Friday, August 15, 2008

"अखिल की जीत से रोया वर्ल्ड चैंपियन"


ऑफिस में सब गदगद हो गए। सबके चेहरे पर जैसे खुशी की एक अनोखी लहर दौड़ रही थी। भई बात ही कुछ ऐसी थी। सच पूछो तो वो चार राउंड और आठ मिनट ऐसे लग रहे थे कि जैसे कि किसी ने मेरे सर पर पहाड़ रख दिया हो। इतना टेंस में शायद ही खेलों को लेकर के कभी होता हूं। ओलंपिक्स में भारतीय मुक्केबाजों का अब तक का सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस है। इससे पहले कभी भी दो मुक्केबाज क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंचे है। और अभी तीसरे मुक्केबाज से हमें उम्मीद है कि वो क्वार्टर फाइनल में जगह बना लेगा। वीरेंदर और अखिल तो क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं लेकिन जितेंद्र को अपने गुरु की राह पर चलते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनानी है।
बैटम वेट में अखिल ने वर्ल्ड चैंपियन सर्गी वोडोप्यानोव को हराकर अपने चैंपियन बनने के दावे को और पुख्ता किया है। इस उल्टफेर की उम्मीद तो खुद रूस के सर्गी को नहीं थी लेकिन जब ये फैसला हुआ तो वर्ल्ड चैंपियन भी रो दिया। पहले राउंड में अखिल 2 के मुकाबले 1 प्वाइंट से पीछे था। यहां हमारा दिल हो रहा था कि बस अगले राउंड में तो अखिल वापसी कर ही लेगा। सारे ऑफिस में खुसुर-पुसुर हो रही थी कि क्या जीत पाएगा अखिल। दूसरे दौर में भी अखिल 3-4 से सर्गी से पीछे रहा। दिल की धड़कनें तेज होने लगी। अब थोड़ी थोड़ी शांति छाने लगी थी ऑफिस में। तीसरा दौर शुरु हुआ और यहां पर दुआओं का दौर। लेकिन इस में भी वर्ल्ड चैंपियन ने अखिल को आगे आने नहीं दिया। अखिल को देखते ही लग रहा था कि वो अब भूखा हो चला है जीत के लिए। वो लंबे पंच तक मारने में लग गया। तीसरा राउंड समाप्त और प्वाइंट में अखिल 7-8 से पीछे। बस अब सर पर इतना भार लगने लगा कि दिल कह रहा थी जीत हो लेकिन जल्द ही ये मैच भी। फैसले की घड़ी बड़ी ही असहज बना रही थी।
चौथे राउंड में अखिल एक जुझारु मुक्केबाज़ की तरह वर्ल्ड चैंपियन पर पिल पड़ा। देखने में मजा आने लगा। लग रहा था कि भूखा शेर अपने शिकार पर झपट रहा है। लेकिन सर्गी भी कहां हार मानने वाला था। इस राउंड में एक समय ऐसा आया कि सर्गी 9 के मुकाबले 7 अंक से आगे हो गया। लेकिन अखिल अब विरोधी पर कहर बन कर टूट पड़ा मैच मे कर ली वापसी। अखिल को इल्म था कि करोड़ों लोगों की आस को वो यूं ही नहीं तोड़ सकता और लगा कि ये दिन अखिल के नाम ही बना है। दो स्ट्रेट पंच ने पासा पलट दिया और स्कोर 9-9 होगया। अब लगा कि एक प्वाइंट और मिल जाए तो अखिल जीत जाए। लेकिन प्वाइंट था कि मिल ही नहीं रहा था जबकि अखिल के मुक्के हिला रहे थे सर्गी को। हर मुक्के पर लग रहा था कि ये प्वाइंट अखिल को मिला लेकिन स्कोर देखते तो बराबर। अखिल जबर्दस्त सटीक, आक्रमक और तकनीक का परिचय दे रहा था। लग रहा था कि अब प्वाइंट मिला, अब प्वाइंट मिला, अब मिला और देखते देखते ही मैच खत्म। चारों राउंड की समाप्ति पर स्कोर बराबर।
फैसला 5 सदस्यीय जज के पैनल को करना था और दिल की धड़कन थोड़ी थमने लगी। दिल और आंखों को ये विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वर्ल्ड चैंपियन के साथ भिड़ने वाला ये शख्स भारतीय है। ये वो ही मुक्केबाज है जो कि एक साल से अपनी क्लाई के इलाज से जूझ रहा था। और फैसले से पहले ही अखिल जब दूसरे खेमें से हाथ मिलाने गया और सर्वी पस्त सा दिखने लगा तो लग गया कि जीत गया है हमारा अखिल। हमारे अखिल ने हमें आजादी के इस मौके पर ये तोहफा दिया है। ऑफिस में सब एक साथ खुशी से चीख पड़े और जब देखा कि सर्गी रो रहा है तो थोड़ा ठिठके कि सर्गी ने रैफरी से हाथ छुड़ा लिया और रोने लगा। हम यहां खुशी से झूम गए। अखिल ने जीत के बाद कहा कि वो गोल्ड से नीचे कुछ नहीं सोच रहे।
( "It will be a tough fight, but I am here to win the gold। I am ready to face the world champion because I want to be the No. 1 in the world. I will show this on August 15," said Akhil.(cout AFP) अखिल ने ये बात पिछली जीत के बाद कही थी)
वैसे भी अखिल ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। एशियन ओलंपिक क्वॉलिफाइंग टूर्नामेंट में भी नंबर वन बॉक्सर रहा अखिल। अखिल ने फिर से जगाई है उम्मीद कि बीजिंग में फिर से सुनाई दे हमारा राष्ट्रगान, जन गण मन....।

आपका अपना
नीतीश राज

(स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई)
फोटो साभार- गुगल, रॉयटर्स,एएफपी
कोट साभार- एएफपी

6 comments:

  1. जीत के लिए बहुत शुभकामनाऐं!

    स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

    ReplyDelete
  2. बहुत शुभकामनाऐं!

    वंदे मातरम्

    ReplyDelete
  3. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ओर शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  4. अखिल की जीत देखने के लिए यहाँ चटकाएं. ख़राब विडियो के लिए मैं पहले से ही माफ़ी मांग लेता हूँ, लेकिन क्या करून, सिर्फ़ यही विडियो मिला आज अंतरजाल पर!

    ReplyDelete
  5. ye muqabalaa dekh nahi paya tha,padh kar laga dekh liya.badhai aapko

    ReplyDelete
  6. ओह, यह खबर मुझे भी रोमांचक लगी!

    ReplyDelete

पोस्ट पर आप अपनी राय रख सकते हैं बसर्ते कि उसकी भाषा से किसी को दिक्कत ना हो। आपकी राय अनमोल है, उन शब्दों की तरह जिनका कोईं भी मोल नहीं।

“जब भी बोलो, सोच कर बोलो,
मुद्दतों सोचो, मुख्तसर बोलो”