हुआ है विजेंदर को।
इतिहास तो विजेंदर ने भी रच ही दिया है। पहली बार कोई भारतीय बॉक्सर इस ऊंचाई तक पहुंच पाया है। यदि विजेंदर जीत जाए तो अच्छा होगा क्योंकि बहुत हो लिया क्रिकेट। पर ये ही सोचते-सोचते कब नींद आगई पता ही नहीं चला। सुबह जब उठा तो तुरंत टीवी चलाया देखा तो हर न्यूज चैनल पर सिर्फ क्रिकेट ही क्रिकेट चल रहा था। लग गया कि विजेंदर का क्या हुआ। यानी हार गया विजेंदर।
जी हां, उजबेकिस्तान बॉक्सर अब्बोस अतोव जिसकी रैंक इस चैंपियनशिप में चौथी थी उसने पहली रैंक विजेदर को 7-3 से मात दे दी। जबकि पहले राउंड में 0-1 से आगे चल रहा थे विजेंदर। पर दूसरे राउंड में ज्यादा डिफेंसिव मोड विजेंदर को हार के कगार पर ले गया। और उजबेक बॉक्सर ने दूसरे राउंड में 5 अंक बटोर लिए और फिर अंतिम राउंड में तो सिर्फ खानापूर्ति ही रह गई। अतोव ने 2007 में लाइट वेट में वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल जीता था और वो भी तब जब कि वो बाउट के दौरान प्रतिद्वंदी के पंच के कारण नीचे गिर गए थे। दूसरे राउंड के बाद स्कोर 5-1 था और अंत में 7-3 से विजेंदर हार गया और मुझे लगता है कि बॉक्सिंग का फ्यूचर भी हार गया।
मैंने टीवी बंद कर दिया था। सोच रहा था कि आज भी दो मैच हैं। जहां एक जगह टीम इंडिया श्रीलंका से भिड़ेगी, वहीं दूसरी तरफ जीतेगा भी भारत और हारेगा भी भारत। अमेरिकी ओपन टेनिस चैंपियनशिप में भूपति और पेस होंगे आमने-सामने। देखते हैं कि खुशी मिलती है या फिर आज का पार्ट-2।
Friday, August 28, 2009
11 दिन के बीते पन्ने
शाहरुख को अमेरिका में एक एयरपोर्ट पर करीब दो घंटे तक रोके रखा गया, जसवंत सिंह की किताब पर बवाल, खेमों में बंटी बीजेपी, मोदी ने जसवंत की किताब पर लगाया बैन पर दूसरे बीजेपी शासित राज्यों के सीएम ने किया इनकार, बीजेपी से निकाले गए जसवंत सिंह और सुध्रींद्र कुलकर्णी, और वहीं दूसरी तरफ किताब पर अरुण शौरी के तीखे तेवर, अब यशवंत सिन्हा का भी आडवाणी पर निशाना। वसुंधरा राजे का नया मोर्चा, खेल की खबरों में ऐशेज में ऑस्ट्रेलिया हारा और खिसका चौथी रैंक पर वहीं भारत दूसरी पायदान पर, ओलंपियन और ब्रान्ज मेडलिस्ट मुक्केबाज विजेंद्र कुमार वर्ल्ड के दूसरे नंबर के बॉक्सर बन गए और ऐसी ही बहुत सी खबरें थीं जिनपर लिखना चाहते हुए भी मैं लिख नहीं पाया था।
सबसे पहले बात शाहरुख खान की।
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान आजादी के दिन एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए यूएस जाते हैं और वहां पर किंग खान को दो घंटे तक रोक कर पूछताछ की जाती है। बकौल शाहरुख उनसे पूछताछ उनके नाम में जुड़े ‘खान’ के कारण की गई। वहां शाहरुख के साथ ऐसा हुआ यहां देश में लोग आगबबूला हो गए। अंबिका सोनी ने तो यहां तक कह दिया कि अमेरिकन सेलिब्रिटिज जब भारत आएं तो उनके साथ भी ऐसा ही बर्ताव हो। पर वहीं सलमान खान सामने आए और फिर शुरू हुई खान वॉर। सल्लू ने कहा ये तो होता ही रहता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पर अब उसी फजीहत से बचने के लिए सल्लू आने वाली फिल्म ‘वॉन्टेड’ के प्रमोशन के लिए अमेरिका नहीं जा रहे हैं।
शाहरुख ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सब सवालों के जवाब भी दिए। जब ये बात सामने आई तो शाहरुख ने कहा कि नेवार्क एयरपोर्ट के अधिकारियों का रवैया ठीक नहीं था पर जो हुआ सो हुआ अब इस बात को तूल नहीं देना चाहिए। फिर पहले तूल क्यों दिया गया? इस पर एस पी महासचिव और अमिताभ बच्चन के मुंह बोले भाई अमर सिंह बीच में कूद पड़े और कहा कि ये तो आने वाली फिल्म को लेकर शाहरुख खान का पब्लिसिटि स्टेंट है।
बीजेपी में किताब पर कलह।
शिमला में बीजेपी की चिंतन बैठक से पहले जसवंत की लिखी किताब पर उठी चिंता को दूर किया गया और उन्हें निष्कासित कर दिया गया। 30 साल की बफादारी एक फोन पर ही खत्म कर दी गई। आज तक भारतीय इतिहास में हम ये पढ़ते आए हैं कि भारत को आजादी महात्मा गांधी ने दिलवाई। आजादी में योगदान पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने देश को एकजुट किया पर ये हमारे हीरो हैं। साथ ही जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग की और आजादी के साथ विभाजन के दर्द का विलेन उन्हें माना गया। पर जिन्ना को हीरो और पंडित नेहरू और सरदार मोदी को विलेन के कठघरे में लाकर जसवंत सिंह ने खड़ा कर दिया। यहीं से बवाल की शुरूआत हुई। मोदी ने किताब में सरदार पटेल के बारे में गलत लिखने पर गुजरात में बैन कर दिया। वहीं कुछ और बीजेपी शासित राज्यों में बैन नहीं लगाया गया। और ये टकराव सामने आया जो कि मोदी के खिलाफ खड़ा नजर आया। सुध्रींद्र कुलकर्णी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। किताब और कई मुद्दों पर अरुण शौरी ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा और संघ को अपना चाबुक चलाने के लिए कहा।
जसवंत सिंह ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने आडवाणी को बचाया। उसी बात को ब्रजेश मिश्र और यशवंत सिन्हा दोनों ने आगे बढ़ाया। वहीं राजनाथ और आडवाणी के फरमान को दरकिनार करते हुए वसुंधरा राजे आज भी पद पर कायम हैं। कुछ भी हो आगे आने वाले दिनों में संघ का प्रभुत्व बीजेपी पर भारी पड़ेगा। जैसे कि पहले हुआ करता था। अभी जल्द ही कुछ और फेरबदल देखने को मिल सकता है।
नाक कट गई ऑस्ट्रेलिया की
इंग्लैंड से एशेज सीरीज 2-1 से हारकर ऑस्ट्रेलिया चौथे नंबर पर पहुंच गया। टेस्ट रैंकिंग में वो कभी चौथे पायदान पर लुढ़क जाएगा शायद ऐसा कभी ऑस्ट्रेलिया ने नहीं सोचा होगा। ये इतिहास में पहली बार हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया के एक ही कप्तान ने दो बार अपने कार्यकाल में एशेज गंवाई हो। 2005 के बाद 2009 ने ऑस्ट्रेलिया की शर्मनाक हार हुई। वहीं इंग्लैंड के ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ को उनकी टीम ने एक खूबसूरत विदाई दी। विवादित खिलाड़ी फ्लिंटॉफ को हम भारतीय तो युवराज के कारण ही याद रखेंगे जब कि 20-20 में युवी से फ्लिंटॉफ नहीं भिड़े होते तो ब्रोड को युवी 6 छक्के नहीं मार पाते।
डीडीसीए में जिस्मफरोशी
सहवाग के इल्जामों की झड़ी अभी रुकी नहीं थी कि कीर्ती आजाद ने ये कहकर सनसनी फैला दी कि दिल्ली के क्रिकेट में लड़कियां सप्लाई की जाती है। मतलब साफ था कि यदि किसी खिलाड़ी को चुना जाना है तो उसे कीमत अदा करनी होगी और वो कीमत लड़की के रूप में देनी होगी। युवराज ने भी आरोप लगाए कि उनके साथ भी छोटे स्तर पर भेदभाव हो चुका है और ये सब उनको सहना पड़ा है। पर ये पता नहीं कहा तक सच है क्योंकि योगराज के बेटे के साथ यदि नाइंसाफी हो सकती है तो फिर किसी के साथ भी हो सकती है।
कुछ और खबरों के अलावा ये वो खबरें थीं जिन पर मैं लिख नहीं सका पर हां इतिहास के पन्नों को फिर से पलट कर देखने की इच्छा हो उठी क्योंकि कुछ बातें तो जसवंत सिंह ने सही कहीं हैं पर मैं उनकी हर बात से इत्तेफाक नहीं रखता। मैंने इसके पीछे काफी रिसर्च की है। जिन्ना यदि इतने ही सेकुलर थे या फिर इतने ही बड़े आजादी के नेता थे तो कहीं पर भी उनका जिक्र क्यों नहीं आता। क्यों सिर्फ पाकिस्तान में ही वो जाने जाते हैं। क्यों 1927 के बाद ही उनकी तरफ से ये पहल हुई कि मुस्लमानों के लिए एक अलग राष्ट्र होना चाहिए थे। सुभाष चंद्र बोस क्या बंगालियों के लिए लड़ रहे थे। इतिहासकार कहते हैं कि यदि बोस गायब नहीं हुए होते तो शायद भारत 1945 में ही आजाद हो गया होता। तो जिन्ना को हीरो बनाने के पीछे क्या कारण है। और सबसे बड़ा सवाल जिन्ना के दादा हिंदू थे फिर भी हिंद राष्ट्र से क्यों जलन थी जिन्ना को। कौन थे ये कायदे आजम। भारत के इतिहास के पन्नों पर लिखी आजादी के वो अनछपे पन्नों के बारे में लिखने की कोशिश में।
आपका अपना
नीतीश राज
Wednesday, June 10, 2009
उपकप्तान तो आउट, Now Mind it Captain Dhoni
सहवाग को चोट इतनी बुरी लगी कि वो बल्ला तक ठीक से नहीं पकड़ पा रहे थे। प्रैक्टिस सेशन के दौरान वीरू को कंधे में चोट लगी थी। वैसे यदि देखें तो ये सहवाग के लिए ये वक्त किस बुरे सपने से कम नहीं है। दो महीने बाद 31 साल के सहवाग के लिए वापसी कोई आसान बात नहीं होगी। लेकिन ये बात तो सही है कि इस खबर से उन धुरंधर गेंदबाजों ने राहत की सांस ली होगी जिनको वीरू के खिलाफ गेंदबाजी करनी होती थी।
जब सहवाग को इतनी गहरी चोट लगी हुई थी तो बोर्ड ने ये बात छुपा के क्यों रखी। क्यों बोर्ड ये बताने से कतराता रहा कि वीरू पूरी तरह से फिट नहीं हैं? इसका खामियाजा पूरी टीम को उठाना पड़ा। धोनी और वीरू के बीच की खाई बढ़ती चली गई और फिर वो इतनी बढ़ी कि धोनी ने पूरी टीम की एकता परेड करा दी जो कि अब तक दिखावा थी या एकता ये समझ में नहीं आपाई है। वहीं दूसरी तरफ जब धोनी से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीरू के खेलने के बारे में पूछा गया तो धोनी का जवाब था 'नो कमेंट', बोर्ड से पूछें। थोड़ी ही देर में बीसीसीआई ने एक प्रेस रिलीज जारी किया जिसमें वीरू को पूरे वर्ल्ड टी-20 से चोट के कारण आउट कर दिया गया।
वैसे सहवाग की जगह पर दिनेश कार्तिक को इंग्लैंड भेजा जा रहा है। कार्तिक के जाने से भारत के लिए दूसरे कीपर की समस्या भी खत्म हो गई। और जहां तक सवाल है रोहित शर्मा का तो रोहित ने सहवाग की जगह पर ओपनर के रूप में पहले दो अभ्यास मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 31, पाकिस्तान के खिलाफ 80 और पहले मैच में बांग्लादेश के खिलाफ 36 रन बनाए थे।
टीम इंडिया के लिए वीरू का जाना एक बहुत बड़ा झटका है। अभी तक भले ही सहवाग की कमी नहीं अखरी हो पर जैसे-जैसे टूर्नामेंट अपने अंजाम तक पहुंचता रहेगा टीम को वीरू की कमी खलेगी। वीरु का जाना धोनी के लिए किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं है। धोनी को उपकप्तान की गैर मौजूदगी में अपनी रणनीति फिर से बनानी होगी। साथ ही क्या रोहित और युवराज मिलकर भी सहवाग की खाली जगह को भर पाएंगे? ये सवाल धोनी के लिए एक पहेली जरूर रहेगा।
आपका अपना
नीतीश राज
Thursday, June 4, 2009
भारत ने पाकिस्तान को धो डाला, 20-20 में जमाई पाक पर जीत की हैट्रिक
पाकिस्तान ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। मैच की शुरुआत में तो लगा कि पाकिस्तान इस बार कुछ गजब कर के ही मानेगा। लेकिन पहले ही ओवर में प्रवीण कुमार ने ओपनर हसन को बिना खाता खोले क्लीन बोल्ड कर दिया। भारत के प्रशंसकों में खुसी की लहर दौड़ गई। पर दूसरे ओवर से चौथे ओवर तक खुश होना पाकिस्तान के खेमे में लिखा था। कामरान अकमल के साथ 17 साल के अहमद शहजाद ने हर ओवर की गेंदों को बाउंडरी पार पहुंचाना शुरू कर दिया। देखते-देखते महज चार ओवर में पाक का स्कोर 45 पहुंच गया।
अब खुश होने की बारी भारत की थी। कामरान अकमल को रैना ने शानदार फील्डिंग का नमूना दिखाते हुए रन आउट कर दिया। पांचवें ओवर में ही ईशांत की आखरी गेंद पर शहजाद ने लंबी शॉट खेलने में चूक कर दी और फिर रैना ने एक आसमान चूमती गेंद को लपककर पाक खेमें में सनसनी फैला दी। पर अभी तो कहर बाकी था। अगले ओवर में पठान की पहली ही गेंद पर कप्तान धोनी ने शानदार कैच लपककर शाहिद आफरीदी को बिना खाता खोले पवैलियन लौटा दिया।
कप्तान यूनिस खान और शोहेब मलिक ने टीम को संभालने की कोशिश की पर मलिक ने ओझा की एक गेंद में चूक कर दी और धोनी ने कोई गलती नहीं की। यूनिस खान ने कुछ शानदार शॉट खेले पर हरभजन सिंह की फिरकी में फंस कर वो क्रीज से नहीं निकलना चाहते हुए भी आगे निकल आए और धोनी ने वापसी का मौका नहीं दिया। मिसबाह और यासिर अराफात ने मिलकर स्कोर को 113 से 158 तक पहुंचा दिया वो भी सिर्फ 25 गेंदों में। भारत के सामने जीत का लक्ष्य था 159।
भारत बिना सहवाग के खेल रही थी। तो ओपनिंग की बागडोर संभाली रोहित शर्मा और गंभीर ने। शुरूआत से ही दोनों ने हाथ दिखाने शुरू कर दिए। गेंदबाज ये समझने में दिक्कत महसूस करने लगे कि गेंद डालें तो कहां? इस मैच में रोहित शर्मा ने ही गेंद को हवा में बाऊंड्री के पार पहुंचाया। रोहित ने महज 53 गेंदों में 80 रन बनाए जिसमें 9 चौके और दो शानदार छक्के शामिल थे। आमेर ने शहजाद के हाथों 16वें ओवर में भारत के 140 के आंकड़े पर रोहित को कैच आउट करवा दिया। तब भारत को जीत के लिए 18 रन की दरकार थी। जिसे गंभीर और धोनी ने मिलकर 18 गेंद रहते ही हासिल कर लिया। गंभीर ने 5 चौकों की मदद से 47 गेंद पर 52 रन बनाए और वो धोनी के साथ अंत तक नाबाद रहे। आखिर एक ओपनर तो फॉर्म में लौटा।
20-20 फॉर्मेट में ये भारत की पाकिस्तान पर लगातार तीसरी जीत थी।
आपका अपना
नीतीश राज
Wednesday, May 13, 2009
ये लो आगए फिर रंग में सचिन
किंग्स इलेवन ने दूसरी भिड़ंत में भी 119 रन ही बनाए और जीत के लिए 120 की चुनौती मुंबई इंडियंस के सामने रखी। और मैच में टॉस हारने के बावजूद सचिन ने कप्तानी का सही रुख दिखाते हुए तीसरे ओवर से ही गेंदबाजों को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। फिर भज्जी को गेंद पकड़ाई और भज्जी ने कमाल ही कर दिया। सबसे खतरनाक खिलाड़ी संगकारा को आउट कर दिया। साथी ही ड्यूमनी को भी सचिन ने मौका दिया। ड्यूमनी ने भी युवराज को आउट कराके मुंबई की कमर ही तोड़ दी। सचिन ने फील्डिंग में भी कमाल दिखाया और सोहल जो कि खतरनाक बन रहा था उसे रन आउट किया।
जब बल्लेबाजी की बात आई तो सचिन ने गजब का आत्मविश्वास दिखाते हुए ब्रावो से ओपन करवाया और साथ ही जयसूर्या के आउट होने के बाद पिछले मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले राहणे को मैदान में उतारा। फिर रहाणे के आउट होने के बाद खुद मैदान में आए। चाहते तो ड्यूमनी को भेजा जा सकता था पर नहीं। अपनी परर्फोरमेंस को सुधारने का जज्बा लेकर सचिन मैदान में उतरे और 40 से 122 तक टीम को पहुंचाया। साथ ही ब्रावो का उत्साहवर्धन भी करते रहते। जहां ब्रावो ने श्रीशांत को छक्के मारे वहीं घातक बनते हुए पीयूष चावला को सचिन ने भी शानदार छक्का जड़ा।
माना कि अभी आईपीएल का सफर बहुत बाकी है और सचिन को हमेशा से ही बार-बार अपने आप को साबित करते रहना पड़ेगा खासकर टीम के लिए। वैसे पूरी दुनिया में कोई भी सचिन से साबित करने की बात तो कहने नहीं जा रहा। पर ट्वेंटी-20 में जैसी कप्तानी और परफोर्मेंस एक खिलाड़ी से चाहिए वहां पर अभी सचिन पूरा नहीं दे पा रहे हैं।
आपका अपना
नीतीश राज
Tuesday, March 31, 2009
यादों के झरोखों से
वहां पहुंचते ही मेरी यादें मुझे ले जाती हैं उस समय में, जब हमारे घऱ पर बिना कारण लोगों का जमावड़ा लगा होता था। नीम के पेड़ के नीचे बैठकर राजनीति, फसल, गांव और बच्चों के भविष्य की चिंता पर हुक्का पीते हुए बहस किया करते थे। एक-दो बच्चों का ये ही काम होता था कि हुक्के को ठंडा ना होने दें। बातों के दौर के बीच हुक्के की गुड़गुड़ाने की आवाज़। ये सिलसिला कई दशकों पुराना है, हमारे दादा के दादा भी इसी तरह बैठ कर बातें किया करते थे।
जब भी अपने घर के आंगन में खड़ा होता हूं तो यादें २०-२५ साल पीछे ढकेल देती हैं। तब मैं गर्मियों की छुट्टियों में कुछ दिन के लिए यहां आया करता था। आंगन में सब मर्द बैठा करते थे। वहीं थोड़ी सी दूरी पर बंधे होते थे जानवर, गाय, भैंस, बछड़ा, बैल, भैंसा। इन जानवरों की देखभाल के लिए कोई ना कोई हमेशा लगा रहता था। वहीं पास में हम सब बच्चे, या तो खेल रहे होते या फिर बड़ों की बातें सुन रहे होते।
जब १९८३ में भारत ने क्रिकेट में वर्ल्ड कप जीता तो क्रिकेट की भी चर्चा खूब हुआ करती। नाम भूल रहा हूं उनका, उन्होंने शौक में ही अपने बच्चों के नाम पाकिस्तान की टीम पर रख दिए, बड़े का इमरान, उससे छोटा, वसीम,....। वो बोलते कि पाकिस्तान के पास इमरान है तो क्या हुआ...हमारे पास भी इमरान है....बेटे चल इमरान अंकल की बोल पर छक्का जड़ के दिखा। और महफिल में ठहाका गूंज उठता था, सब कहते, मियां उस इमरान को दुनिया नहीं खेल पाती, ये पिद्दी क्या खेलेगा? तेश में आकर वो १२ साल का लड़का कहता कि एक दिन जरूर छक्का मारूंगा।
आज जब अपने आंगन में खड़ा होता हूं तो पाता हूं कि नीम का वो पेड़ आज भी वहां ही है, दूसरा काट दिया गया। अब हुक्का जल्दी ठंडा नहीं होता, उसकी गुड़गुड़ भी काफी देर बाद सुनाई पड़ती है। उस आंगन में अब चाचा जी अकेले बैठे रहते हैं जब उनको याद आती है कि हुक्का साथ दे रहा है तो गुड़ गुड़ा लेते हैं।
(ये बात सिर्फ आंगन की है, हमारी तरफ इसे ‘घेर’ कहा जाता है। औरतों के लिए इस घेर के पीछे बड़ी जगह होती थी वहां पर भी ऐसे ही मंडली लगा करती थी)
आपका अपना
नीतीश राज
Monday, March 9, 2009
सचिन ने पूरा किया अपने चाहने वालों का अरमान
न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर की फील्डिंग।
क्राइस्टचर्च में भारत ने अभी तक ५ वन डे खेले थे और एक भी नहीं जीता था। 6ठे वन डे में भारत क्राइस्टचर्च में जीत की दरकार के साथ फील्ड पर उतरा। डेनियल विटोरी की पत्नी प्रेग्नेंट हैं तो विटोरी अपनी पत्नी के पास रहे पर मैच में बीच-बीच में दिखते रहे। इस लिए आज मैच की कप्तानी पहली बार मैक्कुलम ने की और टॉस जीतकर विटोरी के ना होने पर पहले फील्डिंग चुनी। पर मैक्कुलम को क्या पता था कि उनकी कप्तानी में रिकॉर्ड बनने वाला है न्यूजीलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा रन। शुरुआत में लगा कि मैक्कुलम का ये फैसला टीम के लिए सही साबित हुआ जब कि सहवाग महज 3 रन बनाकर एक सीधी गेंद को छोटी बाउंडरी से बाहर पहुंचाने के चक्कर में मिस कर गए और क्लीन बोल्ड हो गए। भारत ने अपना पहला विकेट 15 के स्कोर पर खो दिया। फिर गंभीर ने सचिन का साथ दिया और सचिन अपनी लय में खेल रहे थे। तभी गंभीर 15 के निजी स्कोर पर बटलर का शिकार बने। भारत के स्कोरबोर्ड पर 13 ओवर में 65 रन हो चुके थे पर 2 विकेट भी खो दिए थे।
सचिन-युवराज की जोड़ी ने क्राइस्टचर्च में मचाया कोहराम।

सचिन रिटायर्ड हर्ट।
युवराज के बाद कप्तान धोनी 5वें नंबर पर बैटिंग करने उतरे। युवराज के जाने के बाद ऐसा लग रहा था जैसे सचिन ने युवराज की जगह ले ली है और भारत के स्कोर को तेजी से बढ़ाने लगे। सचिन ने मैदान के हर कोने में स्ट्रोक खेले। पर कप्तान और सचिन के बीच की साझेदारी 135 रन की ही हो सकी। लेकिन इस बीच सचिन काफी देर से एक दिक्कत से गुजर रहे थे। सचिन के पेट की मसल खिंच चुकी थी जिसे की वो काफी देर से दबा कर खेल रहे थे। पर अब बात बढ़ चुकी थी। सचिन दोहरे शतक से सिर्फ 37 रन दूर थे तब वो मैदान से बाहर आगए।
सचिन की इस पारी के लिए न्यूजीलैंड के कप्तान मैक्कुलम ने कहा कि, 'मैंने ऐसी पारी काफी कम देखी हैं। हर शॉट उनके बल्ले के मिडल से गया।' इस शानदार पारी के लिए सचिन को मैन ऑफ द मैच मिला।
रैना बने रनमशीन।
18 गेंदें, 38 रन, 5 छक्के। ये था रैना का आंकड़। इस पूरी सीरीज में रैना ने कमाल की बैटिंग की है। पहले वन डे में भी रैना ने 5 चौके और 4 छक्के लगाए थे। जब भारत का स्कोर 382 पहुंचा तो धोनी 5 चौके और 2 छक्कों की मदद से 68 रन पर मिल्स की गेंद का शिकार बने। लेकिन तब तक भारत की तरफ से क्राइस्टचर्च के पांच नायक काम कर चुके थे। भारत ने न्यूजीलैंड के सामने रखा 393 का लक्ष्य। ये न्यूजीलैंड में किसी भी टीम का सर्वाधिक स्कोर था।
भारत को मिली कड़ी टक्कर।
राइडर और इस मैच के लिए कप्तान बने मैक्कुलम ने बताया कि वो भी दम रखते हैं। राइडर ने शुरू से समझदारी से बैटिंग की और साथ ही मैक्कुलम को जब भी कहीं रन लेने का मौका मिला वहां पर उन्होंने रन चुराया। शुरूआत में भारत की फिल्डिंग अप टू डेट नहीं थी और कई बार मिस फिल्डिंग हुई और इस का फायदा न्यूजीलैंड के ओपनरों ने खूब उठाया। पूरा ओवर ठीक पड़ता लेकिन दो गेंद गलत हुई नहीं कि जितने की दरकार थी उनको वो रन निकालते। दोनों ओपनर गेंदबाजों के पास उन दोनों बल्लेबाजों का तोड़ नहीं मिल रहा था। गेंदबाजों को बदला गया लेकिन फिर भी कोई भी फायदा नहीं हुआ और न्यूजीलैंड ने 50 फिर 100 और फिर 150 रन बिना विकेट खोए बना लिए। फिर एक छोटी सी चूक और रैना की फुर्ती ने मैक्कुलम को रन आउट कर दिया और यहां से गेम पलट गया। मैक्कुलम ने 71 रन बनाए जिसमें 6 चौके और 3 छक्के शामिल थे। पहला विकेट 166, दूसरा 179, तीसरा 182, चौथा 188, पांचवां 203, छठा विकेट 217, सांतवा 218 यानी कि इस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ 52 रन के अंदर 7 खिलाड़ी न्यूजीलैंड ने खो दिए। बाकि तो कुछ नहीं कर पाए लेकिन राइडर को भज्जी ने आउट किया जब कि राइडर 105 पर खेल रहे थे जिसमें 12 चौके और 4 छक्के लगाए थे।
आंठवें विकेट के लिए 83 रन की साझेदारी ने भारत के लिए एक बार तो मुश्किल खड़ी कर दी थी। लग ये रहा था कि कभी भी ये मैच भारत के हाथ से निकल सकता है। यहां पर विटोरी की कमी न्यूजीलैंड को और भारत को ईशांत शर्मा की कमी खली। सबसे ज्यादा खेल के लिहाज से गलत ये हुआ कि जब भारतीय टीम को विकेट नहीं मिल रहे थे तब मुनाफ पटेल ने दो लगातार बीमर डाल दी जिसके कारण अंपायर ने उन्हें बॉल करने से मना कर दिया। पर फिर एक विकेट यूसुफ और दूसरा विकेट प्रवीण कुमार ने लेकर न्यूजीलैंड की टीम की पारी समाप्त कर दी।
कुछ दिलचस्प जानकारी
इस मैच की दोनों पारियों में 726 रन बने जो कि दूसरा एक मैच में सबसे ज्यादा स्कोर रहा। सचिन को 58वीं बार मैन ऑफ द मैच का खिताब मिला जो कि सबसे ज्यादा है। दोनों पारियों में लगे 31 छक्के जो कि अपने में एक रिकॉर्ड है। भारत ने लगाए एक पारी में 18 छक्के जो कि रिकॉर्ड की बराबरी है।
पर कुछ भी हो सचिन ने अपने चाहने वालों का अरमान पूरा तो कर ही दिया।
आपका अपना
नीतीश राज
Friday, March 6, 2009
लाहौर हमला, तीन थ्यौरी पर भारत महफूज
१) तालिबान की करतूत
२) पाक के बाहर की शक्ति यानी भारत, एलटीटीई। (इसे वैसे तो खारिज कर दिया है पर फिर भी उंगली उठाने की फिराक में तो होंगे)
३) किसी घरेलू संगठन का हाथ। चाहे वो आईएसआई हो या फिर नवाज की पार्टी।
अब बताते हैं कि क्यों ये तीन थ्यौरी सामने आ रही हैं।
पहली थ्यौरी यानी तालिबान की करतूत। पाकिस्तान के बहुत बड़े सियासी हल्कों में ये माना जा रहा है कि श्रीलंका की टीम पर जो हमला हुआ है वो तालिबान का पाकिस्तान पर बढ़ते वर्चस्व की निशानी है। जैसे कि तालिबान में हमेशा से ही पढ़ाई, सिनेमा, औरतों का बेपर्दा होने और खासतौर पर खेल पर काफी कड़े और सख्त कानून बनाए हुए हैं। तालिबानी नहीं चाहते कि क्रिकेट जैसा खेल वो या फिर उनके देश में खेला जाए और जब से स्वात पर अपना कब्जा तालिबान ने किया है तब से पाकिस्तान को अपने देश का हिस्सा मानने लग गया है तालिबान। साथ ही स्वात के बाद पूरे पाकिस्तान पर तालिबान अपना अधिपत्य जमाना चाहता है। वैसे अभी तक तफ्तीश में ज्यादातर अफगानियों को ही पकड़ा गया।
दूसरी थ्यौरी यानी पाक के बाहर की शक्ति भारत,एलटीटीई। मुंबई हमलों का दोषी पाकिस्तान को माना गया और अब तो ये साबित भी हो गया कि 26/11 की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी, हमलावर पाकिस्तान से आए थे और सारे दोषी पाकिस्तान में ही हैं। तो पाकिस्तान में ये मानने वालों की कमी नहीं है कि लाहौर हमला भारत के आंतकवादी गुट या फिर भारत की किसी खुफिया एजेंसी की कारसतानी है। बाघा बार्डर के रास्ते आए थे आतंकी पहला वक्तव्य था पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक आला अधिकारी का। दूसरी बात, लाहौर हमला मुंबई हमले का पार्ट-2 माना जा रहा है और इसी कारण से ये माना गया कि भारत की तरफ से उसी तरह इस हमले को अंजाम दिया गया जिस तरह से मुंबई हमलों को दिया गया था। यानी भारत ने बदला उतार लिया है। जब कि सारी दुनिया इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती। श्रीलंका में एलटीटीई पर हमले के बाद से ये माना जा सकता था कि ये हमला वो भी करवा सकता है पर सोचने वाली बात ये है कि अभी तो वो श्रीलंका में ही अपने आप को बचाए रखने में असमर्थ हैं तो वो कहां से पाकिस्तान में अफगानी कपड़े पहनकर हमला करेंगे और यदि वो करते तो रॉकेट लॉन्चर और ग्रेनेड चूकता नहीं। पर इस थ्यौरी को पाकिस्तानी सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। अब देखेंगे कि पाकिस्तानी मीडिया क्या कहता है?
साथ ही बड़े केनवस पर देखें तो लोगों का ये मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत को इस हमले से कई फायदे हो सकते हैं। पाकिस्तान को एक आतंकवादी राष्ट्र घोषित किया जा सके(जो कि पाकिस्तान है)। साथ ही ये कि भारत कितना असुरक्षित है अपने पड़ोसी से और इस पड़ोसी से भारत को हमेशा ही खतरा बना हुआ है। आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण पाकिस्तान को अमेरिकी मदद भी नहीं मिलेगी।
तीसरी थ्यौरी यानी किसी घरेलू संगठन का हाथ। चाहे वो आईएसआई हो या फिर नवाज की पार्टी। सबसे ज्यादा जो बात चल रही है कि ये जरूर से ही किसी घरेलू संगठन का हाथ हो सकता है। अंतिम वक्त पर बस के रूट में फेरबदल किया गया या नहीं किया गया वो ही रूट रखा जिससे एक दिन पहले गए थे इस पर भी शुरूआती बयान एक जैसे नहीं थे। माना ये भी जा रहा है कि किसी फोन के आने के बाद रूट में फेरबदल से इनकार किया गया था। जब दोनों टीमें एक साथ होटल से निकलती हैं तो पाकिस्तान की टीम श्रीलंका की टीम के साथ क्यों नहीं निकली। क्यों यूनुस खान ने अपनी टीम को ५ मिनट के लिए और रुकने को कहा? क्या कारण है इसके पीछे, ये सवाल तो खुद अंपायरों तक ने अपनी पीसी में कहा था।
जब ४८ घंटे पहले ही पंजाब प्रांत के पुलिस के आला अफसरों को ये बताया जा चुका था कि जल्द ही श्रीलंका की टीम को निशाना बनाया जा सकता है तब भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। खुद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान खान ने सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल उठाए हैं। जहां मिलने थे ७० सिपाही वहां मिले महज़ २५? तो क्या गलती ये सरासर लाहौर पुलिस की नहीं है। अंपायर क्रिस ब्राड ने ये बताया कि जब हमला हुआ तो पाकिस्तानी पुलिस वहां से भाग गई, कोई भी मदद के लिए नहीं था, हम वहां पर अकेले छूट गए थे। तो क्या इसे पुलिस की बुजदिली नहीं कहेंगे।
वैसे भी ये सही है जो अधिकतर आक्रमण करता हो तो उसे ये नहीं पता रहता कि बचाव कैसे करना है, वो ही हुआ पाकिस्तानी लोगों के साथ। अधिकतर वो भारत पर हमले की बात सोचते हैं जब हमला हुआ तो बचाव नहीं सोच सके।
यदि आतंकवादियों का मकसद श्रीलंका की टीम को मारना ही होता तो आतंकवादी एक रॉकेट लॉन्चर ही क्यों छोड़ते? वो भी ठीक निशाने पर नहीं? दो हेंड ग्रेनेड फेंकते पर इस तरह से कि दहशत पूरी दुनिया में फैल जाए पर निशाना चूक जाए।
इतने अच्छे-अच्छे एंगल से कैसे शूट किया इस पूरे हमले को? कैसे एक टीवी क्रू को पता चल गया कि ये हमला हो रहा है। और जहां से भी हो सके हर जगह, हर आतंकी की तस्वीरें उतारी गई। क्या ये बात हजम होती है? टीवी पत्रकार होने के कारण मुझे लगता है कि इतने एंगल से एक साथ तस्वीरों को लेना मुश्किल है। टॉप एंगल, साइड एंगल, फ्रंट एंगल इतने एंगल वो भी सिर्फ सेकेंड में कैसे संभव है, मुझे तो नहीं लगता। इससे ये साफ होता है कि हमले से पहले ही हमले की जानकारी थी उस क्रू को। और ये क्रिकेट जैसे खेल के साथ ये खेल किसी घर के ही सदस्य ने ही खेला है। सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए कि दहशत हम फैला सकते हैं और यदि जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान में हम कुछ भी कर गुजर सकते हैं।
पर अब तो दूसरी थ्यौरी को सिरे से पाकिस्तान की सरकार ने खारिज कर दिया है। अब बात अंदर के गुनहगारों और ये तो पाकिस्तान क्रिकेट का दुर्भाग्य है,कि जिस मैदान पर पाकिस्तान क्रिकेट के स्वर्णिम अश्रर लिखे गए उसी गद्दाफी पर पाकिस्तान क्रिकेट पर कालिख पुत गई।
आपका अपना
नीतीश राज
Wednesday, March 4, 2009
पाकिस्तान के लोग ऐसा क्यों सोचते हैं कि हमने ‘26/11-मुंबई हमलों’ का बदला लिया है।
हमने तुरंत मैच से यूं ही न्यूज की तरफ ऱुख किया। आंख फटी की फटी रह गई। अरे, ये क्या? कहां हुआ हमला, किसने किया, किनपर किया? ये तो पाकिस्तान है, तो क्या पाक टीम पर हमला हुआ है नहीं ये तो श्रीलंका की टीम आतंक की शिकार बनी है। बेहद दुख हुआ और नहीं जानता कि आलस कहां गायब हो गया तकरीबन 3-4 घंटे तक लगातार यूं ही चैनल खंगालता रहा। कई बार तो गुस्से ने दिमाग के सभी तारों को झनझना दिया।

अरे, क्या पागल होगए हैं पाकिस्तान के अधिकारी। जितने भी बयान किसी आला अफसर की तरफ से आ रहे थे उनमें से कुछ और साथ ही कई पत्रकारों के सवाल के निशाने पर कहीं ना कहीं भारत था। कई पाकिस्तानी न्यूज चैनलों पर ये साफ चला कि ये आतंकवादी बाघा बार्डर के रास्ते आए थे। मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था कि पहले तो सुरक्षा में इतनी भारी चूक और उसपर तुर्रा देखिए कि अभी हालात को सामान्य करने की बजाय लगे हैं निशाना साधने पर।
इस पूरे हमले पर कई और कहां-कहां सवाल खड़े होते हैं पाकिस्तान के लिए----
1) कैसे हुई श्रीलंका की टीम की सुरक्षा में चूक? जब कि श्रीलंका की टीम को मिलती है ग्रेड ए यानी कि किसी दूसरे देश से आए हुए किसी भी राष्ट्राध्यक्ष जैसी सुरक्षा। श्रीलंका टीम के काफिले की सुरक्षा के लिए करीब 70 पुलिसवाले दिए गए थे। तो सवाल ये उठता है कि कहां गए 70 पुलिसकर्मी? यदि 70 पुलिसकर्मी वहां पर मौजूद थे तो 12 आतंकी उनको चकमा देने में कैसे कामयाब होगए, कैसे फरार हो गए सभी के सभी और वो भी 5-6 पुलिसवालों को मारकर?
2) गद्दाफी स्टेडियम तक जाने के कई रास्ते हैं। ऐसा बताया गया है कि टीम को गद्दाफी स्टेडियम तक हर रोज दूसरे रास्ते से ले जाया जाता हैं। तो ये चूक कहां से हुई कि आतंकवादी जान गए वो रास्ता जिस रास्ते से आज टीम को गद्दाफी स्टेडियम तक पहुंचना था?
3) दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन जिस रास्ते का इस्तेमाल किया गया था टीम को गद्दाफी स्टेडियम तक लाने के लिए, तीसरे दिन भी उसी रास्ते का इस्तेमाल क्यों किया गया? रूट में हमेशा की तरह बदलाव क्यों नहीं किया गया?
4) पहले से ही सरकार को आगाह किया जा रहा था कि नवाज शरीफ और उनके भाई को पंजाब प्रांत से चुनाव ना लड़ने देने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पंजाब सूबे में नवाज शरीफ का जो रुतबा है वो पूरे पाकिस्तान के किसी भी प्रांत में जरदारी या फिर गिलानी का नहीं होगा। पंजाब सूबे के लोग नवाज के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
5) 12 आतंकवादी ये प्लान बनाते हैं कि मेहमान टीम पर हमला करना है। इस बात का मतलब ये है कि आतंकी काफी दिनों से इस योजना को अंजाम देने की कोशिश में जुटे हुए थे। तो क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी सो रही थी?
6) स्वात पर तालिबान का कब्जा हो गया है और वहां पर पाकिस्तान का नहीं तालिबान का फरमान चलता है और ये धमकी पहले से ही दी जा रही थी कि सिर्फ स्वात के बाद निशाना पूरे पाकिस्तान पर है, और खासतौर पर इस प्रांत।
7) पाकिस्तान के अधिकारी कह रहे हैं कि ये हमला पूरी तरह से देखने पर लगता है कि जैसे मुंबई हमलों को अंजाम दिया गया था बिल्कुल उसी तरह इस का प्लान लाहौर में भी किया गया। याने कि वो हमला भी पाकिस्तान में प्लान किया गया था और ये हमला भी अंदर के लोगों ने ही प्लान किया है।
8) अभी तक जो माना गया है कि ये अटैक सुनियोजित था और 12 के 12 आतंकवादी अपने में पूरे ट्रेनेंड थे। शायद वो पूरी श्रीलंका की टीम को बंदी बनाना चाहते थे। पर देखने से जो लगा कि उनके पास अस्ला, बारूद, सामान काफी था पर फिर भी उसके बाद सवाल ये उठता है कि यदि वो सब ट्रेनेंड थे तो फिर सवाल ये कि मास्क पहन कर हमला करना और फिर मास्क फैंक देना, क्यों? जिस बैग को आप हमेशा अपने साथ, पीठ पर लादे रख रहे थे फिर उनको छोड़कर भागने का औचित्य क्या? गन, ग्रेनेड, रॉकेट लॉन्चर इन सब को यूंही छोड़ कर क्यों भाग गए आतंकवादी? या फिर ये भी पहले से ही प्लान्ड था कि इनको छोड़ना था। बस पर इतने पास से रॉकेट दागा जाता है पर उसका निशाना चूक जाता है? बस के सामने से आकर बस पर ग्रेनेड फेंकने की कोशिश की जाती है और वो आतंकी के हाथ से छूटकर दूर गिर जाता है? क्या ऐसी ही ट्रेनेंड आतंकी थे जिन्होंने मुंबई पर हमला किया था?
9) सबसे बड़ा सवाल कि पाकिस्तान के इतने भरे-पूरे इलाके में 12 लोग हमला करते हैं और फिर मौका-ए-वारदात से गायब हो जाते हैं। एनकाउंटर तो दूर की बात लगभग 15 मिनट तक वो गोलीबारी करते हैं और फिर फरार हो जाते हैं और वहां कि पुलिस किसी को दबोचना तो दूर की बात उनका पता तक नहीं लगा पाती कि वो गए कहां। कोई भी वहां का निवासी ये बताने को राज़ी नहीं है कि आखिरकार वो किस तरफ गए हैं या उनको कहां देखा गया है। वैसे लाहौर के मॉडल टाउन इलाके से संदिग्ध 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और इस मामले पर अब तक 60 लोगों को हिरासत में लिया गया।
10) दूसरी तरफ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस पूरे हमले के पीछे वहीं पाकिस्तान की अंदरूनी रंजिश हो। किसी भी आतंकी का ना तो पकड़ा जाना और ना ही घायल होना, दाल को कहीं ना कहीं काला जरूर बनाता है।
तो ये सब सवाल खड़े हैं अपना मुंह खोले कि क्या कोई दे पाएगा इनका जवाब। लाहौर से बाघा बॉर्डर महज 20 किलोमीटर की दूरी पर है। तो कई की आशंका है कि वो सारे आतंकवादी वहां से भागकर सबसे सुरक्षित स्थान भारत में दाखिल हो सकते हैं। तो फिर यदि देखा जाए तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। ना इस पार के ना उस पार के। पाकिस्तानियों को ये समझना चाहिए कि ये हमला उनके देश में बैठे कुछ नापाक दहश्तगर्दों ने करवाया है। हम मुंबई हमलों के लिए किसी को माफ नहीं कर सकते, लेकिन अपनी पर आजाएं तो उसकी कीमत चुकाने की औकात इस जमाने में नहीं।

हम तो शुक्रगुजार हैं भगवान के उस बंदे का जो श्रीलंका टीम की बस का ड्राइवर था जिसने हिम्मत दिखाते हुए टीम को सकुशल गद्दाफी तक पहुंचा दिया। जिसके सामने वाले शीशे पर गोलियां टकरा रहीं थी और उसने एक्सीलेटर और अपने पैर पर विश्वास करके पाकिस्तान, क्रिकेट और आईसीसी के साथ-साथ दुनिया को शर्मिंदगी उठाने से बचा लिया और अकेले आतंक को मात देने में कामयाब रहा।
आपका अपना
नीतीश राज
(फोटो साभार-क्रिक इन्फो)
न्यूजीलैंड में भारत जीता, पाकिस्तान में क्रिकेट हारा।

सचिन ने भी अपने हाथ दिखाए और दो शानदार चौके लगाए। एक-दो चौकों के बाद लग रहा था कि सचिन शायद उतनी फॉर्म में नहीं हैं, फिर भी इतने तो हैं कि नेपियर में अपना सर्वाधिक बना देंगे और जैसे मैंने सचिन से सवाल पूछा था कि क्या सचिन अपने चाहने वालों का अरमान पूरा कर पाओगे? चाहने वालों को जवाब मिल गया, दो चौके मारने के बाद सचिन बाहर जाती बॉल को स्लिप के रास्ते चार रन तक पहुंचाने की कोशिश में बॉल की रफ्तार और हवा से चकमा खा गए और कीपर को एक आसान सा कैच थमा बैठे।
जिसकी उम्मीद थी बिल्कुल उससे हटके हुआ। जहां लोग सोच रहे थे कि लेफ्ट-राइट का कॉम्बिनेशन देने के लिए कोई लेफ्टी आएगा याने कि सबसे सफल जोड़ी फिर होगी क्रीज पर, पर ऐसा हुआ नहीं। लोगों और मीडिया की खरी-खरी सुनने के बाद अपना पसंदीदा नंबर 7 छोड़ कप्तान धोनी 3 नंबर पर बैटिंग करने पहुंचे। अपने इस निर्णय को साबित करने के लिए धोनी ने धीमे और सधी शुरुआत करी। वहां वीरू का बल्ला बोल रहा था। अब तक वीरू 56 गेंदों पर 11 चौके और 1 छक्के की मदद से 77 रन बना चुके थे। विटोरी की गेंद पर एक लाजवाब शॉट सहवाग ने खेली और सर्कल के अंदर खड़े टेलर ने उससे भी शानदार कैच लपक वीरू की शानदार पारी पर ब्रेक लगा दी। चौथे नंबर पर टीम के युवराज आए और

कप्तान के साथ दूसरे रन के फेर में पड़कर पवैलियन की राह पर निकल लिए। अब टी-20 के स्टार सुरेश रैना की बारी थी। 20-20 के क्रम को आगे बढ़ाते हुए रैना ने मैदान के हर कोने में बॉल पहुंचाई और शानदार 4 छक्के और 5 चौंकों की मदद से महज 39 गेंदों पर 66 रन बनाकर छक्के मारने के प्रयास में एलिट की गेंद पर ब्रायन को कैच थमा बैठे। वहीं दूसरे छोर पर कप्तान ने पारी संभाल रखी थी। अब धोनी का साथ देने क्रीज पर आए यूसुफ पठान आए और 10 गेंदों पर 1 छक्के और 2 चौकों की मदद से 20 रन बनाए। धोनी की इस समझदारी भरी पारी में सिर्फ ६ चौकों की मदद से 89 गेंदों पर 84 रन बनाए। न्यूजीलैंड के सामने 7.20 की औसत के साथ लक्ष्य 38 ओवरों में 274 रहा।
वैसे, इस बीच न्यूजीलैंड में झमाझम बारिश होने लगी और पाकिस्तान में श्रीलंका टीम की बस पर दनादन फायरिंग। पाकिस्तान में दूसरे टेस्ट के साथ-साथ दौरा भी खटाई में पड़ गया। खेल और क्रिकेट के इतिहास का काला दिन। वहीं दूसरी तरफ न्यूजीलैंड में बारिश के कारण पहला वन डे के ओवर कम कर दिए गए, मैच 38-38 ओवरों का हो गया।
इरफान की जगह टीम में आए प्रवीण कुमार ने बिना खाता खोले न्यूजीलैंड को दूसरे ओवर में ही पहला झटका मैक्कुलम के रूप में दिया। न्यूजीलैंड की तरफ से टी-20 का सितारा अस्त हो गया था। दूसरा विकेट भी प्रवीण कुमार की झोली में गया। गुप्टिल और टेलर जब खेल रहे थे तो लग रहा था कि औसर रन रेट तो बढ़ता जा रहा है पर फिर भी यदि ये दोनों टिके रहे तो मैच को कभी भी पलटने की काब्लियत रखते हैं। १६वें ओवर में यूसुफ पठान ने घातक होते टेलर को सचिन के हाथों कैच करवाकर न्यूजीलैंड की मुसीबत और बढ़ा दी। एलिट को सहवाग के सपाट थ्रू ने रन आउट कर दिया और बारिश शुरू हो गई।
डकवर्थ लुईस नियम को लागू किया गया और फिर जो टार्गेट न्यूजीलैंड के सामने था वो लगभग नामुमकिन सा ही था। 43 गेंद पर 111 रन। जब चौथा विकेट गिरा था तो न्यूजीलैंड को 102 गेंद पर 163 रन चाहिए थे और उनके हाथ में 6 खिलाड़ी थे।


जब टीम इंडिया बैटिंग कर रही थी तब ये खबर फैल चुकी थी कि श्रीलंका की टीम पर हमला हो गया है। और दोनों टीमों ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। धोनी ने कहा कि अच्छा हुआ कि भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया और शायद ही अब कोई भी खिलाड़ी पाकिस्तान में जाकर खेलना पसंद करेगा।
पर सच तो ये है कि पाक में पनपे आतंक के सच से खुद पाकिस्तानियों को लड़ना होगा और क्रिकेट को जिंदा रखने के लिए तालिबानी ताकतों के सामने घुटने नहीं टेकने होंगे। फिल्म के बाद अब इन दहशतगर्दों के निशाने पर है क्रिकेट पर आतंक से तो लड़ना होगा ही।
आपका अपना
नीतीश राज
(फोटो साभार-क्रिक इन्फो)
पाकिस्तान में श्रीलंका टीम पर हमला, पाक में आतंक के आगे हारा क्रिकेट।

दूसरे टेस्ट का तीसरा दिन, श्रीलंकाई टीम की बस होटल से गद्दाफी स्टेडियम जहां पर दूसरा टेस्ट खेला जा रहा था वहां के लिए रवाना हुई। साथ में आगे पीछे सुरक्षा दस्ता। सब ठीक चल रहा था, श्रीलंका की टीम इस पर हल्की चर्चा करने में मश्गूल थी कि कैसे गेंदबाजी करनी है। पाकिस्तान के समय अनुसार सुबह 8.40 पर टीम की बस गद्दाफी स्टेडियम के पास लिबर्टी चौक के पास पहुंची। जैसे ही राउंडअबॉयुट याने गोलचक्कर पर घूमी, चारों तरफ से बस और बस को सुरक्षा दे रहे पुलिस के दस्ते पर हमला कर दिया गया। 12 आतंकवादी बस पर अंधाधुंध गोलियां चला रहे थे जिसमें श्रीलंका की क्रिकेट टीम बैठी थी।
सामने से आ रही गोलियों से बच पाना बस के आगे चल रहे पुलिस दस्ते के लिए मुमकिन नहीं था। 7 पुलिसवाले मौके पर ही ढेर हो गए। बस पर ताबड़तोड़ गोलियां लग रहीं थी, और इधर खिलाड़ियों की चीख निकलने लगी।
6 खिलाड़ियों को गोलियां लगी।
फायरिंग की आवाज़ सुनते के साथ ही खिलाड़ियों ने झुकना शुरू कर दिया। चमिंडा वास ने बताया कि, फायरिंग के समय यदि वो झुके नहीं होते तो गोली लग सकती थी, गोली ठीक उनके ऊपर से गई थी। श्रीलंकाई बस के ड्राइवर मेहर मोहम्मद ने बताया कि गोली की आवाज़ के बाद पहले तो लगा कि कोईं पटाखे चला रहा है पर तुरंत पीछे बैठे किसी खिलाड़ी ने पीछे से आवाज़ लगाई कि ‘चलो, जल्दी चलो(go)’। ड्राइवर ने समझदारी का काम किया एक्सीलेटर पर रखा पैर और बस को गद्दाफी स्टेडियम के अंदर पर पहुंचाकर ही दम लिया। जो खिलाड़ी घायल हुए----

--कप्तान महेला जयवर्द्धने के पांव में टखना(ankle) में हल्का सा कट लगा, याने कोई खतरा नहीं।
--उप कप्तान कुमार संगकार के कंधे में गोली लगी, खतरे से बाहर।
--अजंथा मेंडिस-पीठ पर किसी चीज के गहरा घाव।
--थरंगा परनाविथाना-सीने में लगी गोलीघाव।
--थीलाना समरवीरा-जांघ में लगी गोली, खतरे से बाहर पर पूरी तरह नहीं। समरवीरा टीम के टॉप के बल्लेबाज जिसने पिछले टेस्ट और दूसरे टेस्ट की पहली पारी में दोहरा शतक जड़ा था।
--पॉल फरबरेस-श्रीलंकाई टीम के सहायक कोच के हाथ में गहरा घाव।
श्रीलंकाई टीम की बस के पीछे एलिट अंपायर की वैन भी आ रही थी। 5 अंपायरों के इस काफिले पर भी आतंकवादियों ने निशाना साधा और इसमें रिजर्व अंपायर एहसान रज़ा गंभीर रूप से घायल हो गए। अभी भी एहसान रज़ा अस्पताल में भर्ती हैं पर अभी-अभी पता चला है कि वो ख़तरे से बाहर हैं। लेकिन इस वैन को जो ड्राइवर थे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस की तफ्तीश के बाद पता चला कि 12 आतंकवादियों का ये काम था और उन्होंने हमले में ऑटोमैटिक गन, हैंड ग्रेनेड, रॉकेट लॉन्चर और स्टार डायमंड पिस्टल का इस्तेमाल किया। कुछ का कहना ये है कि ये अटैक पूरा 26/11 मुंबई हमलों की तर्ज पर किया गया है।
वैसे ही पाकिस्तान में कोई भी खिलाड़ी जाकर नहीं खेलना चाहता। 2008 में ऑस्ट्रेलिया ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाक का दौरा रद्द किया था। उसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी रद्द की गई। फिर भारत ने मुंबई हमलों के बाद दौरा रद्द कर दिया, जिसे की आज पूरा विश्व सही ठहरा रहा है। जब ये फैसला लिया गया था तो मुझे याद है कि दुनिया और कुछ पाक के खिलाड़ी जैसे आफरीदी ने काफी कुछ उल्टा सीधा कहा था। श्रीलंका की टीम ने हौसला दिखाया और उसके इस निर्णय पर कई सवाल भी उठे थे।

इस हमले के तुरंत बाद श्रीलंकाई टीम का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया गया। कोई भी खिलाड़ी इलाज कराने के लिए भी पाक में नहीं रुकना चाहता था। क्रिकेट के इतिहास में पहली बार ये हुआ होगा कि किसी टीम को मैदान से ही हेलिकॉप्टर से दूसरे देश ले जाया गया और फिर वहां से वो रात तक वापिस अपने देश में पहुंच जाएंगे।
आपका अपना
नीतीश राज
Monday, March 2, 2009
सचिन,अपने चाहने वालों के अरमानों को पूरा कर पाओगे?

सचिन को लोग क्रिकेट का खुदा मानते हैं। सचिन से सब को बहुत उम्मीदें होती हैं और चाहे कोई कुछ भी कहे लेकिन सचिन को खेलते देखना अपने में एक अलग रोमांच भर देता है। यहां तक की गेंदबाज जो कि सचिन को गेंद डालता है वो भी रोमांचित हुए नहीं रह पाता। हर एक गेंदबाज का सपना होता है अपने करियर में सचिन को एक बार आउट करना। पर सवाल ये उठता है कि क्या क्रिकेट में सचिन का कद इतना बड़ा हो चुका है कि सचिन अपने चाहने वालों के अरमान को पूरा कर सकें? न्यूजीलैंड में न्यूजीलैंड की टीम के खिलाफ वन डे में शतक का अरमान? एक अच्छी ईनिंग का अरमान?
न्यूजीलैंड में सचिन के आंकड़े सचिन के बढ़ते कद को ठेंगा दिखाते हुए उनकी वहां पर नाकामयाबी की चुगली करते हैं। न्यूजीलैंड में सचिन 15 मैचों में 3 बार शून्य पर आउट हुए हैं, 3 बार तो 10 का आंकड़ा भी नहीं छू सके। सिर्फ 3 हाफ सेंचुरी और यदि देखें तो 1994 से लेकर अब तक सचिन के बल्ले को तलाश है एक हाफ सेंचुरी की। न्यूजीलैंड में अभी सचिन के बल्ले की प्यास शतक को लेकर नहीं बुझी है। तो क्या ये आंकड़े महान बल्लेबाज से सवाल नहीं करते कि क्या सचिन अपने चाहने वालों के अरमान को पूरा कर पाएंगे? श्रीलंका में तीन बार अंपायर की गलती तो सारी दुनिया मान रही थी पर क्या सचिन के रिफ्लेक्सिस ज्यादा धीरे नहीं हो गए जिसके कारण ना चाहते हुए भी सचिन के बल्ले की बजाय हर बार बॉल पेड पर लग जा रही थी।

माना जा रहा है कि भारत कि इस समय की टीम पहले की सभी टीमों से बेहतर है तो साबित करना होगा इस टीम को कि ये टीम सर्वश्रेष्ठ है। 1967 के बाद यदि ये करिश्मा कोई टीम कर सकती है तो वो ये ही टीम होगी। लेकिन पहले वन डे में 2003का बदला उतारना है फिर टेस्ट की बात करेंगे।
नेपियर में अब तक सचिन तीन बार खेलने उतरे हैं और दो बार दूसरे नंबर पर बल्लेबाजी की है। फरवरी 1995 में दूसरे मैच में 15 गेंदों पर 13 रन और तीसरे मैच जनवरी 1999 में 23 रन 19 गेंदों पर बनाए थे, जिसमें 4 चौके शामिल थे। दुआ है कि इस बार सचिन नेपियर में कामयाबी की ऊंचाइयों को छू लें।
बेस्ट ऑफ लक टीम इंडिया और बेस्ट ऑफ लक मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर।
आपका अपना
नीतीश राज
Friday, November 21, 2008
डकवर्थ लुईस नियम ने कम किया जीत का मजा
ना ही कोई खिलाड़ी और ना ही देखने वाले इस तरह के फैसले से खुश होते हैं। फिर क्या है कि आईसीसी अपने इन नियमों में फेरबदल क्यों नहीं करती। कोई भी टीम शायद ये नहीं चाहती होगी कि कभी भी इस तरह से फैसला हो।
यदि भारत और इंग्लैंड के बीच हुए तीसरे वन डे की बात करें तो,
पहली बात- मैच 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ। तो उसका खामियाजा खेल पर क्यों?
दूसरी बात- जब मैच 45 मिनट की देरी से शुरू हुआ तो सिर्फ 2 ओवर कम क्यों किए गए।
तीसरी बात- जब मैच 45 मिनट देरी से शुरू हुआ तो लंच के समय में कमी क्यों नहीं की गई। जब कि नियम ये है कि 60 मिनट का खेल यदि बाधित होता है तो फिर दोनों कप्तानों की सलाह पर ये 10 मिनट का लंच टाइम कम किया जाता है। पर 15 मिनट यदि खेल कम बाधित होता है तो उसके लिए नियम कुछ नहीं कहते।
चौथी बात- धोनी-पीटरसन ने ये कहा कि उन्हें पता था कि अंत में मैच का निर्णय डकवर्थ से ही पूरा होगा। तो क्या आईसीसी और अंपायर पैनल को समय को आधार बनाकर नहीं चलना चाहिए था जिसके कारण मैच पूरा हो सके।
भारत को इस मैच में जीत तो मिल गई लेकिन क्या इस जीत से हम अपने आपको उस तरह से जोड़ पा रहे हैं जिस तरह हम पिछले दो मैचों की जीत से अपने को जोड़ पाए थे। शायद नहीं। मैच पर लाखों लोगों की निगाह टिकी हुई थी लेकिन शायद ही कोई चाहता होगा कि मैच का अंत कुछ इस तरह से हो। सब चाहते थे कि भारत जीते पर पूरे तरीके से, अंत तक खेलते हुए।
अंत तक मैच फंसा हुआ था। भारत को जीत के लिए 9 ओवर में 43 रन चाहिए थे। भारत की रन रेट वैसे इंग्लैंड से ऊपर चल रही थी। लेकिन भारत ने अपने 5 क्रीम प्लेयर खो दिए थे। यदि धोनी और यूसुफ में से कोई भी आउट हो जाता तो 241 का स्कोर ही पहाड़ लगने लगता। या दो विकेट जल्दी निकल जाते और तब मैच बाधित होता तो भी मैच भारत के हाथ से निकल जाता। पर ये सब तब है जब ऐसा होता तो पर अभी सच ये है कि भारत 3-0 से सीरीज में आगे है।
3-0 से आगे भारत
इंग्लैंड ने टॉस जीता और इस बार पहले खुद बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इस बार नीचे जमकर खेल रहे बोपारा से ओपनिंग कराई गई। इंग्लैंड का ये तुरुप का पत्ता इस बार काम भी कर गया और पहले विकेट की साझेदारी 79 रन की हुई जब कि बेल को मुनाफ ने धोनी के हाथों विकेट के पीछे कैच करवाया जब कि बेल 46 रन के निजी स्कोर पर खेल रहे थे। कप्तान ने अपने को इस बार तीसरे नंबर पर उतारा और लगा कि इंग्लैंड की इस मैच को लेकर नई रणनीति शायद कारगार हो जाए पर फिर भज्जी ने पीटरसन को 13 के स्कोर पर पवैलियन की राह दिखा दी। धोनी ने कमाल की स्टंपिंग का परिचय देते हुए कोलिंगवुड को आउट किया। पर शायद बोपारा ये बात भूल गए कि इस दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेट कीपरों में से एक धोनी के सामने क्रीज से पैर बाहर निकालने का मतलब सिर्फ और सिर्फ पवैलियन की राह होती है। 8 चौके की मदद से बोपारा ने 60 रन बनाए। धोनी ने इन दो स्टेंपिंग से दुनिया के उभरते हुए कीपरों को ये बताया कि आखिरकर कीपरिंग की कैसे जाती है। फ्लिंटॉफ और शाह के आने से लगा कि शायद इंग्लैंड बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब हो जाएगा पर भारत के स्पिनरों ने इन बल्लेबाजों की एक नहीं चलने दी। 48.4 गेंद पर भारत के सामने 241 रन का लक्ष्य रखकर इंग्लैंड की पूरी टीम पवैलियन लौट चुकी थी। हरभजन सिंह ने 3 विकेट लिए मुनाफ-ईशांत को 2-2 विकेट मिले।
भारत के दिमाग में डकवर्थ का ख्याल शुरूआत से ही था। पर भारत के दो विकेट 34 रन पर गिर गए। गंभीर(14) और रैना(1) कानपुर में बिना कमाल दिखाए ही सस्ते में लौट गए। पर दूसरी तरफ सहवाग टीम के स्कोर को बढ़ाते रहे। फिर रोहित शर्मा के साथ मिलकर भारत के स्कोर को 100 के ऊपर तक पहुंचाया और फिर रोहित को स्वान ने आउट किया। फिर वीरु का साथ निभाने आए पिछले दो मैचों के हीरो युवराज सिंह और अपने हाथ दिखाए। बाद में खेलने उतरी भारत को पिच से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। तभी सहवाग 68 के निजी स्कोर पर फ्लिंटॉफ का शिकार बन गए। सहवाग ने 76 गेंदों पर 8 चौक और 1 छक्के की मदद से 68 की पारी खेली। धोनी और यूसुफ पठान ने अच्छा खेल दिखाते हुए भारत का स्कोर 40 ओवर में 198 रन बना लिए थे जब मैच खराब रोशनी के कारण रोक देना पड़ा और भारत 16 रन से जीत गया।
पर सच ये है कि भारत ने ये मैच जीत लिया पर इस फैसले के कारण जीत का वो मजा आना था वो नहीं आया जिसके हम हकदार थे।
आपका अपना
नीतीश राज
Tuesday, November 18, 2008
युवराज ने फिर धोया अंग्रेजों को
ये यंग युवराज का जलवा है
इसे कहते हैं शानदार पारी। युवराज ने वापसी के बाद तो अपना जलवा दोनों मैचों में दिखाया है वो लाजवाब है। दूसरे वन डे में जब रनों के युवराज मैदान में आए तो सिर्फ आठवें ओवर में २९ रन पर ३ विकेट गिर चुके थे। फिटनेस से जूझ रहे २६ साल के युवराज के लिए ये परीक्षा की घड़ी के सामान थी। राजकोट में पीठ के दर्द के कारण एक दिन पहले तक लग रहा था कि युवी फिटनेस टेस्ट पास कर भी पाएंगे या नहीं। युवराज का साथ दिया दूसरी तरफ वन डे के राहुल द्रविड़ की जगह ले चुके मिस्टर भरोसेमंद गौतम गंभीर ने। गंभीर ने ५६ गेंदों पर अपनी हाफ सेंचुरी पुरी की और इसके साथ धोनी और गंभीर ने इस साल २००८ में १००० रन पूरे कर लिए। इस साल सिर्फ दो खिलाड़ी ही हैं जिन्हें ये खिताब मिला है। युवराज और गंभीर ने १३४ रन की साझेदारी की और भारत को सम्मानजनक स्कोर की तरफ बढ़ा दिया।
यूसुफ का साथ
अब बारी थी कप्तान की लेकिन कप्तान धोनी कमाल नहीं दिखा सके और महज १५ रन पर कोलिंगवुड ने उनके स्टंप बिखेर दिए। फिर आया वो शख्स जो टीम इंडिया को बड़े स्कोर की तरफ ले गया। यूसुफ पठान ने युवराज का साथ देते हुए टीम को एक ऐसी जगह पर ले गए जहां पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। युवराज ने कहा था कि वो तो सोच रहे थे कि २२५ रन का लक्ष्य काफी होगा इस पिच पर। और भारत ने बनाए २९२ रन जिसमें यूसुफ पठान के महज २९ गेंदों पर ५० रन शामिल हैं जिसमें ४ छक्के और २ चौके हैं। सहवाग, रैना, रोहित और युवराज स्टूअर्ट ब्रोर्ड के शिकार बने।
जोर का झटका धीरे से
इंग्लैंड पहले ही आधा मैच हार चुकी थी, ऐसी सोच रखने वालों को जोर का झटका जरा धीरे से लगा। पहले ओवर की आखिरी गेंद पर रैना ने जबरदस्त फुर्ती दिखाते हुए रोहित की तरफ खेली गई बैल की ड्राइव को बीच में लपककर स्टंप पर सटीक थ्रो से बैल को रन आउट कर दिया। प्रायर और शाह के बीच ९६ रन की साझेदारी हुई। इस बीच प्रायर को दो जीवनदान भी मिले और इंग्लैंड का स्कोर १०० का आंकड़ा पार कर गया। जहीर खान, आरपी सिंह, मुनाफ पटेल तीनों तेज गेंदबाज कुछ खास नहीं कर पाए।
पहले बल्ले से रक्षक, फिर गेंद से भक्षक
युवराज ने अपना सबसे पहला शिकार शाह को बनाया, शाह की शानदार पारी १ छक्का और ८ चौकों की मदद से ५८ के निजी स्कोर पर समाप्त हुई। फिर प्रायर को अगले ओवर में कोई और जीवनदान युवराज ने नहीं दिया और क्लीन बोल्ड कर दिया। ये युवराज का दूसरा ओवर था लेकिन फिर फ्लिंटॉफ और कप्तान पीटरसन की जोड़ी ने मिलकर तेजी से रन चुराने शुरू किए। दोनों ने मिलकर १२ ओवर में ७४ रन की साझेदारी की। इस बीच ९ रन प्रति ओवर की औसत से रन चाहिए थे इंग्लैंड की टीम को, इसको कम करने के लिए ३२वें ओवर में पीटरसन ने तीसरा पावर प्ले लिया। इसका पूरा फायदा उठाते हुए फ्लिंटॉफ ने भज्जी के एक ही ओवर में ३ छक्के जड़ दिए। अंतिम पावरप्ले में इंग्लैंड ने ५९ रन बटोरे। अब १३ ओवर में चाहिए थे ११० रन। पर अपने आठवें ओवर में युवराज ने खतरा बनते पहले फ्लिंटॉफ को आउट किया और फिर पीटरसन को भी चलता कर दिया। प्रायर, शाह, फ्लिंटॉफ, पीटरसन सभी युवराज की तेज गति की गेंदों को समझ नहीं पाए। प्रायर और पीटरसन को क्लीनबोल्ड फिर शाह और फ्लिंटॉफ एलबीडब्ल्यू आउट किया।
बल्ले से ना सही गेंद से ही सही
बाकी बची कसर वीरेंद्र सहवाग ने पूरी कर दी। अभी सोचा जा रहा था कि कोलिंगवुड, बोपारा और पटेल कुछ कमाल कर सकते हैं पर तीनों खिलाड़ी कुछ कमाल नहीं कर पाए। वहीं सहवाग ने खतरनाक बनते पटेल को पहले आउट किया फिर ब्रोड और हारमीशन को भी चलता किया। सहवाग ने ५ ओवर में २८ रन देकर ३ विकेट झटके।
सीरीज में भारत २-० से आगे हैं और लगातार दो मैच जीतकर मेजबानों के हौसले जहां बुलंद हैं तो वहीं मेहमान ये सोचने पर मजबूर हैं कि क्या वो युवराज की आंधी को कभी रोक पाएंगे। फ्लिंटॉफ भी पंगा नहीं लेना चाहते क्योंकि पिछली बार पंगा लिया था तो ६ छक्कों की सौगात युवी ने भेंट के रूप में दी थी, अभी भूले तो नहीं होंगे फ्लिंटॉफ।
आपका अपना
नीतीश राज
Saturday, October 18, 2008
रनों के शिखर पर सरताज "सचिन"

सचिन ने जैसे ही ऑस्ट्रेलिया के मध्यम गति के गेंदबाज पीटर मैथ्यु सीडल की बॉल को थर्ड मैन के लिए खेला वहीं सचिन ने वो कामयाबी अपने 152 वें टेस्ट में हासिल कर ली जिसका इंतजार सभी को श्रीलंका सीरीज से था। सचिन वन डे क्रिकेट में तो सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पहले ही बन चुके हैं और आज ये कामयाबी उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भी पूरी कर ली। इक्तफाक देखिए कि सचिन ने भी वर्ल्ड रिकॉर्ड उसी टीम के खिलाफ बनाया जिसके खिलाफ ब्रायन लारा ने ये मुकाम हासिल किया था। ब्रायन लारा ने एलन बोर्डर के 11174 का रिकॉर्ड 2005 में एडिलेड टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही तोड़ा था। अब तक सिर्फ तीन खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने 11000 रन के आंकड़ें को छुआ है। एलन बोर्डर, ब्रायन लारा और सचिन तेंदुलकर। अब सचिन के रिकॉर्ड तो गर अभी कोई पहुंच सकता है तो वो हैं उनके पीछे चलने वाले राहुल द्रविड़ जो कि 10302 रन बना चुके हैं जिसमें आज के 39 रन भी शामिल हैं। और दूसरे हैं जो कि राहुल का पीछा करते हुए चल रहे हैं, ऑस्ट्रेलिया टीम के कप्तान रिकी पॉन्टिंग जिन्होंने 10239 रन बनाए हुए हैं। वैसे सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की बात करें खेलने वालों में, तो पहले दो नंबर पर दोनों खिलाड़ी भारत के ही हैं।
मोहाली में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में सभी को उम्मीद थी कि मास्टर ब्लास्टर सचिन रमेश तेंदुलकर का बल्ला चलेगा और वो रिकॉर्ड को अपनी मुट्ठी में जरूर कर लेंगे। और हुआ भी वैसा ही। दूसरे टेस्ट में कुंबले की जगह अमित मिश्रा को जगह मिली और भारत की तरफ से पहली बार कप्तानी कर रहे एम एस धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। क्युरेटर के मुताबिक ये पिच तेज गेंदेबाजों को पूरा साथ देगी लेकिन गंभीर और सहवाग ने धुंआंधार शुरुआत की। लेकिन 35 के निजी स्कोर पर सहवाग जॉनसन का शिकार बने। द्रविड़ ने आते के साथ ही आक्रामक शॉट्स खेले और अपनी इच्छा जाहिर कर दी। लेकिन 39 के निजी स्कोर पर ली ने उन्हें प्ले डाउन करते हुए क्लीन बोल्ड कर दिया। अब बारी थी रिकॉर्ड प्लेयर की। पर तभी टीम का स्कोर जब 146 था तभी गंभीर भी आउट होगए। 146 पर दो झटके के बाद लक्ष्मण साथ देने पहुंचे और सचिन को इस दबाव के पलों में अपने करियर का बेस्ट भी देना था।

सचिन ने आते के साथ ही बड़े ही सधे तरीके से खेलना शुरू किया। और उस कीर्तिमान पर पहुंच गए जहां का सपना शायद सब भारतियों ने देखा था। ब्रायन लारा के रिकॉर्ड को तोड़ते के साथ ही सबसे पहले हमेशा की तरह सचिन ने अपने सिर को ऊपर की तरफ उठा कर आसमान को देखा और भगवान और अपने पिता को धन्यवाद किया। पूरा स्टेडियम खड़े होकर सचिन को सम्मान दे रहा था। सचिन की तरफ पूरी ऑस्ट्रेलिया टीम हाथ आगे किए हुए बढ़ी चली आ रही थी। सभी ने सचिन को बधाई दी। टीम इंडिया ने भी सचिन को खड़े होकर तालियों के साथ बधाई दी। फिर तो सचिन को देश-विदेश से बधाइयों का तांता ही लग गया। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, लता मंगेश्कर, सुनील गावस्कर, कपिल देव सभी ने बधाई संदेश भेजा। हमारी तरफ से भी सचिन को बधाई।

साथ ही ने अपने 152वें मैच में कई खिताब अपने नाम किए। 12000 रन बनाने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी बने। साथ ही आज के अर्द्धशतक के साथ ही टेस्ट में सचिन के 50 अर्द्धशतक हो गए हैं। अर्द्धशतकों के मामले में बॉर्डर के ६३ अर्द्धशतक हैं। जो कि सचिन से आगे हैं। साथ ही सचिन यदि 2 कैच लपक लें इस मैच में तो 100 कैच लपक लेंगे। और सबसे ज्यादा रन बनाने का कीर्तिमान तो है ही। वन डे में सचिन के 16361 रन हैं और 42 शतक जो अपने में ही एक विश्व रिकॉर्ड है।
सचिन ने 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के कराची में 1989 में टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। पहले ही टेस्ट में वकार यूनुस ने मुंह पर बाउंसर मार कर खून से लबरेज कर दिया था। पर सचिन बावजूद इसके उसी खून में रंगी शर्ट पहनकर खेलते रहे। उसके बाद का जलवा तो फिर पूरे विश्व ने देखा। वहीं, अपने आप को गुगली का बादशाह कहने वाले अब्दुल कादिर ने जब सचिन को दूध पीकर आने की सलाह दी तो फिर सचिन ने छक्के पे छक्के मारकर कादिर को उनकी गलती का एहसास करा दिया साथ ही स्टेडियम में मोजूद लोगों को भी। ऐसे ही खिलाड़ी इस मुकाम पर पहुंचते हैं। ऐसे खिलाड़ी को सलाम।
आपका अपना
नीतीश राज
(फोटो साभार-गूगल)
Tuesday, August 26, 2008
क्या ट्रॉफियों के ऊपर भारी पड़ेंगे ये पदक?
बीजिंग ओलंपिक 2008 तो हो गए। भारत ने तीन पदक जीतकर अपने लिए तो इतिहास भी रच दिया। पर एक सवाल यहां मेरे जहन में उठ रहा है। क्या एक पदक किसी ट्रॉफी के बराबर होता है या फिर ऊंचा या फिर....? क्या ये तीन पदक उन करोड़पति ट्रॉफी पर भारी पड़ पाएंगे? एक बार 1983 में ये हमें मिली जिस पर पूरे देश को नाज है। पर एक बार सपना दिखाकर कहीं छूट गई। पिछले साल एक बार और ऐसा कमाल हुआ और फिर से एक नई ट्रॉफी देश में आगई। पर अब, क्या ये तीन पदक उस भ्रम को तोड़ पाएंगे, जो आज की युवा पीढ़ी संजोए रखती है और साथ ही उनका परिवार, जो कि भेड़ चाल में आंख मूंदे चले जा रहे हैं। इस देश में क्रिकेट को धर्म की तरह पूजा जाता है। एक-एक खिलाड़ी की कीमत करोड़ों में लग रही है, 45 दिन खेलकर के करोड़ों कमा जाते हैं। और वहीं दूसरी तरफ ओलंपिक में कामयाबी हासिल करने के बाद भी क्या वो इतना कमा पाएंगे जितना कि ये क्रिकेटर कमा जाते हैं।
भारत के लिए इस बार का ओलंपिक कुछ ज्यादा ही अहम रहा। तीन पदक भी मिले,108 साल के इतिहास में पहली बार तीन पदक(वैसे ओलंपिक को शुरू हुए 112 साल)। पहला व्यक्तिगत गोल्ड पदक अभिनव बिंद्रा के नाम, गोल्ड पाते हुए बेशक अभिनव बहुत सहज दिखे हों पर देश बिल्कुल सहज नहीं था। पहली बार किसी ने एकल प्रतियोगिता में पदक जीता था, वो भी गोल्ड मेडल। जहां भारत की झोली में स्वर्ण पदक सिर्फ हॉकी में ही आए, जिसको लाने का गौरव पूरी टीम को जाता है वहां पर एक खिलाड़ी के द्वारा लाया ये पदक हमारे लिए कहीं पर भी उन 8 गोल्ड मेडल से कम नहीं है।
मुक्केबाजी में पहली बार पदक मिला चाहे वो कांस्य ही क्यों ना हो। स्वर्ण का सपना तो टूट गया विजेंदर, अखिल और जितेंदर का, पर स्वर्णिम अक्षरों में नाम जरूर लिखवा लिया विजेंदर ने। बॉक्सिंग में पहली बार देश को कोई भी पदक हाथ लगा और पहली बार तीन खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे, अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रर्दशन।
1952 के बाद कुश्ती में पदक। सुशील कुमार से कोई इतनी उम्मीद नहीं लगाए बैठा था। लेकिन उसने अपना नाम भी के एन जाधव जी के साथ स्वर्णिम अक्षरों में लिखवा लिया।
सारा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पर क्या ये गौरव कुछ दिन तक ही रहेगा या फिर इसकी गूंज दूर तलक भी जाएगी, लंदन तक? क्या क्रिकेट का जो जुनून देश के सर चढ़कर बोलता है, वैसा ही जुनून इनका भी देश के सर चढ़कर बोलेगा? यदि सरकार नहीं सुधरी तो नहीं बोलेगा। विजेंदर को जिस होटल में ठहराने की बात थी वो भी जब कि वो देश का नाम रोशन करके आया हो। उससे तो नहीं लगता कि सरकार जागेगी। किसी भी क्रिकेटर को रुकवाया गया होता तो पता चलता साफ ठहरने से मना कर दिया होता। ये सरकार के नुमाइंदे दलाल है और दलाली के सिवा कुछ नहीं कर सकते।
बहुत कुछ तो युवाओं पर भी निर्भर करता है। अब ये उदाहरण ही ले लीजिए। रीएलिटी शो क्या शुरू हुए लाखों की तादाद में युवा वर्ग आगे आया। इनमें से आगे वो आए जो कि काम चोर थे, आलसी थे, निकम्मे थे या फिर दिन में ही जागते हुए ख्याली पुलाव बनाने वाले, मिनटों में अमीर बनने का सपना देखने वाले थे। अधिकतर युवाओं को ये भी नहीं पता था कि जिस जगह वो जा रहे हैं वहां पर ट्रैनिंग की भी जरूरत होती है। कुछ को तो मुगालते ने ही मार डाला था कि वो अमिताभ, अक्षय, शाहरुख या फिर आमिर, सलमान, सैफ की तरह दिखते हैं। वो ही हाल लड़कियों का था लेकिन ये बात खुद ऑर्गेनाइजरों ने भी मानी की जितनी लड़कियां वहां पर पहुंची थी उसमें अधिकतर सोच कर आईं थी और जानती थीं कि वो किस लिए यहां पर आई हैं। क्या ये युवा वर्ग तैयार है इतनी मेहनत के लिए जितनी की ये मुक्केबाज, पहलवान, शूटर और क्रिकेटर करते हैं। ये पहलवान तो एक कमरे में 12 एक साथ रहते हैं। अभिनव एक हॉल में 10-12 घंटे बंद रहकर शूटिंग की प्रैक्टिस किया करते थे। क्या इतना अभ्यास करने के लिए वो तैयार हैं तो फिर हम भी लंदन में करिश्मा दिखाने के लिए तैयार है।
ये सोती हुई सरकार यदि नहीं जागी तो देश के युवाओं की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। 1980 तक ओलंपिक में चीन पहले 10 देशों की सूची में नहीं आता था। और 2008 में चीन 51 गोल्ड के साथ नंबर 1 पर है और हमारा नंबर 50वां है। क्या हम ये सोच सकते हैं कि आने वाले 28 साल बाद हम पहले नंबर पर होंगे या फिर पहले 5 देशों में शुमार हो पाएंगे? क्या क्रिकेट को छोड़कर इन खेलों पर भी ध्यान दिया जाएगा?
आपका अपना
नीतीश राज
(अपनी राय के साथ-साथ इन दो सवालों के लिए आप वोट भी कर सकते हैं।)
Tuesday, August 12, 2008
क्या पांडव फिर कभी एक साथ खेल पाएंगे, मुझे लगता है ‘नहीं’

कुंबले जी के दो अरमान थे कि सचिन इस टूर में लारा का रिकॉर्ड तोड़ दें लेकिन
सचिन ने तो अरमानों पर ऐसा पानी फेरा कि अब कभी कुंबले अरमान ही नहीं करेंगे, और वो भी खासतौर पर सचिन से। दूसरा अरमान था कि सीरीज हम बेहतर अंतर से जीतें। लेकिन यहां पर पूरी टीम ने और बाकी बचे अनुभव ने लुटिया डूबो दी। कुंबले अब कहते फिर रहे हैं कि बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले....।
जहां तक सचिन की बात है तो सचिन एक लेजेंड हैं। उनके ऊपर पिछले समय में भी कई आरोप लगे लेकिन जब उन्होंने वापसी कि तो सबके मुंह बंद होगए। सचिन क्रिकेट मे गॉड की भूमिका रखते हैं खासकर भारत के लिए तो और ब्रैडमैन से उनकी तुलना यूं ही नहीं की जाती। लेकिन क्या सचिन की चोटें और उम्र अब उन पर हावी होने लगी हैं। दबाव जो कि धोनी की तरफ से उन पर आया है वो भी कुछ कम नहीं है। यहां पर बीसीसीआई को एक सलाह है कि एक-दो सीरीज बांग्लादेश और कीनिया के साथ रखकर सचिन का रिकॉर्ड बनावा दें और फिर सचिन को कहें की गुरू अब क्या बुढापे में भी खेलोगे, संन्यास ले लो। वैसे सचिन की किस्मत मैं ये नहीं था कि विदेशी धरती पर वो रिकॉर्ड बनाए। ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाली 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में शायद वो ये रिकॉर्ड बना लें। पहला टेस्ट बैंगलोर में चिन्नास्वामी स्टेडियम में 9 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक होगा। भगवान ने चाहा तो इसी मैदान पर हम सचिन को ये कीर्तिमान हासिल करते देखेंगे।
दादा, द्रविड़ और लक्ष्मण तो पहले से ही निशाने पर हैं और अब इस प्रदर्शन ने तो और भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।


क्या लगता है कि इन आंकड़ों के साथ ये 5 पांडव फिर वापसी कर पाएंगे, मुझे तो नहीं लगता कि वापसी संभव हो पाएगी। इनमें से जो भी खिलाड़ी एक सीरीज के लिए बाहर हुआ तो उस को मान लेना चाहिए कि अब टीम इंडिया में वापसी के दरवाजे उसके लिए बंद हो गए और हो सके तो फिर उन्हें संन्यास ले लेना चाहिए।
आपका अपना
नीतिश राज
“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”